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Kullu News: स्क्रब टायफस से जंग... अब हर घर बनेगा इलाज का केंद्र
Wed, 06 Aug 2025 10:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 06 Aug 2025 10:25 PM IST
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जिले में चलाया जाएगा विशेष अभियान, घर-द्वार जाएगी स्वास्थ्य विभाग की टीम
घर-घर जाकर मरीजों की स्क्रीनिंग करेंगी 525 आशा कार्यकर्ता
विभाग का प्लान तैयार, शिक्षकों-कर्मचारियों का भी लेंगे सहयोग
राजीव नैय्यर
कुल्लू। बरसात के मौसम में बढ़ते स्क्रब टायफस के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग कुल्लू ने कमर कस ली है। बुखार से पीड़ित मरीजों की पहचान घर-द्वार होगी।
जरूरत पड़ने पर इलाज भी वहीं मिलेगा। 525 आशा कार्यकर्ताओं और सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों (सीएचओ) की टीम मिलकर इस संक्रमण को जड़ से खत्म करने की तैयारी में जुट गई है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल स्क्रब टायफस से जंग में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। विभाग ने लोगों को बरसात के मौसम में एहतियात बरतने की सलाह दी है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हाल ही में स्क्रब टायफस के मामलों में वृद्धि हुई है। ऐसे में विभाग ने जिले में घर-द्वार स्क्रीनिंग और उपचार की योजना बनाई है।
लोगों को जागरूक करने के लिए पंचायतीराज संस्थाओं, आईसीडीएस पदाधिकारियों, शिक्षकाें-कर्मचारियों और चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य शिक्षकों, स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों और एमपीडब्ल्यू सहित अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जाएगा। इनके सहयोग से स्क्रब टायफस के लक्षणों की शीघ्र पहचान, रोकथाम के तरीकों और समय पर उपचार के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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उधर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेश ने कहा कि स्क्रब टायफस की रोकथाम के लिए प्लान तैयार है। 525 आशा कार्यकर्ता घर-द्वार बुखार के रोगियों की स्क्रीनिंग करेंगी। स्क्रब टायफस के लक्षण दिखने पर संबंधित क्षेत्र के सीएचओ मरीज का उपचार करेंगे।
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तीव्र बुखार से पीड़ित मरीजों का डॉक्सीसाइक्लिन या एजिथ्रोमाइसिन से संभावित उपचार किया जाएगा। सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में इन दवाओं का भंडार रहे। सीएचओ घर-द्वार स्क्रब टायफस के मरीजों का उपचार करेंगे और दवा वितरित करेंगे। -डॉ. एन आर पवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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स्क्रब टायफस से ऐसे करें बचाव
खेतों में काम करते समय हाथ और पैर की सुरक्षा के लिए पूरी लंबाई के कपड़े पहनें। घर के आसपास साफ-सफाई रखें। खरपतवार न उगने दें। घास काटने या घनी वनस्पतियों के संपर्क में आने के बाद स्नान करें। शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। पालतू जानवरों की नियमित सफाई करें। संक्रमित पिस्सुओं के काटने से बचने के लिए जमीन पर न सोएं। हरे घास के मैदान में न बैठें और न ही लेटें।
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घर-घर जाकर मरीजों की स्क्रीनिंग करेंगी 525 आशा कार्यकर्ता
विभाग का प्लान तैयार, शिक्षकों-कर्मचारियों का भी लेंगे सहयोग
राजीव नैय्यर
कुल्लू। बरसात के मौसम में बढ़ते स्क्रब टायफस के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग कुल्लू ने कमर कस ली है। बुखार से पीड़ित मरीजों की पहचान घर-द्वार होगी।
जरूरत पड़ने पर इलाज भी वहीं मिलेगा। 525 आशा कार्यकर्ताओं और सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों (सीएचओ) की टीम मिलकर इस संक्रमण को जड़ से खत्म करने की तैयारी में जुट गई है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल स्क्रब टायफस से जंग में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। विभाग ने लोगों को बरसात के मौसम में एहतियात बरतने की सलाह दी है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हाल ही में स्क्रब टायफस के मामलों में वृद्धि हुई है। ऐसे में विभाग ने जिले में घर-द्वार स्क्रीनिंग और उपचार की योजना बनाई है।
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लोगों को जागरूक करने के लिए पंचायतीराज संस्थाओं, आईसीडीएस पदाधिकारियों, शिक्षकाें-कर्मचारियों और चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य शिक्षकों, स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों और एमपीडब्ल्यू सहित अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जाएगा। इनके सहयोग से स्क्रब टायफस के लक्षणों की शीघ्र पहचान, रोकथाम के तरीकों और समय पर उपचार के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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उधर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेश ने कहा कि स्क्रब टायफस की रोकथाम के लिए प्लान तैयार है। 525 आशा कार्यकर्ता घर-द्वार बुखार के रोगियों की स्क्रीनिंग करेंगी। स्क्रब टायफस के लक्षण दिखने पर संबंधित क्षेत्र के सीएचओ मरीज का उपचार करेंगे।
तीव्र बुखार से पीड़ित मरीजों का डॉक्सीसाइक्लिन या एजिथ्रोमाइसिन से संभावित उपचार किया जाएगा। सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में इन दवाओं का भंडार रहे। सीएचओ घर-द्वार स्क्रब टायफस के मरीजों का उपचार करेंगे और दवा वितरित करेंगे। -डॉ. एन आर पवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
स्क्रब टायफस से ऐसे करें बचाव
खेतों में काम करते समय हाथ और पैर की सुरक्षा के लिए पूरी लंबाई के कपड़े पहनें। घर के आसपास साफ-सफाई रखें। खरपतवार न उगने दें। घास काटने या घनी वनस्पतियों के संपर्क में आने के बाद स्नान करें। शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। पालतू जानवरों की नियमित सफाई करें। संक्रमित पिस्सुओं के काटने से बचने के लिए जमीन पर न सोएं। हरे घास के मैदान में न बैठें और न ही लेटें।