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Mandi News: हाईकोर्ट की रोक के बीच सुनाह लंबाथाच में नलवाड़ मेले की तैयारियां शुरू
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पंचायत दाखिल करेगी पुनर्विचार याचिका : प्रधान सरोज शर्मा
श्संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र स्थित कॉलेज परिसर में पारंपरिक नलवाड़ मेले के आयोजन पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की रोक के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर पर मेले के पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। हाईकोर्ट द्वारा शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों में गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति न देने के सख्त निर्णय के बाद अब स्थानीय पंचायत कानूनी विकल्प तलाश रही है।
सुनाह लंबाथाच पंचायत की प्रधान सरोज शर्मा ने बताया कि यह आयोजन महज एक सांस्कृतिक गतिविधि नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था से जुड़ा प्राचीन मेला है। मेले में देव तुंगासी और देवी महामाया से जुड़ी गहरी धार्मिक मान्यताएं हैं। स्थानीय परंपराओं और लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए पंचायत प्रशासन हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रहा है, ताकि मेले का आयोजन निर्बाध रूप से हो सके। वहीं, मेले के व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए पंचायत ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। व्यापारी लंबाथाच पहुंचने लगे हैं। पंचायत की ओर से अब तक मेले में व्यापारिक गतिविधियों के लिए करीब 100 प्लाॅट आवंटित किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए कॉलेज परिसर में मेले के आयोजन की अनुमति देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय निवासी इस प्राचीन देव परंपरा को बनाए रखने के लिए एकजुट हैं। पंचायत का मानना है कि पुनर्विचार याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष मेले से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि इसका पारंपरिक आयोजन शांतिपूर्वक और गरिमा के साथ संपन्न कराया जा सके।
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बदलते दौर में बदला मेले का स्वरूप
दशकों से आयोजित हो रहा यह मेला पहले पशुओं के बड़े व्यापार के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध था। बदलते दौर के साथ मेले का स्वरूप भी बदला है। अब इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रमुख हो गई हैं। मेला सात सितंबर को देव तुंगासी द्वारा खूंटा गाड़ने की परंपरा के साथ शुरू होगा।
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श्संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र स्थित कॉलेज परिसर में पारंपरिक नलवाड़ मेले के आयोजन पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की रोक के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर पर मेले के पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। हाईकोर्ट द्वारा शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों में गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति न देने के सख्त निर्णय के बाद अब स्थानीय पंचायत कानूनी विकल्प तलाश रही है।
सुनाह लंबाथाच पंचायत की प्रधान सरोज शर्मा ने बताया कि यह आयोजन महज एक सांस्कृतिक गतिविधि नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था से जुड़ा प्राचीन मेला है। मेले में देव तुंगासी और देवी महामाया से जुड़ी गहरी धार्मिक मान्यताएं हैं। स्थानीय परंपराओं और लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए पंचायत प्रशासन हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रहा है, ताकि मेले का आयोजन निर्बाध रूप से हो सके। वहीं, मेले के व्यापारिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए पंचायत ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। व्यापारी लंबाथाच पहुंचने लगे हैं। पंचायत की ओर से अब तक मेले में व्यापारिक गतिविधियों के लिए करीब 100 प्लाॅट आवंटित किए जा चुके हैं।
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हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए कॉलेज परिसर में मेले के आयोजन की अनुमति देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय निवासी इस प्राचीन देव परंपरा को बनाए रखने के लिए एकजुट हैं। पंचायत का मानना है कि पुनर्विचार याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष मेले से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि इसका पारंपरिक आयोजन शांतिपूर्वक और गरिमा के साथ संपन्न कराया जा सके।
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बदलते दौर में बदला मेले का स्वरूप
दशकों से आयोजित हो रहा यह मेला पहले पशुओं के बड़े व्यापार के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध था। बदलते दौर के साथ मेले का स्वरूप भी बदला है। अब इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रमुख हो गई हैं। मेला सात सितंबर को देव तुंगासी द्वारा खूंटा गाड़ने की परंपरा के साथ शुरू होगा।