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Kullu News: देव मिलन के साथ कारोबार का भी बड़ा केंद्र है दशहरा उत्सव
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कुल्लू दशहरा उत्सव के समापन अवसर पर लंका दहन के लिए निकली भगवान रघुनाथ की यात्रा।-संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव देवी-देवताओं के मिलन और समृद्ध देव संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि कारोबार और रोजगार के अवसरों के लिए भी खास पहचान रखता है। सात दिन तक चलने वाले इस उत्सव में बड़े पैमाने पर कारोबार होता है। मेले में सजे बाजार हजारों लोगों की आजीविका का सहारा बने हुए हैं। यहां सुई से लेकर आधुनिक कृषि औजारों और मशीनों तक की बिक्री होती है। कपड़ों, घरेलू सामान और खेती-बागवानी में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की खरीदारी के लिए लोग हर साल दशहरा मेले का इंतजार करते हैं।
सालभर मेहनत करने के बाद लोग सर्दियों के लिए जरूरी सामान भी इसी मेले से खरीदकर ले जाते हैं। सस्ते कपड़ों और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध होने के कारण कुल्लू के अलावा मंडी और लाहौल से भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। खास बात यह है कि दशहरा उत्सव समाप्त होने के बाद भी सस्ते कपड़ों और अन्य सामान की खरीदारी के लिए बाजार में लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
दशहरा मेले के बाजार बदलते समय के साथ परंपरा और आधुनिकता का संगम भी पेश करते हैं। यहां पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले किल्टे और कुदाल जैसे कृषि उपकरणों से लेकर आधुनिक पावर टिलर तक उपलब्ध हैं। पानीपत से कारोबार करने पहुंचे रंजीत ने बताया कि वह हर साल कुल्लू दशहरा में दुकान लगाने आते हैं। वह दूसरे मेलों में भी दुकानें लगाते हैं। मेलों में कारोबार करना ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। मिष्ठान विक्रेता तेज सिंह ने बताया कि दशहरा उत्सव उनकी आजीविका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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दूर-दूर से पहुंचते हैं कारोबारी
कुल्लू दशहरा उत्सव स्थानीय दुकानदारों के साथ दूसरे राज्यों से आने वाले कारोबारियों के लिए भी कमाई का बड़ा अवसर है। देश के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। उनके लिए दशहरा का कारोबार सालभर की आजीविका का अहम हिस्सा है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के अलावा दिल्ली से भी लोग यहां कारोबार करने पहुंचे हैं।
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सालभर मेहनत करने के बाद लोग सर्दियों के लिए जरूरी सामान भी इसी मेले से खरीदकर ले जाते हैं। सस्ते कपड़ों और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध होने के कारण कुल्लू के अलावा मंडी और लाहौल से भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। खास बात यह है कि दशहरा उत्सव समाप्त होने के बाद भी सस्ते कपड़ों और अन्य सामान की खरीदारी के लिए बाजार में लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
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दशहरा मेले के बाजार बदलते समय के साथ परंपरा और आधुनिकता का संगम भी पेश करते हैं। यहां पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले किल्टे और कुदाल जैसे कृषि उपकरणों से लेकर आधुनिक पावर टिलर तक उपलब्ध हैं। पानीपत से कारोबार करने पहुंचे रंजीत ने बताया कि वह हर साल कुल्लू दशहरा में दुकान लगाने आते हैं। वह दूसरे मेलों में भी दुकानें लगाते हैं। मेलों में कारोबार करना ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। मिष्ठान विक्रेता तेज सिंह ने बताया कि दशहरा उत्सव उनकी आजीविका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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दूर-दूर से पहुंचते हैं कारोबारी
कुल्लू दशहरा उत्सव स्थानीय दुकानदारों के साथ दूसरे राज्यों से आने वाले कारोबारियों के लिए भी कमाई का बड़ा अवसर है। देश के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। उनके लिए दशहरा का कारोबार सालभर की आजीविका का अहम हिस्सा है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के अलावा दिल्ली से भी लोग यहां कारोबार करने पहुंचे हैं।
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