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Kullu News: हिमालयी क्षेत्रों में बदलती जलवायु के बीच कृषि और वानिकी का सामंजस्य होगा सुदृढ़
Wed, 14 Jan 2026 06:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 14 Jan 2026 06:14 AM IST
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कुल्लू। जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर मौहल स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हुआ है। हिमालय के शुष्क कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन के लिए जलवायु अनुकूल कृषि पर शुरू हुए कार्यक्रम का शुभारंभ वन विभाग कुल्लू के अरण्यपाल संदीप शर्मा ने किया।
इस दौरान विशिष्ट अतिथि डॉ. हंस राज शर्मा और केंद्र प्रमुख राकेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे। 12 से 16 जनवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में बदलती जलवायु के बीच कृषि और वानिकी के सामंजस्य को सुदृढ़ करना है।
राकेश कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए हिमालयी शुष्क भूमि की चुनौतियों और इस प्रशिक्षण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। वहीं, संदीप शर्मा ने हिमालयी शुष्क भूमि प्रबंधन में वानिकी हस्तक्षेप की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
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डॉ. हंस राज शर्मा ने भूमि क्षरण तटस्थता के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्कृष्टता केंद्रों की भूमिका पर चर्चा की। रुड़की से आई डॉ. लक्ष्मी कांत ठुकराल ने एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और हिमालयी शुष्क क्षेत्रों में जल संरक्षण की उन्नत तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं दूसरे सत्र में पूर्व वैज्ञानिक डॉ. विनीत जिष्टु ने हिमालयी शुष्क भूमि की सांस्कृतिक प्रथाओं के बारे में मौजूद लोगों को अवगत करवाया। इस दौरान डॉ. मनीष त्रिपाठी, डॉ. केसर चंद, डॉ. वसुधा अग्निहोत्री, डॉ. मनीष त्रिपाठी व डॉ. किशोर कुमार मौजूद रहे।
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इस दौरान विशिष्ट अतिथि डॉ. हंस राज शर्मा और केंद्र प्रमुख राकेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे। 12 से 16 जनवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में बदलती जलवायु के बीच कृषि और वानिकी के सामंजस्य को सुदृढ़ करना है।
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राकेश कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए हिमालयी शुष्क भूमि की चुनौतियों और इस प्रशिक्षण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। वहीं, संदीप शर्मा ने हिमालयी शुष्क भूमि प्रबंधन में वानिकी हस्तक्षेप की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
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डॉ. हंस राज शर्मा ने भूमि क्षरण तटस्थता के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्कृष्टता केंद्रों की भूमिका पर चर्चा की। रुड़की से आई डॉ. लक्ष्मी कांत ठुकराल ने एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और हिमालयी शुष्क क्षेत्रों में जल संरक्षण की उन्नत तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं दूसरे सत्र में पूर्व वैज्ञानिक डॉ. विनीत जिष्टु ने हिमालयी शुष्क भूमि की सांस्कृतिक प्रथाओं के बारे में मौजूद लोगों को अवगत करवाया। इस दौरान डॉ. मनीष त्रिपाठी, डॉ. केसर चंद, डॉ. वसुधा अग्निहोत्री, डॉ. मनीष त्रिपाठी व डॉ. किशोर कुमार मौजूद रहे।