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Kullu News: पंचायत चुनाव, आरक्षण रोस्टर पर टिकीं हैं निगाहें
Sun, 22 Feb 2026 09:56 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 22 Feb 2026 09:56 PM IST
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जिले में संभावित प्रत्याशियों की बढ़ीं दिल की धड़कनें
रोस्टर बदलने से तलाशने पड़ सकते हैं नए विकल्प
संजय ठाकुर
पतलीकूहल (कुल्लू)। जिले में पंचायत चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग के अनुसार 31 मार्च तक पंचायतों का आरक्षण रोस्टर घोषित किया जाएगा।
इसी रोस्टर पर तय होगा कि कौन-सी पंचायत सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति या अन्य श्रेणी के लिए आरक्षित होगी। रोस्टर की घोषणा से पहले संभावित प्रत्याशियों की सांसें अटकी हुई हैं, क्योंकि आरक्षण की स्थिति बदलते ही कई प्रत्याशियों की चुनावी जमीन खिसक सकती है तो कई नए चेहरे मैदान में उतर सकते हैं।
हालांकि पंचायत चुनाव आधिकारिक तौर पर पार्टी चिह्न पर नहीं लड़े जाते लेकिन अंदरखाते राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। अधिकांश प्रत्याशी किसी न किसी राजनीतिक विचारधारा या दल से जुड़े होते हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ा दी है। संभावित प्रत्याशियों के साथ बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और सामाजिक समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। पिछले चुनावों में सक्रिय रहे कई प्रतिनिधि इस बार भी तैयारी में जुटे हैं लेकिन रोस्टर बदलने की स्थिति में उन्हें नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। युवाओं और महिलाओं में भी चुनाव लड़ने की रुचि देखी जा रही है। बहरहाल, 31 मार्च के बाद स्थिति स्पष्ट होते ही पंचायत चुनावों की औपचारिक प्रक्रिया भी रफ्तार पकड़ने की संभावना है। फिलहाल, पूरे जिले में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
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रोस्टर बदलने से तलाशने पड़ सकते हैं नए विकल्प
संजय ठाकुर
पतलीकूहल (कुल्लू)। जिले में पंचायत चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग के अनुसार 31 मार्च तक पंचायतों का आरक्षण रोस्टर घोषित किया जाएगा।
इसी रोस्टर पर तय होगा कि कौन-सी पंचायत सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति या अन्य श्रेणी के लिए आरक्षित होगी। रोस्टर की घोषणा से पहले संभावित प्रत्याशियों की सांसें अटकी हुई हैं, क्योंकि आरक्षण की स्थिति बदलते ही कई प्रत्याशियों की चुनावी जमीन खिसक सकती है तो कई नए चेहरे मैदान में उतर सकते हैं।
हालांकि पंचायत चुनाव आधिकारिक तौर पर पार्टी चिह्न पर नहीं लड़े जाते लेकिन अंदरखाते राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। अधिकांश प्रत्याशी किसी न किसी राजनीतिक विचारधारा या दल से जुड़े होते हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ा दी है। संभावित प्रत्याशियों के साथ बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और सामाजिक समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। पिछले चुनावों में सक्रिय रहे कई प्रतिनिधि इस बार भी तैयारी में जुटे हैं लेकिन रोस्टर बदलने की स्थिति में उन्हें नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। युवाओं और महिलाओं में भी चुनाव लड़ने की रुचि देखी जा रही है। बहरहाल, 31 मार्च के बाद स्थिति स्पष्ट होते ही पंचायत चुनावों की औपचारिक प्रक्रिया भी रफ्तार पकड़ने की संभावना है। फिलहाल, पूरे जिले में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
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