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.......देवता भी रिश्तों की डोर में बंधे
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...देवता भी बंधे हैं रिश्तों की डोर में
देव मानस मिलन का गवाह बना ऐतिहासिक शिवरात्रि मेला
देवताओं में क्रम और वरिष्ठता का भी रखा खयाल
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव देव-मानस मिलन का पर्व है। इस महोत्सव में देवताओं के साथ आम लोग भी एक दूसरे से मिलते हैं, लेकिन देव मिलन अपने आप में एक अनूठा संगम है। देवता भी रिश्तों की डोर में बंधे हैं। इनमें बड़ा देव कमरूनाम क्षेत्र विशेष के देवताओं के अग्रज हैं। वहीं, चौहारघाटी के राजा हुरंग नारायण देवता भी अपने-अपने क्षेत्र के देवताओं में वरिष्ठ माने जाते हैं। देवताओं में क्रम और वरिष्ठता का ख्याल रखा जाता है, जो उनके देव समागम में बैठने से लेकर आपसी मिलन में भी देखा जा सकता है।
वरिष्ठ देवता सदैव सबसे पहले बैठते हैं। वहीं, जब दो देवता आपस में मिलते हैं तो छोटा देवता वरिष्ठ देवता की परिक्रमा करते हुए उससे मिलता है। देव मिलन का दृश्य अपने आप में मार्मिक और भावपूर्ण होता है, जो कि शिवरात्रि मेल में देखने को मिलता है। ढोल नगाड़ों की ताल पर झूमते हुए देवता जब आपस में मिलते हैं तो रिश्तों की गर्माहट और संवेदना का अहसास होता है। शिवरात्रि के दौरान जहां बड़ा देव कमरूनाग टारना की पहाड़ियों में रहते हैं तो कई देवियां नरोल यानी एकांतवास में रहती हैं। इनमें बूढ़ी भैरवा पंडोह, बगलामुखी, देवी कुकलाह, मसवाई भगवती कैहनवाल, धूमा देवी और कश्मीरी माता आदि प्रमुख हैं।
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देव मानस मिलन का गवाह बना ऐतिहासिक शिवरात्रि मेला
देवताओं में क्रम और वरिष्ठता का भी रखा खयाल
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव देव-मानस मिलन का पर्व है। इस महोत्सव में देवताओं के साथ आम लोग भी एक दूसरे से मिलते हैं, लेकिन देव मिलन अपने आप में एक अनूठा संगम है। देवता भी रिश्तों की डोर में बंधे हैं। इनमें बड़ा देव कमरूनाम क्षेत्र विशेष के देवताओं के अग्रज हैं। वहीं, चौहारघाटी के राजा हुरंग नारायण देवता भी अपने-अपने क्षेत्र के देवताओं में वरिष्ठ माने जाते हैं। देवताओं में क्रम और वरिष्ठता का ख्याल रखा जाता है, जो उनके देव समागम में बैठने से लेकर आपसी मिलन में भी देखा जा सकता है।
वरिष्ठ देवता सदैव सबसे पहले बैठते हैं। वहीं, जब दो देवता आपस में मिलते हैं तो छोटा देवता वरिष्ठ देवता की परिक्रमा करते हुए उससे मिलता है। देव मिलन का दृश्य अपने आप में मार्मिक और भावपूर्ण होता है, जो कि शिवरात्रि मेल में देखने को मिलता है। ढोल नगाड़ों की ताल पर झूमते हुए देवता जब आपस में मिलते हैं तो रिश्तों की गर्माहट और संवेदना का अहसास होता है। शिवरात्रि के दौरान जहां बड़ा देव कमरूनाग टारना की पहाड़ियों में रहते हैं तो कई देवियां नरोल यानी एकांतवास में रहती हैं। इनमें बूढ़ी भैरवा पंडोह, बगलामुखी, देवी कुकलाह, मसवाई भगवती कैहनवाल, धूमा देवी और कश्मीरी माता आदि प्रमुख हैं।
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