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ग्राम पंचायत फंगवास के 14 गांवों में गहराया पेयजल संकट

Thu, 05 May 2022 11:45 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2022 11:45 PM IST
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Drinking water crisis deepens in 14 villages of Gram Panchayat Fangwas
ग्राम पंचायत फंगवास में पेयजल किल्लत के चलते प्राकृतिक स्रोतों से पानी लाने जातीं महिलाएं। - फोटो : Mandi
सुंदरनगर (मंडी)। नाचन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत फंगवास के 14 गांवों के लोग पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। गांव कटेरु, जनोग, मोवी, हपवाना, रांघडा, बिउंटल, मरहडा, सेरी, मनीहना, डोल, फंगवास, घेरू, कोलथी, पंजराहण में जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा है। मवेशियों के लिए पानी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के लिए लबुट पेयजल योजना से आपूर्ति दी जाती है। यह योजना 2002 में बनी है। अब आबादी कई गुना बढ़ चुकी है।
इस कारण अब पानी की कमी हो गई है। ग्रामीणों ने जलशक्ति विभाग के अधिकारियों से समस्या के समाधान की मांग की है। जल शक्ति विभाग के सहायक अभियंता कुलदीप गुप्ता ने बताया कि पेयजल भंडारण के नए टैंकों का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही लोगों की समस्या का समाधान होगा। अगर कहीं कोई पेयजल समस्या हो तो उसका समाधान किया जाएगा।
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- फंगवास पंचायत के गांवों में पानी की आपूर्ति के लिए 1962 में योजना बनी थी। इसका विस्तार 2002 में किया गया और 24 घंटे पानी की आपूर्ति की बात कही गई। 24 घंटे तो क्या दिन में दो घंटे भी पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है।
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-कमलेश कुमार
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लबुट पेयजल योजना में कानूनी अड़चन खत्म होने के बाद काम शुरू हुआ था। सरकार बदलने के बाद योजना का नाम बदल दिया गया। राजनीतिक दबाव के चलते योजना में दूसरे क्षेत्रों को शामिल किया है। पानी का स्रोत सूखने को है लेकिन दूसरे स्रोत से जोड़ने का कोई काम नहीं हो रहा है।
-जितेंद्र कुमार
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पेयजल योजना पर पहले तीन कर्मचारी आपूर्ति कार्य देखते थे। इनमें से दो सेवानिवृत्त हो गए हैं और उनकी जगह कोई नहीं रखा है। केवल मात्र एक कर्मचारी के हवाले ही योजना का जिम्मा है। यह पूरे क्षेत्र को देख पाने में असमर्थ है और सही ढंग से पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

-गोपाल शर्मा, ग्रामीण
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पेयजल योजना के विस्तार का कोई कार्य नहीं हुआ। राजनीतिक दबाव के चलते योजना में दूसरे गांवों को भी जोड़ा गया। इससे पानी की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। जलशक्ति विभाग को जल्द योजना का विस्तार करना चाहिए।
-धर्मानंद, ग्रामीण
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