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Kullu News: अब पानी का हर घूंट होगा जांचा-परखा
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दशहरा उत्सव में शुद्ध और सुरक्षित होगा पीने का पानी, नलों-हैंडपंपों के भरे जा रहे सैंपल
सतर्कता... मौके पर ही सैंपलों की जांच कर उपलब्ध करवाई जा रही रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में इस बार न केवल श्रद्धा की धार बहेगी, बल्कि पीने का पानी भी पूरी तरह से शुद्ध और सुरक्षित होगा। दशहरा मेले में जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए जलशक्ति विभाग ने कमर कस ली है।
100 से अधिक नलों और हैंडपंपों से भरे जा रहे पेयजल सैंपल की मौके पर ही जांच होगी और शुद्धता की रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध करवाई जाएगी। पेयजल पीने योग्य है या नहीं, इसकी शुद्धता की जांच की जा रही है। विभाग ने मेला कमेटी के अस्थायी शिविर के साथ लैब स्थापित की है। प्रयोगशाला में रैपिड सैंपल की जांच मौके पर होगी। रैपिड के अलावा अन्य सैंपल को विभाग की मुख्य प्रयोगशाला शमशी भेजा जाएगा।
विभाग ने इस तरह की व्यवस्था दशहरा में लगातार दूसरी बार की है। साल 2024 में भी यह व्यवस्था लागू की गई थी जिससे लोग दूषित जल के कारण किसी बीमारी की चपेट में न आएं। दशहरा उत्सव में विभाग जिला न्यायालय परिसर के समीप स्थित मेला मैदान और कलाकेंद्र के पास बोरवेल से पेयजल की आपूर्ति करवा रहा है। दोनों बोरवेल के पेयजल की सैंपलिंग रोजाना की जा रही है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर लगाए गए नलों के सैंपल भी विभाग भर रहा है। उधर, जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता अंकित बिष्ठ ने कहा कि दशहरा के दौरान पेयजल सैंपलों की रोजाना जांच करने की व्यवस्था की गई है।
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इन मानकों पर होगी पेयजल जांच
पेयजल में किसी तरह की खामी न हो, इसके लिए जलशक्ति विभाग पेयजल के सैंपल भर रहा है। सैंपल की जांच 12 सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर की जा रही है। इन सुरक्षा मानकों में तापमान, रंग, गंदगी, टीडीएस, कुल क्षारीयता (कैल्शियम कार्बोनेट के रूप में), क्लोराइड (सीआई के रूप में), फ्लोराइड (एफ के रूप में), कुल कठोरता (सीसीओ के रूप में), ई.कोली, कुल कोलीफॉर्म और मुक्त अवशिष्ट क्लोरीन शामिल हैं। - इंद्र ठाकुर, सहायक अभियंता जलशक्ति विभाग
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सतर्कता... मौके पर ही सैंपलों की जांच कर उपलब्ध करवाई जा रही रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में इस बार न केवल श्रद्धा की धार बहेगी, बल्कि पीने का पानी भी पूरी तरह से शुद्ध और सुरक्षित होगा। दशहरा मेले में जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए जलशक्ति विभाग ने कमर कस ली है।
100 से अधिक नलों और हैंडपंपों से भरे जा रहे पेयजल सैंपल की मौके पर ही जांच होगी और शुद्धता की रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध करवाई जाएगी। पेयजल पीने योग्य है या नहीं, इसकी शुद्धता की जांच की जा रही है। विभाग ने मेला कमेटी के अस्थायी शिविर के साथ लैब स्थापित की है। प्रयोगशाला में रैपिड सैंपल की जांच मौके पर होगी। रैपिड के अलावा अन्य सैंपल को विभाग की मुख्य प्रयोगशाला शमशी भेजा जाएगा।
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विभाग ने इस तरह की व्यवस्था दशहरा में लगातार दूसरी बार की है। साल 2024 में भी यह व्यवस्था लागू की गई थी जिससे लोग दूषित जल के कारण किसी बीमारी की चपेट में न आएं। दशहरा उत्सव में विभाग जिला न्यायालय परिसर के समीप स्थित मेला मैदान और कलाकेंद्र के पास बोरवेल से पेयजल की आपूर्ति करवा रहा है। दोनों बोरवेल के पेयजल की सैंपलिंग रोजाना की जा रही है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर लगाए गए नलों के सैंपल भी विभाग भर रहा है। उधर, जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता अंकित बिष्ठ ने कहा कि दशहरा के दौरान पेयजल सैंपलों की रोजाना जांच करने की व्यवस्था की गई है।
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इन मानकों पर होगी पेयजल जांच
पेयजल में किसी तरह की खामी न हो, इसके लिए जलशक्ति विभाग पेयजल के सैंपल भर रहा है। सैंपल की जांच 12 सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर की जा रही है। इन सुरक्षा मानकों में तापमान, रंग, गंदगी, टीडीएस, कुल क्षारीयता (कैल्शियम कार्बोनेट के रूप में), क्लोराइड (सीआई के रूप में), फ्लोराइड (एफ के रूप में), कुल कठोरता (सीसीओ के रूप में), ई.कोली, कुल कोलीफॉर्म और मुक्त अवशिष्ट क्लोरीन शामिल हैं। - इंद्र ठाकुर, सहायक अभियंता जलशक्ति विभाग