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Kullu News: मुख-मोहरे और छत्र निशान के साथ रघुपुरगढ़ पहुंचे शृंगा ऋषि घियागी
Wed, 14 May 2025 04:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 14 May 2025 04:38 AM IST
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रघुपुर में निभाएंगे जगराते की परंपरा, सैकड़ों लोगों को देंगे आशीर्वाद
कुल्लू के राजा ने अपनी जीत पर रखी थी देवता का जगराता मनाने की मन्नत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बंजार घाटी के अधिष्ठाता देव शृंगा ऋषि घियागी मंगलवार शाम को सदियों पुरानी परंपरा निभाने 11,000 फीट ऊंचे धार्मिक एवं प्रसिद्ध स्थल रघुपुरगढ़ पहुंचे हैं। इस बार देवता दो मोहरे, छत्र अन्य निशान सहित पूरे लाव लश्कर के साथ रवाना हुए। हर साल ज्येष्ठ संक्रांति को देवता शृंगाऋषि घियागी रघुपुरगढ़ जाते हैं। इसमें एक साल देवता रथ में तो अगले साल मुख-मोहरे से साथ श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
ऐसे में इस बार देवता मुख-मोहरे के साथ रघुपुरगढ़ पहुंचे हैं। यहां पहुंचने पर पर्यटन कारोबारियों और देवलुओं ने देवता का स्वागत किया। सोझा और जलोड़ी दर्रा होकर देवता ढोल नगाड़ों के साथ निकले और शाम के समय देवता धार्मिक स्थल पर विराजमान हुए। इस दौरान यहां रातभर नाच-गाने का दौर चलता रहेगा। ज्येष्ठ संक्रांति के अवसर पर देवता यहां अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देंगे।
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देवता के कारदार पदम सिंह, भंडारी चेत राम वीर और निहाल भंडारी ने बताया कि सैकड़ों साल पूर्व जब राजाओं की रियासतें थी तो कुल्लू और मंडी के राजाओं के बीच युद्ध हो गया था। इस दौरान कुल्लू के राजा ने देवता शृंगा ऋषि घियागी को याद करते हुए अपनी जीत के लिए प्रार्थना की थी और बदले में राजा ने देवता के नाम पर रघुपुरगढ़ में हर साल ज्येष्ठ संक्रांति को जगराते का आयोजन करने मन्नत रखी। जिसमें कुल्लू का राजा लड़ाई जीत गया और तब से यह परंपरा चल रही है। करीब 13 किलोमीटर का पैदल सफर कर रघुपुरगढ़ पहुंचे देवता से बाह्य सराज के साथ इनर सराज देवमय हो उठी। देवता परंपराओं का निर्वहन करने पर बुधवार को दोपहर बाद अपने देवालय घियागी लौटेंगे। लेकिन ज्येष्ठ संक्रांति को होने वाले जगराते में बंजार,आनी, निरमंड और छतरी क्षेत्र के लोग पहुंचते हैं।
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