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निजीकरण और कृषि कानूनों के खिलाफ भड़का सीटू
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कुल्लू। निजीकरण और कृषि कानूनों के खिलाफ सीटू ने नारेबाजी की। उपायुक्त कार्यालय के बाहर संगठन ने धरना-प्रदर्शन किया। सीटू के जिला सचिव भूप सिंह भंडारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून लाए हैं। जिनका पूरे देश भर में विरोध हो रहा है। पिछले लंबे समय से किसान धरने पर बैठे हुए हैं। किसान सरकार से इन कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे है, लेकिन किसानों की मांग को दरकिनार किया जा रहा है। यह तीनों कृषि कानून पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं। देश और प्रदेश के किसानों को इनका किसी भी तरह से लाभ नहीं मिलेगा। वीरवार को सीटू ने सरकारी विभागों और बोर्डों के निजीकरण और कृषि कानूनों के खिलाफ कुल्लू में पार्टी कार्यालय से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रोष रैली निकाली।
भंडारी ने कहा कि केंद्र सरकार सरकारी संपत्ति का निजीकरण कर रही है। कृषि कानूनों को जबरन किसानों पर थोपा जा रहा है। यह कानून किसी भी सूरत में फायदा देने वाले नहीं हैं। सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में किसान और जनता विरोधी फैसले लगातार ले रही है। सरकारी संपत्ति का लगातार निजीकरण किया जा रहा है। सरकारी विभागों और बोर्डों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इसमें हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, उद्योग और निगम शामिल हैं। सीटू सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। भाजपा सरकार बेरोजगार युवाओं को रोजगार के प्रदान करवाने में भी नाकाम रही है। सरकार ने एक साल में दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया थास लेकिन अब सत्ता में आते ही रोजगार प्राप्त कर चुके लोगों से रोजगार छीना जा रहा है।
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भंडारी ने कहा कि केंद्र सरकार सरकारी संपत्ति का निजीकरण कर रही है। कृषि कानूनों को जबरन किसानों पर थोपा जा रहा है। यह कानून किसी भी सूरत में फायदा देने वाले नहीं हैं। सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में किसान और जनता विरोधी फैसले लगातार ले रही है। सरकारी संपत्ति का लगातार निजीकरण किया जा रहा है। सरकारी विभागों और बोर्डों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इसमें हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, उद्योग और निगम शामिल हैं। सीटू सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। भाजपा सरकार बेरोजगार युवाओं को रोजगार के प्रदान करवाने में भी नाकाम रही है। सरकार ने एक साल में दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया थास लेकिन अब सत्ता में आते ही रोजगार प्राप्त कर चुके लोगों से रोजगार छीना जा रहा है।
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