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Kullu News: वायरल और डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी, गैलरी में लगाने पड़े बेड
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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के मेडिसिन वार्ड की गैलरी में अतिरिक्त बिस्तर लगाकर चल रहा मरीजों का उ
कुल्लू। जिले में कभी बारिश तो कभी धूप खिलने से मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। इस कारण लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों में वायरल और डायरिया के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या दोबारा बढ़ने लगी है। क्षेत्रीय अस्पताल का मेडिसिन वार्ड भर गया है। मरीजों का उपचार गैलरी में बेड लगाकर करना पड़ रहा है।
अस्पतालों में डायरिया के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसकी प्रमुख वजह मौसम में हो रहे बदलाव और दूषित पेयजल को मान रहे हैं। दूषित पानी के सेवन से पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ा है।
क्षेत्रीय अस्पताल की मेडिसिन, शिशु रोग, सामान्य ओपीडी और ट्रॉमा विभाग में प्रतिदिन 15 से 25 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें डायरिया के लक्षण पाए जा रहे हैं। उधर, मेडिसिन वार्ड के सभी 70 बेड भरे हैं। अब मरीजों का उपचार गैलरी में लगाए गए बेड पर किया जा रहा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने कहा कि वायरल एवं डायरिया के लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
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डायरिया के कारण और लक्षण
डायरिया दूषित पानी पीने, वायरल संक्रमण, बैक्टीरिया संक्रमण, शरीर में पानी की कमी, आसपास साफ-सफाई की कमी, कटे हुए फलों के सेवन तथा पेयजल भंडारण पात्रों की नियमित सफाई न होने के कारण हो सकता है। दिन में तीन या उससे अधिक बार पतले दस्त आना इसका प्रमुख लक्षण है। समय पर उपचार न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में पेट दर्द, पेट में मरोड़, उल्टी, बार-बार दस्त आना, बुखार, कमजोरी महसूस होना तथा आंखों का धंस जाना शामिल हैं।
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ऐसे करें बचाव
डायरिया का उपचार सरल और कम खर्चीला है। लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। यदि ओआरएस उपलब्ध न हो तो नमक, चीनी और नींबू मिलाकर तैयार घोल का सेवन कराया जा सकता है। यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है। इसके साथ ही चिकित्सकीय सलाह लेकर उचित उपचार करवाना आवश्यक है।
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अस्पतालों में डायरिया के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसकी प्रमुख वजह मौसम में हो रहे बदलाव और दूषित पेयजल को मान रहे हैं। दूषित पानी के सेवन से पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ा है।
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क्षेत्रीय अस्पताल की मेडिसिन, शिशु रोग, सामान्य ओपीडी और ट्रॉमा विभाग में प्रतिदिन 15 से 25 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें डायरिया के लक्षण पाए जा रहे हैं। उधर, मेडिसिन वार्ड के सभी 70 बेड भरे हैं। अब मरीजों का उपचार गैलरी में लगाए गए बेड पर किया जा रहा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने कहा कि वायरल एवं डायरिया के लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
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डायरिया के कारण और लक्षण
डायरिया दूषित पानी पीने, वायरल संक्रमण, बैक्टीरिया संक्रमण, शरीर में पानी की कमी, आसपास साफ-सफाई की कमी, कटे हुए फलों के सेवन तथा पेयजल भंडारण पात्रों की नियमित सफाई न होने के कारण हो सकता है। दिन में तीन या उससे अधिक बार पतले दस्त आना इसका प्रमुख लक्षण है। समय पर उपचार न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में पेट दर्द, पेट में मरोड़, उल्टी, बार-बार दस्त आना, बुखार, कमजोरी महसूस होना तथा आंखों का धंस जाना शामिल हैं।
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ऐसे करें बचाव
डायरिया का उपचार सरल और कम खर्चीला है। लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। यदि ओआरएस उपलब्ध न हो तो नमक, चीनी और नींबू मिलाकर तैयार घोल का सेवन कराया जा सकता है। यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है। इसके साथ ही चिकित्सकीय सलाह लेकर उचित उपचार करवाना आवश्यक है।
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