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देव मान्यता को ध्यान में रखकर करवाएं विंटर कार्निवल : गोविंद
Thu, 25 Dec 2025 10:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 25 Dec 2025 10:26 PM IST
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बोले- माघ संक्रांति के बाद से नौ गांवों में रहता है देव प्रतिबंध
विंटर कार्निवल के आयोजन की तिथि को लेकर मचा बवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। राष्ट्रीय स्तरीय विंटर कार्निवल का आयोजन 20 से 24 जनवरी के बीच करने पर बवाल मच गया है। देव समाज के विरोध के बाद अब पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने भी इस तिथि पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने कहा कि विंटर कार्निवल 15 जनवरी से पहले या फिर माघ महीने के बाद भी मनाया जा सकता है। देव मान्यता और आस्था सर्वोपरि है। इसे ध्यान में रखकर ही इस तरह के आयोजन होने चाहिए।
गौरतलब है कि 20 से 24 जनवरी तक मनाली में राष्ट्रीय स्तरीय विंटर कार्निवल का आयोजन किया जा रहा है। 15 जनवरी को माघ संक्रांति के दिन से घाटी के अधिकतर देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस अवधि के दौरान शोर मचाना वर्जित माना जाता है। उन्होंने कहा कि देव मान्यता और आस्था के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सुक्खू सरकार व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर नए-नए कारनामे कर रही है। दो जनवरी से कार्निवल की तिथि बदलकर 20 जनवरी की गई। इस अवधि में देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर या तपस्या के लिए जाते हैं। ऐसे में यह तिथि उचित नहीं है। इस अवधि में शोर मचाना, वाद्य यंत्र बजाना, सिटी बजाना प्रतिबंधित रहता है। मनाली पर्यटन नगरी है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन होने चाहिए लेकिन देव समाज और देव मान्यता को ध्यान में रखकर। ऊझी घाटी के होटलियर एवं होटल एसोसिएशन के सदस्य राकेश ठाकुर ने कहा कि नौ गांवों में माघ संक्रांति के बाद से देव प्रतिबंध रहता है। विंटर कार्निवल का शोर शराबा इस अवधि में न हो तो सही है। उधर, शहरी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तारु नेगी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जब विंटर कार्निवल की शुरुआत हुई थी तो यह माघ महीने में मनाया जाता था। दो से पांच की तिथि में पर्यटकों की भीड़ ज्यादा होने से आयोजन में दिक्कतें आ रही थीं। इसके बाद सभी से विचार-विमर्श के बाद तिथि 20 से 24 जनवरी रखी गई है।
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विंटर कार्निवल के आयोजन की तिथि को लेकर मचा बवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। राष्ट्रीय स्तरीय विंटर कार्निवल का आयोजन 20 से 24 जनवरी के बीच करने पर बवाल मच गया है। देव समाज के विरोध के बाद अब पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने भी इस तिथि पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने कहा कि विंटर कार्निवल 15 जनवरी से पहले या फिर माघ महीने के बाद भी मनाया जा सकता है। देव मान्यता और आस्था सर्वोपरि है। इसे ध्यान में रखकर ही इस तरह के आयोजन होने चाहिए।
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गौरतलब है कि 20 से 24 जनवरी तक मनाली में राष्ट्रीय स्तरीय विंटर कार्निवल का आयोजन किया जा रहा है। 15 जनवरी को माघ संक्रांति के दिन से घाटी के अधिकतर देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस अवधि के दौरान शोर मचाना वर्जित माना जाता है। उन्होंने कहा कि देव मान्यता और आस्था के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सुक्खू सरकार व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर नए-नए कारनामे कर रही है। दो जनवरी से कार्निवल की तिथि बदलकर 20 जनवरी की गई। इस अवधि में देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर या तपस्या के लिए जाते हैं। ऐसे में यह तिथि उचित नहीं है। इस अवधि में शोर मचाना, वाद्य यंत्र बजाना, सिटी बजाना प्रतिबंधित रहता है। मनाली पर्यटन नगरी है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन होने चाहिए लेकिन देव समाज और देव मान्यता को ध्यान में रखकर। ऊझी घाटी के होटलियर एवं होटल एसोसिएशन के सदस्य राकेश ठाकुर ने कहा कि नौ गांवों में माघ संक्रांति के बाद से देव प्रतिबंध रहता है। विंटर कार्निवल का शोर शराबा इस अवधि में न हो तो सही है। उधर, शहरी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तारु नेगी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जब विंटर कार्निवल की शुरुआत हुई थी तो यह माघ महीने में मनाया जाता था। दो से पांच की तिथि में पर्यटकों की भीड़ ज्यादा होने से आयोजन में दिक्कतें आ रही थीं। इसके बाद सभी से विचार-विमर्श के बाद तिथि 20 से 24 जनवरी रखी गई है।
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