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Kullu News: किसानों-बागवानों की मेहनत चट कर रहे लावारिस मवेशी
Fri, 26 Dec 2025 10:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 26 Dec 2025 10:09 PM IST
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रघुपुर घाटी के रिहायशी इलाकों में रबी की फसल के साथ सेब पौधों को कर रहे नष्ट
घाटी की फनौटी, करशैईगाड़ और लगौटी पंचायत के गांवों में घूम रहे हैं पशुओं के झुंड
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सर्दी के मौसम ने लावारिस पशुओं ने अब रिहायशी इलाकों का रुख कर लिया है। इन पशुओं ने किसानों-बागवानों के खेतों में डेरा डाल दिया है। दिन को ये रबी की फसल के साथ सेब के पौधों को नष्ट कर रहे हैं।
लावारिस पशुओं के ऐसे झुंंड रघुपुर घाटी की फनौटी, करशैईगाड़ और लगौटी पंचायत के लगभग हर गांव मेंं हैं। जुहड़ से लेकर फनौटी, बनाला, छलाच, करशाला, देहुरी, रोपा व कमांद में करीब 150 लावारिस पशु हैं। सरकार, प्रशासन और पशुपालन विभाग के पास कोई ठोस योजना न होने से ये पशु किसानों-बागवानों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।
किसान-बागवान एक तरफ सूखे जैसे हालात से परेशान हैं, वहीं लावारिस पशु भी गेहूं, जौ और मटर की फसल को तबाह कर रहे हैं। सबसे अधिक नुकसान सेब के पौधों को पहुंचाया जा रहा है। छोटे-छोटे पौधों को तो पूरी तरह से नष्ट किया जा रहा है। किसान राम लाल ठाकुर, सुरेंद्र ठाकुर, शिव राज शर्मा, टेक सिंह, सागर दास, मान सिंह, हीरा लाल और महेंद्र शर्मा ने कहा कि किसानों को लावारिस पशु दोहरा नुकसान पहुंचा रहे है। एक तरफ फसल को उजाड़ रहे हैं, दूसरी तरफ सेब बगीचों को नुकसान हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन के दावे सिर्फ कागजों में होते हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं होता है। यह समस्या कम होने के बजाय साल दर साल गंभीर होती जा रही है। पशु किसके हैं, इसकी कोई पूछ नहीं होती है। कान में टैग तो लगा रखे हैं लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। हर साल सर्दी के दिनों किसानों-बागवानों की करीब 20 फीसदी फसल लावारिस पशु ही नष्ट कर देते हैं।
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लावारिस पशुओं से पूरी रघुपुर घाटी परेशान है। हर जगह लावारिस पशुओं के झुंड गेहूं, जौ, मटर के साथ सेब के पौधों को तबाह कर रहे हैं। किसानों-बागवानों की मेहनत पर पानी फेरा जा रहा है। सरकार कोई समाधान नहीं करती है। - शिवराज भारद्वाज, किसान
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बाग-बगीचों के साथ लावारिस पशु सर्दी को पालतू पशुओं को रखा गया पशुचारा भी खाकर नष्ट किया जा रहा है। खेत और बगीचों में लावारिस पशुओं ने डेरा डाल दिया है। एक तरफ सूखा पड़ा है तो दूसरी तरफ इन पशुओं ने लोगों को परेशान किया है। -टेक सिंह ठाकुर, किसान
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घाटी की फनौटी, करशैईगाड़ और लगौटी पंचायत के गांवों में घूम रहे हैं पशुओं के झुंड
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सर्दी के मौसम ने लावारिस पशुओं ने अब रिहायशी इलाकों का रुख कर लिया है। इन पशुओं ने किसानों-बागवानों के खेतों में डेरा डाल दिया है। दिन को ये रबी की फसल के साथ सेब के पौधों को नष्ट कर रहे हैं।
लावारिस पशुओं के ऐसे झुंंड रघुपुर घाटी की फनौटी, करशैईगाड़ और लगौटी पंचायत के लगभग हर गांव मेंं हैं। जुहड़ से लेकर फनौटी, बनाला, छलाच, करशाला, देहुरी, रोपा व कमांद में करीब 150 लावारिस पशु हैं। सरकार, प्रशासन और पशुपालन विभाग के पास कोई ठोस योजना न होने से ये पशु किसानों-बागवानों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।
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किसान-बागवान एक तरफ सूखे जैसे हालात से परेशान हैं, वहीं लावारिस पशु भी गेहूं, जौ और मटर की फसल को तबाह कर रहे हैं। सबसे अधिक नुकसान सेब के पौधों को पहुंचाया जा रहा है। छोटे-छोटे पौधों को तो पूरी तरह से नष्ट किया जा रहा है। किसान राम लाल ठाकुर, सुरेंद्र ठाकुर, शिव राज शर्मा, टेक सिंह, सागर दास, मान सिंह, हीरा लाल और महेंद्र शर्मा ने कहा कि किसानों को लावारिस पशु दोहरा नुकसान पहुंचा रहे है। एक तरफ फसल को उजाड़ रहे हैं, दूसरी तरफ सेब बगीचों को नुकसान हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन के दावे सिर्फ कागजों में होते हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं होता है। यह समस्या कम होने के बजाय साल दर साल गंभीर होती जा रही है। पशु किसके हैं, इसकी कोई पूछ नहीं होती है। कान में टैग तो लगा रखे हैं लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। हर साल सर्दी के दिनों किसानों-बागवानों की करीब 20 फीसदी फसल लावारिस पशु ही नष्ट कर देते हैं।
लावारिस पशुओं से पूरी रघुपुर घाटी परेशान है। हर जगह लावारिस पशुओं के झुंड गेहूं, जौ, मटर के साथ सेब के पौधों को तबाह कर रहे हैं। किसानों-बागवानों की मेहनत पर पानी फेरा जा रहा है। सरकार कोई समाधान नहीं करती है। - शिवराज भारद्वाज, किसान
बाग-बगीचों के साथ लावारिस पशु सर्दी को पालतू पशुओं को रखा गया पशुचारा भी खाकर नष्ट किया जा रहा है। खेत और बगीचों में लावारिस पशुओं ने डेरा डाल दिया है। एक तरफ सूखा पड़ा है तो दूसरी तरफ इन पशुओं ने लोगों को परेशान किया है। -टेक सिंह ठाकुर, किसान