{"_id":"6133afd28ebc3eca8223a31c","slug":"co-operative-societies-should-stop-exploitation-of-workers-mandi-news-sml3827301169","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मियों का शोषण बंद करे सहकारी सभाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मियों का शोषण बंद करे सहकारी सभाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
द्रंग (मंडी)। प्रदेश डिपो संचालक समिति ने सहकारी सभाओं की ओर से रखे विक्रेताओं और सचिवों के शोषण का आरोप लगाया है।
डिपो संचालक समिति के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कवि, महासचिव रामपाल शर्मा और सह सचिव रमेश चंद ने कहा कि प्रदेश के लगभग नौ जिलों में सहकारी सभाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर होने कारण इन सभाओं के विक्रेता राशन लाने के लिए अपना पैसा खर्च कर रहे हैं।
सभाओं के पास अपना भवन न होने के कारण विक्रेता दुकानों का किराया और बिजली का बिल भी खुद ही अदा कर रहे हैं। नियमानुसार यह सारी व्यवस्था सहकारी सभा को करनी पड़ती है। सभा की ओर से कर्मचारियों को मासिक वेतन देने का प्रावधान विभाग ने किया है लेकिन सहकारी सभाएं इन सभी नियमों को दरकिनार करके अपने कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार और सहकारिता विभाग से मांग की है कि प्रदेश में जिन सहकारी सभाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर है उनके विक्रेताओं को निजी डिपो देकर विधानसभा एस्टीमेट कमेटी की सिफारिश को लागू कर वेतन का प्रावधान किया जाए। जो सभाएं अपने कर्मचारियों को वेतन देने में सक्षम हैं उनकी प्रबंधन कमेटियों को सेवा नियमों के तहत वेतन देने के आदेश जारी सहकारिता विभाग जारी किए जाएं।
विज्ञापन
कहा कि जो प्रबंधन कमेटियां सहकारिता विभाग के आदेशों की पालना नहीं करती हैं विभाग उन कमेटियों को भंग करके वहां प्रशासक तैनात करे।
कर्मचारियों को सेवा नियमों के तहत वेतन देने का प्रावधान किया जाए। सरकार और सहकारिता विभाग से मांग की है कि सभाओं के कर्मचारियों का शोषण शीघ्र बंद नहीं किया तो समिति को मजबूरन संघर्ष पर उतरना पड़ेगा। संवाद
विज्ञापन
डिपो संचालक समिति के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कवि, महासचिव रामपाल शर्मा और सह सचिव रमेश चंद ने कहा कि प्रदेश के लगभग नौ जिलों में सहकारी सभाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर होने कारण इन सभाओं के विक्रेता राशन लाने के लिए अपना पैसा खर्च कर रहे हैं।
सभाओं के पास अपना भवन न होने के कारण विक्रेता दुकानों का किराया और बिजली का बिल भी खुद ही अदा कर रहे हैं। नियमानुसार यह सारी व्यवस्था सहकारी सभा को करनी पड़ती है। सभा की ओर से कर्मचारियों को मासिक वेतन देने का प्रावधान विभाग ने किया है लेकिन सहकारी सभाएं इन सभी नियमों को दरकिनार करके अपने कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं।
विज्ञापन
प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार और सहकारिता विभाग से मांग की है कि प्रदेश में जिन सहकारी सभाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर है उनके विक्रेताओं को निजी डिपो देकर विधानसभा एस्टीमेट कमेटी की सिफारिश को लागू कर वेतन का प्रावधान किया जाए। जो सभाएं अपने कर्मचारियों को वेतन देने में सक्षम हैं उनकी प्रबंधन कमेटियों को सेवा नियमों के तहत वेतन देने के आदेश जारी सहकारिता विभाग जारी किए जाएं।
विज्ञापन
कहा कि जो प्रबंधन कमेटियां सहकारिता विभाग के आदेशों की पालना नहीं करती हैं विभाग उन कमेटियों को भंग करके वहां प्रशासक तैनात करे।
कर्मचारियों को सेवा नियमों के तहत वेतन देने का प्रावधान किया जाए। सरकार और सहकारिता विभाग से मांग की है कि सभाओं के कर्मचारियों का शोषण शीघ्र बंद नहीं किया तो समिति को मजबूरन संघर्ष पर उतरना पड़ेगा। संवाद