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अपीलीय अदालत ने बदला अधीनस्थ न्यायालय का फैसला
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मंडी। अपीलीय अदालत ने चेक बाउंस का अभियोग साबित न होने पर आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय की ओर से सुनाई गई सजा के फैसले को निरस्त करने का आदेश दिया है।
सत्र न्यायाधीश की अपीलीय अदालत ने अपर समखेतर स्थित प्रो. प्रुथी स्पाइसेज के मालिक ज्योति प्रुथी पत्नी विमल कुमार प्रुथी को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट की धारा 138 के तहत चलाए गए अभियोग से बरी करने का फैसला सुनाया है।
अधीनस्थ न्यायालय ने पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर चलाए गए अभियोग में आरोपी को तीन माह के साधारण कारावास और एक लाख दस हजार रुपये हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया था। आरोपी ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती दी थी।
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अपीलीय अदालत ने आरोपी की अपील पर सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि इस मामले में लोन एकाउंट के तहत मैसर्ज प्रुथी स्पाइसेज इंडस्ट्रीज के नाम से चेक जारी किया था। चेक में प्राप्त करने वाले की जगह पंजाब नेशनल बैंक का नाम नहीं था। शिकायतकर्ता की ओर से यह नहीं कहा गया था कि चेक उनके नाम पर जारी किया गया है। इस मामले में चेक शिकायतकर्ता के नाम से जारी नहीं किया गया था बल्कि मैसर्ज प्रुथी के नाम पर था। इस चेक को लोन एकाउंट में ही जमा होना था।
ऐसे में बैंक की शिकायत स्वीकार करने योग्य नहीं है। अपीलीय अदालत ने कहा कि शिकायत सही तरीके से दायर नहीं की थी और यह दोषपूर्ण थी। ऐसे में अदालत ने आरोपी की अपील को स्वीकार करते हुए अधीनस्थ न्यायालय की सुनाई गई सजा के फैसले को निरस्त करते हुए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। संवाद
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सत्र न्यायाधीश की अपीलीय अदालत ने अपर समखेतर स्थित प्रो. प्रुथी स्पाइसेज के मालिक ज्योति प्रुथी पत्नी विमल कुमार प्रुथी को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट की धारा 138 के तहत चलाए गए अभियोग से बरी करने का फैसला सुनाया है।
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अधीनस्थ न्यायालय ने पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर चलाए गए अभियोग में आरोपी को तीन माह के साधारण कारावास और एक लाख दस हजार रुपये हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया था। आरोपी ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती दी थी।
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अपीलीय अदालत ने आरोपी की अपील पर सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि इस मामले में लोन एकाउंट के तहत मैसर्ज प्रुथी स्पाइसेज इंडस्ट्रीज के नाम से चेक जारी किया था। चेक में प्राप्त करने वाले की जगह पंजाब नेशनल बैंक का नाम नहीं था। शिकायतकर्ता की ओर से यह नहीं कहा गया था कि चेक उनके नाम पर जारी किया गया है। इस मामले में चेक शिकायतकर्ता के नाम से जारी नहीं किया गया था बल्कि मैसर्ज प्रुथी के नाम पर था। इस चेक को लोन एकाउंट में ही जमा होना था।
ऐसे में बैंक की शिकायत स्वीकार करने योग्य नहीं है। अपीलीय अदालत ने कहा कि शिकायत सही तरीके से दायर नहीं की थी और यह दोषपूर्ण थी। ऐसे में अदालत ने आरोपी की अपील को स्वीकार करते हुए अधीनस्थ न्यायालय की सुनाई गई सजा के फैसले को निरस्त करते हुए आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। संवाद