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Kullu News: घर-घर जाकर भरे टीबी लक्षण के सैंपल
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एक्टिव केस फाइंडिंग में आशा कार्यकर्ताओं गांव जाकर रोगियों की कर रही पहचान
जिले सहित प्रदेश को श्रय रोग से मुक्त करने के लिए चलाया है अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्ल। जिले में क्षय रोगियों की पहचान के लिए संडे एसीएफ (एक्टिव केस फाइंडिंग) के तहत लक्षण दिखने पर सैंपल भरे गए हैं। इन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। जिले सहित प्रदेशभर को श्रय रोग मुक्त करने के लिए संडे एसीएफ अभियान चलाया जा रहा है। इसमें आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। लोगों में लक्षण दिखने पर उनके सैंपल भरे जा रहे हैं।
उनकी जांच करवाई जाएगी। इसके बाद पॉजिटिव पाए गए तो समय रहते उपचार शुरू किया जाएगा। संडे एसीएफ में खासकर 32 श्रेणियों पर फोकस रहेगा। स्वास्थ्य विभाग बाल चिकित्सा से लेकर 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों तक में क्षय रोग की जांच कर रहा है। जांच में लक्षण दिखने पर मरीजों के सैंपल भरे जा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा आशा कार्यकर्ता अपने संबंधित क्षेत्र में घर-घर जाकर क्षय रोग के मरीजों की पहचान कर रही हैं।
टीबी मुक्त हिमाचल का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए संडे एसीएफ अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर क्षय रोग के मरीजों की पहचान करने का जिम्मा दिया गया है। इस दौरान किसी में अगर क्षय रोग के लक्षण दिखेंगे, तो आशा कार्यकर्ताएं मरीज के सैंपल लेंगी। सैंपल की जांच अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में की जाएगी। इस संबंध में जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर पवार ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं ने अभियान शुरू कर दिया है। सैंपल भरे जा रहे हैं, जिनकी जांच करवाई जाएगी। कहा किसंडे एसीएफ अभियान के तहत हर पंचायत को क्षय रोग मुक्त किया जा सकेगा।
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इन श्रेणियों पर अधिक फोकस
संडे एसीएफ के तहत बाल चिकित्सा (10 वर्ष से कम उम्र का बच्चा), इंडेक्स टीबी मामलों के लक्षणात्मक संपर्क, कैंसर, मधुमेह, पोस्ट कोविड, इनडोर वार्ड, गुर्दे की बीमारी के मरीज, स्लम क्षेत्र में रहने वाले प्रवासी, शरणार्थी, कुपोषण से ग्रस्त, इम्यूनोसप्रेसेंट्स, सीओपीडी, दमा मरीज, धूम्रपान करने वाले, पीएल एचआईवी, नशा मुक्ति केंद्र के लाभार्थी, खनिक और पत्थर तोड़ने वाले कामगार, निर्माण स्थल श्रमिक, एक्स्ट्रापल्मोनरी प्रकल्पित मामले, स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता, प्राइवेट रेफरल के मरीज, कारागार के कैदी, अनाथालय, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन और आश्रय गृह, पहले से उपचारित टीबी का मामला (वर्तमान में टीबी के लक्षण वाले), स्तनपान करवाने वाली माताएं, गर्भवती महिलाएं, हृदय, जिगर की क्षति, उच्च रक्तचाप, एंटी टीएनएफ उपचार के मरीज और 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों पर अधिक फोकस रहेगा।
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जिले सहित प्रदेश को श्रय रोग से मुक्त करने के लिए चलाया है अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्ल। जिले में क्षय रोगियों की पहचान के लिए संडे एसीएफ (एक्टिव केस फाइंडिंग) के तहत लक्षण दिखने पर सैंपल भरे गए हैं। इन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। जिले सहित प्रदेशभर को श्रय रोग मुक्त करने के लिए संडे एसीएफ अभियान चलाया जा रहा है। इसमें आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। लोगों में लक्षण दिखने पर उनके सैंपल भरे जा रहे हैं।
उनकी जांच करवाई जाएगी। इसके बाद पॉजिटिव पाए गए तो समय रहते उपचार शुरू किया जाएगा। संडे एसीएफ में खासकर 32 श्रेणियों पर फोकस रहेगा। स्वास्थ्य विभाग बाल चिकित्सा से लेकर 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों तक में क्षय रोग की जांच कर रहा है। जांच में लक्षण दिखने पर मरीजों के सैंपल भरे जा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा आशा कार्यकर्ता अपने संबंधित क्षेत्र में घर-घर जाकर क्षय रोग के मरीजों की पहचान कर रही हैं।
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टीबी मुक्त हिमाचल का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए संडे एसीएफ अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर क्षय रोग के मरीजों की पहचान करने का जिम्मा दिया गया है। इस दौरान किसी में अगर क्षय रोग के लक्षण दिखेंगे, तो आशा कार्यकर्ताएं मरीज के सैंपल लेंगी। सैंपल की जांच अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में की जाएगी। इस संबंध में जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर पवार ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं ने अभियान शुरू कर दिया है। सैंपल भरे जा रहे हैं, जिनकी जांच करवाई जाएगी। कहा किसंडे एसीएफ अभियान के तहत हर पंचायत को क्षय रोग मुक्त किया जा सकेगा।
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इन श्रेणियों पर अधिक फोकस
संडे एसीएफ के तहत बाल चिकित्सा (10 वर्ष से कम उम्र का बच्चा), इंडेक्स टीबी मामलों के लक्षणात्मक संपर्क, कैंसर, मधुमेह, पोस्ट कोविड, इनडोर वार्ड, गुर्दे की बीमारी के मरीज, स्लम क्षेत्र में रहने वाले प्रवासी, शरणार्थी, कुपोषण से ग्रस्त, इम्यूनोसप्रेसेंट्स, सीओपीडी, दमा मरीज, धूम्रपान करने वाले, पीएल एचआईवी, नशा मुक्ति केंद्र के लाभार्थी, खनिक और पत्थर तोड़ने वाले कामगार, निर्माण स्थल श्रमिक, एक्स्ट्रापल्मोनरी प्रकल्पित मामले, स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता, प्राइवेट रेफरल के मरीज, कारागार के कैदी, अनाथालय, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन और आश्रय गृह, पहले से उपचारित टीबी का मामला (वर्तमान में टीबी के लक्षण वाले), स्तनपान करवाने वाली माताएं, गर्भवती महिलाएं, हृदय, जिगर की क्षति, उच्च रक्तचाप, एंटी टीएनएफ उपचार के मरीज और 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों पर अधिक फोकस रहेगा।