{"_id":"696bc39b30d5ae8e79060688","slug":"there-is-no-concrete-mechanism-and-no-door-to-door-cylinder-inspection-kullu-news-c-89-1-klu1002-166803-2026-01-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: न कोई ठोस तंत्र और न घर जाकर हो रही सिलिंडर की तकनीकी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: न कोई ठोस तंत्र और न घर जाकर हो रही सिलिंडर की तकनीकी जांच
Sat, 17 Jan 2026 10:45 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 17 Jan 2026 10:45 PM IST
विज्ञापन
जिले में रसोई गैस की सुरक्षा की हालत चिंताजनक, खोखले साबित हो रहे जागरूकता अभियान के दावे
नियम के अनुसार हर पांच साल बाद बदलना पड़ा है पाइप, घरों में नहीं होने चाहिए दो से ज्यादा सिलिंडर
गौरी शंकर
कुल्लू। जिले में रसोई गैस सुरक्षा की हालत चिंताजनक है। नियम स्पष्ट हैं कि हर पांच साल बाद सिलिंडर का पाइप बदलना अनिवार्य है।
दो से अधिक सिलिंडर वाले घरों में जांच होनी चाहिए लेकिन जिला और निजी गैस एजेंसियों के पास इसे लागू करने का कोई ठोस तंत्र नहीं है। जागरूकता अभियान के दावे के बावजूद घर-घर जाकर तकनीकी जांच की व्यवस्था अभी भी नहीं है।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की कैंटीन में 23 दिसंबर 2025 को सुबह हुए हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। कैंटीन में रसोई गैस का रिसाव हुआ और आग भड़क उठी। अस्पताल के सुरक्षा गार्ड की मुस्तैदी के कारण बड़ा हादसा टल गया। कैंटीन संचालकों ने कब गैस सिलिंडर के पाइप बदले थे, सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम किए थे, इसको लेकर प्रशासन भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाया। कैंटीन में सिलिंड वहीं लगाया गया, जहां खाना बनता है। इससे सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। नियमों के अनुसार गैस एजेंसी को उपभोक्ताओं की रसोई में जाकर सिलिंडर, रेगुलेटर और पाइपों की जांच करनी पड़ती है लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। 15 सितंबर, 2025 को जलुग्रां में सिलिंडर में गैस का रिसाव होने से एक ही परिवार के पांच सदस्य झुलस गए थे। इस तरह की कई घटनाएं व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती हैं।
--
जांच के लिए न कर्मचारी, न ही तकनीकी विशेषज्ञ
हैरानी की बात है कि कुल्लू और मनाली क्षेत्र में निगम ने दो एजेंसियां खोली हैं। मनाली में 25000 और कुल्लू में 15000 उपभोक्ता हैं। इनके घरों में रसोई गैस की जांच के लिए न तो कर्मचारी हैं और न तकनीकी विशेषज्ञ। जिले में निजी कंपनियों की भी 6 से अधिक गैस एजेंसियां हैं। इनके पास भी ऐसा कोई तंत्र नहीं है जो उपभोक्ताओं के घरों में जाकर जांच कर सके।
विज्ञापन
--
एजेंसियां करती हैं जागरूकता अभियान चलाने का दावासिविल सप्लाई कारपोरेशन और निजी गैस एजेंसियां दावा करती हैं कि समय-समय पर उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इसमें रसोई गैस सिलिंडर कहां और कैसे रखने, पाइप, रेगुलेटर लगाने सहित अन्य सावधानियों के बारे में बताया जाता है। यह भी दावा है कि गैस रिसाव होने पर लगने वाली आग से बचाव के लिए क्या करना चाहिए।
--
कुल्लू में तैनात किए हैं 112 फायर हाईड्रेंट : भारद्वाजदमकल विभाग के प्रभारी प्रेम भारद्वाज ने कहा कि जिले में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए 112 फायर हाईड्रेंट स्थापित किए गए हैं। दो फायर स्टेशन और 6 फायर सब स्टेशनों में 20 से अधिक फायर टेंडर और क्यूआरबी वाहन मौजूद हैं। 150 से अधिक कर्मचारी स्टेशन और सब स्टेशनों में तैनात हैं।
--
जिले में 64 संवेदशनशील गांव चुने, व्यवस्था अभी तक नहीं11 दिसंबर, 2021 को मझाण गांव में आग की घटना के बाद प्रशासन ने जिले में संवेदनशील गांवों को चिह्नित करने का प्रारूप बनाया था। गांवों का चयन भी किया गया। इनमें आनी के 11, बंजार के 10, निरमंड के 9, मनाली के 10 गांव और कुल्लू में सबसे अधिक 24 गांवों का चयन किया था। जिले में कुल 64 संवेदनशील स्थानों का चयन किया गया। इनके लिए एक लाख लीटर क्षमता वाले प्री फेब्रिकेटिड जिंक एल्युमीनियम वाटर टैंक के निर्माण को 11 करोड़ 43 लाख 18 हजार 80 रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेजा। अभी यह योजना धरातल पर नहीं उतरी है।
-- उपभोक्ताओं को नियमों के बारे में जागरूक किया जाता है। उपभोक्ता की मांग हो तो घरों में जाकर जांच करने का प्रयास किया जाता है। आम तौर पर उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए शिविर लगाए जाते हैं। -राजीव तलवार मैनेजर, स्पीक एंड स्पेन गैस एजेंसी
--
उपभोक्ताओं के घरों में रसोई गैस की जांच के लिए तंत्र विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ लोगों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है। अभी कोई तकनीकी कर्मचारी नहीं है जो इस तरह की जांच कर सके। -संजीव वर्मा, ऐरिया मैनेजर, सिविल सप्लाई कारपोरेशन मंडी
--
विज्ञापन
नियम के अनुसार हर पांच साल बाद बदलना पड़ा है पाइप, घरों में नहीं होने चाहिए दो से ज्यादा सिलिंडर
गौरी शंकर
कुल्लू। जिले में रसोई गैस सुरक्षा की हालत चिंताजनक है। नियम स्पष्ट हैं कि हर पांच साल बाद सिलिंडर का पाइप बदलना अनिवार्य है।
दो से अधिक सिलिंडर वाले घरों में जांच होनी चाहिए लेकिन जिला और निजी गैस एजेंसियों के पास इसे लागू करने का कोई ठोस तंत्र नहीं है। जागरूकता अभियान के दावे के बावजूद घर-घर जाकर तकनीकी जांच की व्यवस्था अभी भी नहीं है।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की कैंटीन में 23 दिसंबर 2025 को सुबह हुए हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। कैंटीन में रसोई गैस का रिसाव हुआ और आग भड़क उठी। अस्पताल के सुरक्षा गार्ड की मुस्तैदी के कारण बड़ा हादसा टल गया। कैंटीन संचालकों ने कब गैस सिलिंडर के पाइप बदले थे, सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम किए थे, इसको लेकर प्रशासन भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाया। कैंटीन में सिलिंड वहीं लगाया गया, जहां खाना बनता है। इससे सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। नियमों के अनुसार गैस एजेंसी को उपभोक्ताओं की रसोई में जाकर सिलिंडर, रेगुलेटर और पाइपों की जांच करनी पड़ती है लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। 15 सितंबर, 2025 को जलुग्रां में सिलिंडर में गैस का रिसाव होने से एक ही परिवार के पांच सदस्य झुलस गए थे। इस तरह की कई घटनाएं व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती हैं।
विज्ञापन
जांच के लिए न कर्मचारी, न ही तकनीकी विशेषज्ञ
हैरानी की बात है कि कुल्लू और मनाली क्षेत्र में निगम ने दो एजेंसियां खोली हैं। मनाली में 25000 और कुल्लू में 15000 उपभोक्ता हैं। इनके घरों में रसोई गैस की जांच के लिए न तो कर्मचारी हैं और न तकनीकी विशेषज्ञ। जिले में निजी कंपनियों की भी 6 से अधिक गैस एजेंसियां हैं। इनके पास भी ऐसा कोई तंत्र नहीं है जो उपभोक्ताओं के घरों में जाकर जांच कर सके।
विज्ञापन
एजेंसियां करती हैं जागरूकता अभियान चलाने का दावासिविल सप्लाई कारपोरेशन और निजी गैस एजेंसियां दावा करती हैं कि समय-समय पर उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इसमें रसोई गैस सिलिंडर कहां और कैसे रखने, पाइप, रेगुलेटर लगाने सहित अन्य सावधानियों के बारे में बताया जाता है। यह भी दावा है कि गैस रिसाव होने पर लगने वाली आग से बचाव के लिए क्या करना चाहिए।
कुल्लू में तैनात किए हैं 112 फायर हाईड्रेंट : भारद्वाजदमकल विभाग के प्रभारी प्रेम भारद्वाज ने कहा कि जिले में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए 112 फायर हाईड्रेंट स्थापित किए गए हैं। दो फायर स्टेशन और 6 फायर सब स्टेशनों में 20 से अधिक फायर टेंडर और क्यूआरबी वाहन मौजूद हैं। 150 से अधिक कर्मचारी स्टेशन और सब स्टेशनों में तैनात हैं।
जिले में 64 संवेदशनशील गांव चुने, व्यवस्था अभी तक नहीं11 दिसंबर, 2021 को मझाण गांव में आग की घटना के बाद प्रशासन ने जिले में संवेदनशील गांवों को चिह्नित करने का प्रारूप बनाया था। गांवों का चयन भी किया गया। इनमें आनी के 11, बंजार के 10, निरमंड के 9, मनाली के 10 गांव और कुल्लू में सबसे अधिक 24 गांवों का चयन किया था। जिले में कुल 64 संवेदनशील स्थानों का चयन किया गया। इनके लिए एक लाख लीटर क्षमता वाले प्री फेब्रिकेटिड जिंक एल्युमीनियम वाटर टैंक के निर्माण को 11 करोड़ 43 लाख 18 हजार 80 रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेजा। अभी यह योजना धरातल पर नहीं उतरी है।
उपभोक्ताओं के घरों में रसोई गैस की जांच के लिए तंत्र विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ लोगों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है। अभी कोई तकनीकी कर्मचारी नहीं है जो इस तरह की जांच कर सके। -संजीव वर्मा, ऐरिया मैनेजर, सिविल सप्लाई कारपोरेशन मंडी