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चेक बाउंस मामले में आरोपी की अपील निरस्त
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मंडी। चेक बाउंस मामले में अपीलीय अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय की सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील को निरस्त कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एससी कैंथला के न्यायालय ने थुनाग तहसील के टिपरी (छतरी) निवासी पवन कुमार की अपील को खारिज करते हुए अधीनस्थ न्यायालय की सजा के फैसले को बरकरार रखा है।
अधीनस्थ न्यायालय ने एचडीएफसी बैंक की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ चलाए गए अभियोग के साबित होने पर उसे तीन माह के साधारण कारावास और 13,60,000 रुपये हर्जाने का फैसला सुनाया था। आरोपी ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को अपीलीय न्यायालय में चुनौती दी थी।
अपीलकर्ता का कहना था कि अधीनस्थ न्यायालय सबूतों की व्याख्या करने में असफल रहा है। आरोपी की बैंक को कोई देनदारी नहीं थी। आरोपी ने देनदारी चुकाने के लिए कोई चेक जारी नहीं किया था। इस बारे में कोई साक्ष्य नहीं हैं कि चेक में दिखाई गई राशि की कोई देनदारी नहीं थी। शिकायतकर्ता बैंक का कहना था कि अधीनस्थ न्यायालय का फैसला बिल्कुल सही है। बैंक की ओर से जारी मेमो से साफ जाहिर होता है कि आरोपी ने खाते की देनदारी रोक दी थी।
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आरोपी को नोटिस प्राप्त होना भी साबित हुआ है। अपीलीय अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय को सही मानते हुए कहा कि आरोपी ने इस चेक को शिकायतकर्ता को विधिक देनदारी को चुकाने के लिए जारी किया था। इसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त सजा और हर्जाना अदा करने का फैसला बरकरार रखते हुए अपील को निरस्त करने का फैसला सुनाया है।
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अधीनस्थ न्यायालय ने एचडीएफसी बैंक की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ चलाए गए अभियोग के साबित होने पर उसे तीन माह के साधारण कारावास और 13,60,000 रुपये हर्जाने का फैसला सुनाया था। आरोपी ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को अपीलीय न्यायालय में चुनौती दी थी।
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अपीलकर्ता का कहना था कि अधीनस्थ न्यायालय सबूतों की व्याख्या करने में असफल रहा है। आरोपी की बैंक को कोई देनदारी नहीं थी। आरोपी ने देनदारी चुकाने के लिए कोई चेक जारी नहीं किया था। इस बारे में कोई साक्ष्य नहीं हैं कि चेक में दिखाई गई राशि की कोई देनदारी नहीं थी। शिकायतकर्ता बैंक का कहना था कि अधीनस्थ न्यायालय का फैसला बिल्कुल सही है। बैंक की ओर से जारी मेमो से साफ जाहिर होता है कि आरोपी ने खाते की देनदारी रोक दी थी।
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आरोपी को नोटिस प्राप्त होना भी साबित हुआ है। अपीलीय अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय को सही मानते हुए कहा कि आरोपी ने इस चेक को शिकायतकर्ता को विधिक देनदारी को चुकाने के लिए जारी किया था। इसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त सजा और हर्जाना अदा करने का फैसला बरकरार रखते हुए अपील को निरस्त करने का फैसला सुनाया है।
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