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आस्था का संगम : सुबह से शाम तक लगा रहता था श्रद्धालुओं का तांता
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कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ सहित सैकड़ों देवी-देवताओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह रहा। अठारह करड़ू सौह में सजे देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से पूरा उत्सव स्थल भक्तिमय माहौल और जयकारों से गूंजता रहा।
21 से 27 अक्तूबर तक चले उत्सव में भगवान रघुनाथ सहित 315 देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचे। भगवान रघुनाथ के दरबार में भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। कई श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। मान्यता के अनुसार, देव परंपरा के तहत गूरों के माध्यम से उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास किया गया।
लंका दहन की परंपरा पूरी होने के बाद देवी-देवताओं ने अपने-अपने स्थायी देवालयों की ओर लौटना शुरू कर दिया। आराध्यों की विदाई के साथ ही अठारह करड़ू सौह में रौनक कम होने लगी। अपने देवी-देवताओं को विदा करते समय कई श्रद्धालु भावुक नजर आए। अब एक ही स्थान पर सैकड़ों देवी-देवताओं के दिव्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अगले साल होने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का इंतजार करना होगा। संवाद
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21 से 27 अक्तूबर तक चले उत्सव में भगवान रघुनाथ सहित 315 देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचे। भगवान रघुनाथ के दरबार में भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। कई श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। मान्यता के अनुसार, देव परंपरा के तहत गूरों के माध्यम से उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास किया गया।
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लंका दहन की परंपरा पूरी होने के बाद देवी-देवताओं ने अपने-अपने स्थायी देवालयों की ओर लौटना शुरू कर दिया। आराध्यों की विदाई के साथ ही अठारह करड़ू सौह में रौनक कम होने लगी। अपने देवी-देवताओं को विदा करते समय कई श्रद्धालु भावुक नजर आए। अब एक ही स्थान पर सैकड़ों देवी-देवताओं के दिव्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अगले साल होने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का इंतजार करना होगा। संवाद
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