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Kullu News: बेसहारा बुजुर्ग का दर्द देख पसीजा दिल तो खोला वृद्ध आश्रम
Fri, 07 Mar 2025 10:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 07 Mar 2025 10:38 PM IST
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महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनी अनीता ठाकुर
क्लाथ में 19 बेसहारा बुजुर्गों का बनी सहारा, खुद बनी आत्मनिर्भर
संजय भारद्वाज
मनाली (कुल्लू)। कभी ऐसी घटना घट जाती है जो मार्ग प्रशस्त कर जीवन का लक्ष्य निर्धारित करती है। 20 मई 1973 में भुट्टी कालोनी में सुंदरी देवी और प्रकाश के घर जन्मी अनीता ठाकुर के साथ भी ऐसी ही घटना घटी।
वर्ष 2007 में वह अपने बेटे और बेटी का इलाज करवाने आईजीएमसी गई तो बेसहारा बुजुर्ग महिला को देख उनका दिल पसीज गया। अस्पताल में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। यह घटना उनके लिए प्रेरणा बनी। जिसके बाद उन्होंने बुजुर्गों कि सेवा को ही अपना लक्ष्य बना लिया। वर्ष 2011 में उन्होंने क्लाथ में वृद्ध आश्रम खोला। वर्तमान में यहां 19 बुजुर्गों का सहारा मिला है।
आईजीएमसी में बेटे का इलाज करवाने के बाद ही उन्होंने वृद्ध आश्रम चलाने का विचार बना लिया। धीरे- धीरे इस ओर कदम बढ़ाए और लोग भी जुड़ गए। क्लाथ में सहारा बृद्ध आश्रम खोला। अब तक यहां 25 बुजुर्ग अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर चुके है। उनकी अंत्योष्टि उनके बेटे ने की। आश्रम चलाने के लिए आदर्श एजूकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी का गठन कर वह न केवल वृद्ध आश्रम बल्कि मानसिक रूप से बीमार महिलाओ के लिए एमआर होम भी चला रही है। एमआर होम मे 45 महिलाओ की देखभाल के साथ इलाज भी करवाया जा रहा है। ख़ास यह है कि अब बुजुर्गों की देखभाल के साथ वह लगभग 15 लोगों को रोजगार भी दे रही है। आचार,जैम बनाकर लोगों को बेचा जा रहा है। साथ ही मेले, त्यौहार में आश्रम की ओर से स्टॉल लगाकर कुल्लवी व्यंजन परोसे जा रहे है। इससे वह सालाना लगभग पांच लाख तक कमा रहे है। जो बुजुर्गों की देखभाल पर ही खर्च होता है।
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अनीता ने बताया कि वर्तमान में 19 बुजुर्ग वृद्ध आश्रम में है जबकि मानसिक रूप से बीमार 45 महिलाएं एमआर होम में है। इनकी देखभाल के लिए 15 लोगों का स्टाफ रखा गया है। उनका कहना है कि बुजुर्ग का सहारा बने। उन्हें अकेला न छोडें, बुजुर्ग का आशीर्वाद और मार्गदर्शन उनके जीवन को सार्थक बनाता है।
.....संवाद
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क्लाथ में 19 बेसहारा बुजुर्गों का बनी सहारा, खुद बनी आत्मनिर्भर
संजय भारद्वाज
मनाली (कुल्लू)। कभी ऐसी घटना घट जाती है जो मार्ग प्रशस्त कर जीवन का लक्ष्य निर्धारित करती है। 20 मई 1973 में भुट्टी कालोनी में सुंदरी देवी और प्रकाश के घर जन्मी अनीता ठाकुर के साथ भी ऐसी ही घटना घटी।
वर्ष 2007 में वह अपने बेटे और बेटी का इलाज करवाने आईजीएमसी गई तो बेसहारा बुजुर्ग महिला को देख उनका दिल पसीज गया। अस्पताल में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। यह घटना उनके लिए प्रेरणा बनी। जिसके बाद उन्होंने बुजुर्गों कि सेवा को ही अपना लक्ष्य बना लिया। वर्ष 2011 में उन्होंने क्लाथ में वृद्ध आश्रम खोला। वर्तमान में यहां 19 बुजुर्गों का सहारा मिला है।
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आईजीएमसी में बेटे का इलाज करवाने के बाद ही उन्होंने वृद्ध आश्रम चलाने का विचार बना लिया। धीरे- धीरे इस ओर कदम बढ़ाए और लोग भी जुड़ गए। क्लाथ में सहारा बृद्ध आश्रम खोला। अब तक यहां 25 बुजुर्ग अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर चुके है। उनकी अंत्योष्टि उनके बेटे ने की। आश्रम चलाने के लिए आदर्श एजूकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी का गठन कर वह न केवल वृद्ध आश्रम बल्कि मानसिक रूप से बीमार महिलाओ के लिए एमआर होम भी चला रही है। एमआर होम मे 45 महिलाओ की देखभाल के साथ इलाज भी करवाया जा रहा है। ख़ास यह है कि अब बुजुर्गों की देखभाल के साथ वह लगभग 15 लोगों को रोजगार भी दे रही है। आचार,जैम बनाकर लोगों को बेचा जा रहा है। साथ ही मेले, त्यौहार में आश्रम की ओर से स्टॉल लगाकर कुल्लवी व्यंजन परोसे जा रहे है। इससे वह सालाना लगभग पांच लाख तक कमा रहे है। जो बुजुर्गों की देखभाल पर ही खर्च होता है।
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अनीता ने बताया कि वर्तमान में 19 बुजुर्ग वृद्ध आश्रम में है जबकि मानसिक रूप से बीमार 45 महिलाएं एमआर होम में है। इनकी देखभाल के लिए 15 लोगों का स्टाफ रखा गया है। उनका कहना है कि बुजुर्ग का सहारा बने। उन्हें अकेला न छोडें, बुजुर्ग का आशीर्वाद और मार्गदर्शन उनके जीवन को सार्थक बनाता है।
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