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Mandi News: मंडी में बच्चों ने लगाई अखरोटों की बाजी
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मंडी में सायर उत्सव पर पुजा अर्चना करती बालिकाएं। संवाद
मंडी। जिलेभर में मंगलवार को सायर पर्व मनाया गया। लोगों ने पूजा अर्चना की। पकवान भी बनाए गए। युवाओं और बच्चों ने हाथों में अखरोट और द्रूब लेकर बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया।
बुजुर्गों ने कुछ अखरोट और पैसे देकर उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। घर के आंगन, गली चौराहों पर युवाओं और बच्चों की टोलियों ने अखरोट की खेल खेलते हुए खुशी जताई। भादो माह के समापन और अश्विनी मास की संक्रांति के दिन सायर पर्व मनाया जाता है। महिलाओं ने घरों की साफ-सफाई की।
स्नान के बाद अखरोट, धान की बालियां, मक्की, पेठा, खीरा, गलगल और अन्य सामग्री को पूजा स्थल में सजाया। पारंपरिक पकवान तैयार करने के बाद पूजा स्थल, आंगन और दहलीज पर फूल पत्री डाली गई। पूरे परिवार ने एक साथ पूजा।
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अर्चना कर अपने इष्ट कुल देवी-देवताओं को भोग लगाया। पकवानों में कचौरी, रोटी, भल्ले-बाबरू, पतरोड़ू, आलू- चने और कद्दू की सब्जी, सेपूबड़ी सहित अन्य तरह के व्यंजन बनाए। आस पड़ोस में पकवान बांट कर सायर पर्व की बधाई दी। परंपरा के अनुसार सायर पर्व पर सभी लोग हाथों में पहनी राखी को उतार कर सायर को अर्पित करते हैं। दिन ढलने से पहले पहले इस पूजा सामग्री को बहते जल में प्रवाहित करने की परंपरा है।
भादो माह शुरू होने से पहले अपने मायके गई नव विवाहित महिलाएं भी सायर पर्व पर अपने ससुराल लौट आईं और परिवार के साथ पहला सायर पर्व मनाया। मंडी शहर की बुजुर्ग महिला धर्मी देवी, गोपाल, रोशन लाल, पुन्नी देवी, डीएन कपूर, केआर पंछी, राकेश कपूर आदि का कहना है कि सायर पर्व पर अब युवा पीढ़ी अधिक रूचि नहीं ले रही। युवा वर्ग अपनी परंपराओं, रीति रिवाजों, लोक संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।
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बुजुर्गों ने कुछ अखरोट और पैसे देकर उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। घर के आंगन, गली चौराहों पर युवाओं और बच्चों की टोलियों ने अखरोट की खेल खेलते हुए खुशी जताई। भादो माह के समापन और अश्विनी मास की संक्रांति के दिन सायर पर्व मनाया जाता है। महिलाओं ने घरों की साफ-सफाई की।
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स्नान के बाद अखरोट, धान की बालियां, मक्की, पेठा, खीरा, गलगल और अन्य सामग्री को पूजा स्थल में सजाया। पारंपरिक पकवान तैयार करने के बाद पूजा स्थल, आंगन और दहलीज पर फूल पत्री डाली गई। पूरे परिवार ने एक साथ पूजा।
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अर्चना कर अपने इष्ट कुल देवी-देवताओं को भोग लगाया। पकवानों में कचौरी, रोटी, भल्ले-बाबरू, पतरोड़ू, आलू- चने और कद्दू की सब्जी, सेपूबड़ी सहित अन्य तरह के व्यंजन बनाए। आस पड़ोस में पकवान बांट कर सायर पर्व की बधाई दी। परंपरा के अनुसार सायर पर्व पर सभी लोग हाथों में पहनी राखी को उतार कर सायर को अर्पित करते हैं। दिन ढलने से पहले पहले इस पूजा सामग्री को बहते जल में प्रवाहित करने की परंपरा है।
भादो माह शुरू होने से पहले अपने मायके गई नव विवाहित महिलाएं भी सायर पर्व पर अपने ससुराल लौट आईं और परिवार के साथ पहला सायर पर्व मनाया। मंडी शहर की बुजुर्ग महिला धर्मी देवी, गोपाल, रोशन लाल, पुन्नी देवी, डीएन कपूर, केआर पंछी, राकेश कपूर आदि का कहना है कि सायर पर्व पर अब युवा पीढ़ी अधिक रूचि नहीं ले रही। युवा वर्ग अपनी परंपराओं, रीति रिवाजों, लोक संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।
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