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अब सीएचसी सैंज में मरीजों को 50 बैड की मिलेगी सुविधा
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सैंज (कुल्लू) । सैंज घाटी की जनता को प्रदेश सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। यहां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अब मरीजों को 50 बिस्तर की सुविधा मिलेगी। वहीं अस्पताल में डॉक्टरों समेत स्टाफ के 27 नए पद भरने की स्वीकृति मिली है।
शिमला में वीरवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सैंज घाटी के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया है। इससे घाटी में जश्न का माहौल है। बता दें कि सैंज की पीएचसी को सीएचसी का दर्जा मिलने के बावजूद यहां सात सालों से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ पाई थी।
सीएचसी के आलीशान भवन का निर्माण भी किया गया है, लेकिन सीएचसी को वांछित डॉक्टर और स्टाफ न मिलने से मरीजों को 60 किमी सफर कर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचना पड़ रहा है। वर्तमान में यहां मात्र दो डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने पहले सीएचसी सैंज को 25 बिस्तरों की सुविधा दी थी, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण मरीज भर्ती नहीं हो पाते थे। इस स्वास्थ्य केंद्र के तहत सैंज घाटी की 20 पंचायतों की करीब 25,000 की आबादी आती है। सुविधाएं नहीं मिलने से सबसे ज्यादा दिक्कतें घाटी की गर्भवती महिलाओं को पेश आती रही है। यहां प्रतिदिन 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। सैंज संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेश शर्मा ने इसे जनता की जीत बताया है। स्थानीय निवासी लाल चंद, दुनी चंद, श्याम लाल, भाग चंद, शेर सिंह, लोतराम, राज कुमार, तिलक राज ने कहा कि सीएचसी सैंज में सुविधाएं बढ़ने से बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
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मरीज किए जाते हैं रेफर, तीमारदार भी परेशान
सीएचसी में आपात स्थिति में मरीजों के लिए यहां ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध है और एक्स-रे की सुविधा भी है, लेकिन ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्था नहीं है। आपात व ओपीडी सुविधा उपलब्ध न होने से जनता दिक्कतों का सामना कर रही है। चिकित्सकों और कर्मियों की कमी के मरीजों को रेफर कर दिया जाता हैं। अब इन परेशानियों से जनता को निजात मिलेगी।
......
इन पंचायतों के लोग है सीएचसी सैंज पर निर्भर
सैंज घाटी की देहुरीधार, शैंशर, गाडापारली, शांघड, सुचैहण, बनोगी, दुशाहड, धाउगी, कनौन, लारजी, कोटला, चकुरठा, थाटीबीड, गोपालपुर, भलाहण, तलाडा, देवगढ़ गोही, रैला-एक और रैला-दो पंचायतों के लोग और परियोजनाओं के सैकड़ों कर्मचारी का स्वास्थ्य सीएचसी सैंज पर निर्भर है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने बताया कि सैंज पीएससी को अपग्रेड कर सात साल पहले सीएससी बना दिया गया था, लेकिन सीएससी के लिए वांछित पद स्वीकृत नहीं हुए थे। अब 50 बिस्तर और डॉक्टरों समेत स्टाफ के 27 पद स्वीकृत होने से यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।
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शिमला में वीरवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सैंज घाटी के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया है। इससे घाटी में जश्न का माहौल है। बता दें कि सैंज की पीएचसी को सीएचसी का दर्जा मिलने के बावजूद यहां सात सालों से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ पाई थी।
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सीएचसी के आलीशान भवन का निर्माण भी किया गया है, लेकिन सीएचसी को वांछित डॉक्टर और स्टाफ न मिलने से मरीजों को 60 किमी सफर कर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचना पड़ रहा है। वर्तमान में यहां मात्र दो डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने पहले सीएचसी सैंज को 25 बिस्तरों की सुविधा दी थी, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण मरीज भर्ती नहीं हो पाते थे। इस स्वास्थ्य केंद्र के तहत सैंज घाटी की 20 पंचायतों की करीब 25,000 की आबादी आती है। सुविधाएं नहीं मिलने से सबसे ज्यादा दिक्कतें घाटी की गर्भवती महिलाओं को पेश आती रही है। यहां प्रतिदिन 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। सैंज संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेश शर्मा ने इसे जनता की जीत बताया है। स्थानीय निवासी लाल चंद, दुनी चंद, श्याम लाल, भाग चंद, शेर सिंह, लोतराम, राज कुमार, तिलक राज ने कहा कि सीएचसी सैंज में सुविधाएं बढ़ने से बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
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मरीज किए जाते हैं रेफर, तीमारदार भी परेशान
सीएचसी में आपात स्थिति में मरीजों के लिए यहां ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध है और एक्स-रे की सुविधा भी है, लेकिन ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्था नहीं है। आपात व ओपीडी सुविधा उपलब्ध न होने से जनता दिक्कतों का सामना कर रही है। चिकित्सकों और कर्मियों की कमी के मरीजों को रेफर कर दिया जाता हैं। अब इन परेशानियों से जनता को निजात मिलेगी।
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इन पंचायतों के लोग है सीएचसी सैंज पर निर्भर
सैंज घाटी की देहुरीधार, शैंशर, गाडापारली, शांघड, सुचैहण, बनोगी, दुशाहड, धाउगी, कनौन, लारजी, कोटला, चकुरठा, थाटीबीड, गोपालपुर, भलाहण, तलाडा, देवगढ़ गोही, रैला-एक और रैला-दो पंचायतों के लोग और परियोजनाओं के सैकड़ों कर्मचारी का स्वास्थ्य सीएचसी सैंज पर निर्भर है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने बताया कि सैंज पीएससी को अपग्रेड कर सात साल पहले सीएससी बना दिया गया था, लेकिन सीएससी के लिए वांछित पद स्वीकृत नहीं हुए थे। अब 50 बिस्तर और डॉक्टरों समेत स्टाफ के 27 पद स्वीकृत होने से यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।