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मिड-डे-मील वर्करों के लिए बनाई जाए नीति : गोपाल
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। जिले के लाहौल मंडल में कार्यरत मिड-डे मील वर्कर की बैठक केलांग सर्किट हाउस में हुई। इसकी अध्यक्षता गोपाल ने की। उन्होंने कहा कि मिड-डे मील वर्कर शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों की वर्ष 2003 से सेवा कर रहे हैं। अभी तक सरकार ने इस वर्ग के कार्यकर्ताओं की सुध नहीं ली है।
शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत अन्य वर्गों के लिए स्थायी नीति बनाकर नियमित भी कर दिया है, लेकिन मिड-डे मील वर्करों की हमेशा अनदेखी होती रही है। सरकार की ओर से हाल ही में 3 से 5 बच्चों की संख्या वाले स्कूलों को बंद करने के फैसले से इस वर्ग के कार्यकर्ताओं में हड़कंप मचा हुआ है।
जिले में मिड-डे मील वर्करों के बेरोजगार होने की आशंका बढ़ गई है। लाहौल-स्पीति जिले के मिड-डे मील वर्करों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस वर्ग के लिए ठोस पॉलिसी बनाई जाए। जिले में मर्ज हो रहे स्कूलों में कार्यरत कार्यकर्ताओं को अन्य स्कूलों में भेजा जाए। इस दौरान करीब 80 मिड-डे मील वर्कर उपस्थित रहे। संवाद
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शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत अन्य वर्गों के लिए स्थायी नीति बनाकर नियमित भी कर दिया है, लेकिन मिड-डे मील वर्करों की हमेशा अनदेखी होती रही है। सरकार की ओर से हाल ही में 3 से 5 बच्चों की संख्या वाले स्कूलों को बंद करने के फैसले से इस वर्ग के कार्यकर्ताओं में हड़कंप मचा हुआ है।
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जिले में मिड-डे मील वर्करों के बेरोजगार होने की आशंका बढ़ गई है। लाहौल-स्पीति जिले के मिड-डे मील वर्करों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस वर्ग के लिए ठोस पॉलिसी बनाई जाए। जिले में मर्ज हो रहे स्कूलों में कार्यरत कार्यकर्ताओं को अन्य स्कूलों में भेजा जाए। इस दौरान करीब 80 मिड-डे मील वर्कर उपस्थित रहे। संवाद
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