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Kullu News: पानी घटा, चिंता बढ़ी... बारिश के भरोसे ग्रामीण
Wed, 07 Jan 2026 10:42 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 07 Jan 2026 10:42 PM IST
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कड़ाके की ठंड और सूखे जैसे हालात के बीच 15 फीसदी तक घटा स्रोतों का जलस्तर
अभी न पहाड़ बर्फ से ढके और न खुलकर बरसे मेघ, किसानों-बागवानों की चिंता बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कड़ाके की ठंड और सूखे जैसे हालात ने कुल्लू के जलस्रोतों को संकट में डाल दिया है। ब्यास नदी, सरवरी खड्ड, पार्वती और गड़सा खड्ड सूखती नजर आ रही हैं। स्रोतों का जलस्तर 15 फीसदी घट गया है।
स्रोतों का पानी घटने से लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लोग अब बारिश के भरोसे हैं। जिले में पिछले चार महीने से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। नवंबर-दिसंबर बीतने के बाद जनवरी का महीना भी शुरू हो गया है। अभी तक न पहाड़ बर्फ से ढके हैं और न ही खुलकर बारिश हो पाई है। आने वाले दिनों में भी अगर बादल नहीं बरसे तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
पेयजल स्रोतों में जलस्तर कम होने से पेयजल आपूर्ति जल शक्ति विभाग ने सुचारू रखी है। कड़ाके की ठंड में पारा माइनस में जा रहा है। ऐसे में जल शक्ति विभाग के लिए सूखे जैसे हालात के बीच पेयजल आपूर्ति को सुचारू रखना आसान नहीं होगा। जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पेयजल को लेकर अकसर परेशानी रहती है।
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गौर रहे कि कुल्लू, मनाली, बंजार और आनी उपमंडल में विभाग की 700 से योजनाएं हैं। अगस्त में आई आपदा के बाद इनमें करीब 500 योजनाएं प्रभावित हुई थीं। इन्हें विभाग ने रिस्टोर कर लिया था। कुछ सिंचाई योजनाओं में कार्य किया जाना बाकी है। इसके बाद ही ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इनका लाभ मिलेगा। बारिश और बर्फबारी होने के बाद ही पेयजल स्रोत रिचार्ज हो पाएंगे।
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सूखे जैसे हालात के बीच पेयजल आपूर्ति पर फिलहाल किसी तरह का असर नहीं है। पेयजल आपूर्ति सुचारू है। आपदा के दौरान बंद सिंचाई योजनाओं को भी दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है। - विनोद ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग
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ब्यास नदी में भी काफी घटा जलस्तर
ब्यास नदी में जलस्तर जनवरी के महीने में काफी कम हो गया है। ब्यास नदी में गर्मियों के मुकाबले पानी आधा से कम रह गया है। गर्मियों के दौरान ब्यास में पानी ज्यादा होने से पत्थर नजर नहीं आते हैं, इन दिनों पत्थरों के ढेर ही दिख रहे हैं। सरवरी खड्ड, पार्वती, गड़सा खड्ड आदि नालों का भी यही हाल है।
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अभी न पहाड़ बर्फ से ढके और न खुलकर बरसे मेघ, किसानों-बागवानों की चिंता बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कड़ाके की ठंड और सूखे जैसे हालात ने कुल्लू के जलस्रोतों को संकट में डाल दिया है। ब्यास नदी, सरवरी खड्ड, पार्वती और गड़सा खड्ड सूखती नजर आ रही हैं। स्रोतों का जलस्तर 15 फीसदी घट गया है।
स्रोतों का पानी घटने से लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लोग अब बारिश के भरोसे हैं। जिले में पिछले चार महीने से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। नवंबर-दिसंबर बीतने के बाद जनवरी का महीना भी शुरू हो गया है। अभी तक न पहाड़ बर्फ से ढके हैं और न ही खुलकर बारिश हो पाई है। आने वाले दिनों में भी अगर बादल नहीं बरसे तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
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पेयजल स्रोतों में जलस्तर कम होने से पेयजल आपूर्ति जल शक्ति विभाग ने सुचारू रखी है। कड़ाके की ठंड में पारा माइनस में जा रहा है। ऐसे में जल शक्ति विभाग के लिए सूखे जैसे हालात के बीच पेयजल आपूर्ति को सुचारू रखना आसान नहीं होगा। जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पेयजल को लेकर अकसर परेशानी रहती है।
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गौर रहे कि कुल्लू, मनाली, बंजार और आनी उपमंडल में विभाग की 700 से योजनाएं हैं। अगस्त में आई आपदा के बाद इनमें करीब 500 योजनाएं प्रभावित हुई थीं। इन्हें विभाग ने रिस्टोर कर लिया था। कुछ सिंचाई योजनाओं में कार्य किया जाना बाकी है। इसके बाद ही ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इनका लाभ मिलेगा। बारिश और बर्फबारी होने के बाद ही पेयजल स्रोत रिचार्ज हो पाएंगे।
सूखे जैसे हालात के बीच पेयजल आपूर्ति पर फिलहाल किसी तरह का असर नहीं है। पेयजल आपूर्ति सुचारू है। आपदा के दौरान बंद सिंचाई योजनाओं को भी दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है। - विनोद ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग
ब्यास नदी में भी काफी घटा जलस्तर
ब्यास नदी में जलस्तर जनवरी के महीने में काफी कम हो गया है। ब्यास नदी में गर्मियों के मुकाबले पानी आधा से कम रह गया है। गर्मियों के दौरान ब्यास में पानी ज्यादा होने से पत्थर नजर नहीं आते हैं, इन दिनों पत्थरों के ढेर ही दिख रहे हैं। सरवरी खड्ड, पार्वती, गड़सा खड्ड आदि नालों का भी यही हाल है।