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Mandi News: गोपूजन कर जीव-दया और प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
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पांगणा में बहुला चतुर्दशी पर गोपूजन करती महिलाएं। स्त्रोत- जागरूक पाठक्
करसोग (मंडी)। पांगणा, सुकेत और मंडी क्षेत्र में महिलाओं ने बहुला चतुर्दशी के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गोपूजन कर जीव-दया और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। महिलाओं ने व्रत रखकर घरों और गोशालाओं के आंगन को गोबर से पोतकर पवित्र किया।
इस दौरान जौ के आटे से गाय, बछड़े, बाघ, राजा और सीढ़ी सहित विभिन्न आकृतियां बनाकर पूजा की गई। धूप-दीप जलाकर गोमाता की आराधना की गई और उनके गले में दुर्वा की मालाएं पहनाई गईं। पूजन के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से बैठकर बहुला की लोककथा सुनी।
प्राकृतिक खेती से जुड़ी लीना शर्मा, ममता शर्मा, पुष्पलता महाजन, आशा शर्मा, कमलेश शर्मा, छाया, मुन्ना, दमयंती, सुदेश और वीना ने कहा कि आज बहुला चतुर्दशी की परंपरा और अधिक प्रासंगिक हो गई है। सड़कों पर लावारिस घूमते पशु, प्लास्टिक खाकर बीमार हो रहा गोवंश और घटती देसी पशु परंपराएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि केवल एक दिन गोपूजन करने के बजाय वर्षभर पशु कल्याण, स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त वातावरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहिए।
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इस दौरान जौ के आटे से गाय, बछड़े, बाघ, राजा और सीढ़ी सहित विभिन्न आकृतियां बनाकर पूजा की गई। धूप-दीप जलाकर गोमाता की आराधना की गई और उनके गले में दुर्वा की मालाएं पहनाई गईं। पूजन के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से बैठकर बहुला की लोककथा सुनी।
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प्राकृतिक खेती से जुड़ी लीना शर्मा, ममता शर्मा, पुष्पलता महाजन, आशा शर्मा, कमलेश शर्मा, छाया, मुन्ना, दमयंती, सुदेश और वीना ने कहा कि आज बहुला चतुर्दशी की परंपरा और अधिक प्रासंगिक हो गई है। सड़कों पर लावारिस घूमते पशु, प्लास्टिक खाकर बीमार हो रहा गोवंश और घटती देसी पशु परंपराएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि केवल एक दिन गोपूजन करने के बजाय वर्षभर पशु कल्याण, स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त वातावरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहिए।
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