कुल्लू। कोरोना के बीच कुल्लू-मनाली आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद अब होटल नहीं, बल्कि होम स्टे बने हुए हैं। मनाली सहित तीर्थन, जिभी घाटी में आने वाले पर्यटक होम स्टे में ही ठहर रहे हैं। होम स्टे में जहां पर्यटकों को होटल के मुकाबले कम किराया देना पड़ रहा है, वहीं यहां घर का बना हुआ सादा खाना भी परोसा जा रहा है। इसके साथ ही शहरों से दूर इन होम स्टे में पर्यटकों को सुकून भी मिल रहा है।
गौर रहे कि कोरोना के बीच हालांकि कम संख्या में पर्यटकों ने कुल्लू-मनाली का रुख किया। लेकिन इस बीच आने वाले अधिकतर सैलानी होटलों की बजाय होम स्टे में ही रुके। शहर की भीड़भाड़ से दूर ग्रामीण क्षेत्रों के इन होम स्टे में पर्यटकों को रहने के लिए कमरे के अलावा सुबह का नाश्ता, दोपहर व रात का खाना उपलब्ध करवाया जाता है। पर्यटकों को परोसा जाने वाला यह खाना सादा रहता है। होम स्टे में कई पर्यटक दो सप्ताह तक डेरा लगाए रहते हैं। इतने दिनों के लिए उनको होटल में भारी भरकम राशि अदा करनी पड़ती है। जिले में करीब 200 से अधिक होम स्टे हैं। दूसरी ओर जिले में अधिकतर होटल खाली पड़े हुए हैं। हालांकि सोमवार से कोरोना को लेकर बंदिशें हटाए जाने के बाद आने वाले दिनों में पर्यटकों की काफी संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इस संबंध में तीर्थन पर्यटक विकास एसोसिएशन के अध्यक्ष वरुण भारती ने कहा कि पर्यटकों को एक नया विकल्प मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए भी आय का स्रोत बन गया है। आने वाले समय में होम स्टे से और अधिक लोग जुड़ेंगे