{"_id":"5a8d9cd24f1c1b4f588b9efa","slug":"91519230162-mandi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मधुर शहनाई पर झुमते देवरथों के नजारों को अब एक साल का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मधुर शहनाई पर झुमते देवरथों के नजारों को अब एक साल का इंतजार
Updated Wed, 21 Feb 2018 09:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देव समागम के समापन पर सूनी हुई छोटी काशी
अद्भुत नजारे के लिए करना पड़ेगा एक साल इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। सात दिन तक अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में मधुर शहनाई और देवधुनों पर झूमते देवी देवताओं और देवलुओं के नजारे के लिए अब एक साल का इंतजार करना पड़ेगा। राजदेवता माधोराय की अंतिम जलेब के साथ देव मानस के मिलन पर्व का विधिवत समापन हो गया है। देवताओं के मूल स्थानों को लौटते ही छोटी काशी फिर सूनी हो गई है।
शिवरात्रि महोत्सव देव मानस मिलन का पर्व है। महोत्सव में देवताओं के साथ आम लोग भी एक-दूसरे से मिलते हैं। मानस की भांति देवता भी रिश्तों की डोर में बंधे हैं। इनमें बड़ा देव कमरूनाम क्षेत्र विशेष के देवताओं के अग्रज हैं। चौहारघाटी के हुरंग नारायण देवता भी अपने-अपने क्षेत्र के देवताओं में वरिष्ठ माने जाते हैं। शिवरात्रि में देवताओं में क्रम और वरिष्ठता का ख्याल रखा जाता है। उनके देव समागम में बैठने से लेकर आपसी मिलन में भी वरिष्ठता क्रम को देखा जा सकता है। वरिष्ठ देवता सदैव सबसे पहले बैठते हैं। वहीं, जब दो देवता आपस में मिलते हैं तो छोटा देवता वरिष्ठ देवता की परिक्रमा करते हुए उससे मिलता है। देव मिलन का दृश्य अपने आपमें मार्मिक और भावपूर्ण होता है। शिवरात्रि के दौरान जहां बड़ा देव कमरूनाग टारना की पहाड़ियों में रहते हैं तो कई देवियां नरोल यानी एकांत वास में रहती हैं। इनमें बूढ़ी भैरवा पंडोह, बगलामुखी, देवी कुकलाह, मसवाई भगवती कैहनवाल, धूमा देवी आदि प्रमुख हैं।
विज्ञापन
अद्भुत नजारे के लिए करना पड़ेगा एक साल इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। सात दिन तक अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में मधुर शहनाई और देवधुनों पर झूमते देवी देवताओं और देवलुओं के नजारे के लिए अब एक साल का इंतजार करना पड़ेगा। राजदेवता माधोराय की अंतिम जलेब के साथ देव मानस के मिलन पर्व का विधिवत समापन हो गया है। देवताओं के मूल स्थानों को लौटते ही छोटी काशी फिर सूनी हो गई है।
शिवरात्रि महोत्सव देव मानस मिलन का पर्व है। महोत्सव में देवताओं के साथ आम लोग भी एक-दूसरे से मिलते हैं। मानस की भांति देवता भी रिश्तों की डोर में बंधे हैं। इनमें बड़ा देव कमरूनाम क्षेत्र विशेष के देवताओं के अग्रज हैं। चौहारघाटी के हुरंग नारायण देवता भी अपने-अपने क्षेत्र के देवताओं में वरिष्ठ माने जाते हैं। शिवरात्रि में देवताओं में क्रम और वरिष्ठता का ख्याल रखा जाता है। उनके देव समागम में बैठने से लेकर आपसी मिलन में भी वरिष्ठता क्रम को देखा जा सकता है। वरिष्ठ देवता सदैव सबसे पहले बैठते हैं। वहीं, जब दो देवता आपस में मिलते हैं तो छोटा देवता वरिष्ठ देवता की परिक्रमा करते हुए उससे मिलता है। देव मिलन का दृश्य अपने आपमें मार्मिक और भावपूर्ण होता है। शिवरात्रि के दौरान जहां बड़ा देव कमरूनाग टारना की पहाड़ियों में रहते हैं तो कई देवियां नरोल यानी एकांत वास में रहती हैं। इनमें बूढ़ी भैरवा पंडोह, बगलामुखी, देवी कुकलाह, मसवाई भगवती कैहनवाल, धूमा देवी आदि प्रमुख हैं।
विज्ञापन