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शास्त्री भर्ती के नए नियम छात्रों के हित में नहीं : परिषद
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तीसरी कक्षा से ही संस्कृत को अनिवार्य करने की उठाई मांग
जिला संस्कृत परिषद ने विधायक भुवनेश्वर को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। जिला संस्कृत परिषद कुल्लू सरकार की ओर से नए नियम के तहत की जा रही शास्त्री भर्ती का विरोध कर रही है। इसको परिषद सरकार के समक्ष बार-बार उठा रही है। बुधवार को परिषद के मनाली क्षेत्र के संयोजक किरण कुमार शास्त्री, परिषद के कोषाध्यक्ष महेंद्र ठाकुर, भेखली के संयोजक चुनी लाल ने मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ को शास्त्री भर्ती के नए नियमों को तत्काल निरस्त करने के लिए ज्ञापन पत्र सौंपा है। परिषद ने ज्ञापन के माध्यम से बताया है कि शास्त्री भर्ती के ये नए नियम शास्त्री छात्रों के हित में नहीं हैं। अगर इन नियमों में तत्काल संशोधन नहीं किया गया तो आने वाले समय में हमारी सबसे प्राचीन संस्कृत और संस्कृति नष्ट हो जाएगी। यदि हमारी संस्कृति नष्ट हो गई तो भविष्य में हमारे जन्म के पूर्व संस्कारों से लेकर मृत्यु उपरांत होने वाले संस्कार भी नष्ट हो जाएंगे। कहा कि पूर्व में कांग्रेस की सरकारों ने प्रमुखता के साथ संस्कृत महाविद्यालयों तथा संस्कृत भाषा को विशेष संरक्षण दिया था। वर्तमान सरकार से भी यही अपेक्षा है कि संस्कृत भर्ती के नए नियमों को निरस्त करके पुराने नियमों से ही भर्ती हो और साथ में तीसरी से पांचवीं कक्षा तक संस्कृत को बंद करने वाली अधिसूचना को भी निरस्त कर तीसरी कक्षा से ही संस्कृत विषय को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने सकारात्मकता के साथ शास्त्रियों को आश्वासन दिया है कि इस बात को आचार संहिता खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री से उठाएंगे।
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जिला संस्कृत परिषद ने विधायक भुवनेश्वर को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। जिला संस्कृत परिषद कुल्लू सरकार की ओर से नए नियम के तहत की जा रही शास्त्री भर्ती का विरोध कर रही है। इसको परिषद सरकार के समक्ष बार-बार उठा रही है। बुधवार को परिषद के मनाली क्षेत्र के संयोजक किरण कुमार शास्त्री, परिषद के कोषाध्यक्ष महेंद्र ठाकुर, भेखली के संयोजक चुनी लाल ने मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ को शास्त्री भर्ती के नए नियमों को तत्काल निरस्त करने के लिए ज्ञापन पत्र सौंपा है। परिषद ने ज्ञापन के माध्यम से बताया है कि शास्त्री भर्ती के ये नए नियम शास्त्री छात्रों के हित में नहीं हैं। अगर इन नियमों में तत्काल संशोधन नहीं किया गया तो आने वाले समय में हमारी सबसे प्राचीन संस्कृत और संस्कृति नष्ट हो जाएगी। यदि हमारी संस्कृति नष्ट हो गई तो भविष्य में हमारे जन्म के पूर्व संस्कारों से लेकर मृत्यु उपरांत होने वाले संस्कार भी नष्ट हो जाएंगे। कहा कि पूर्व में कांग्रेस की सरकारों ने प्रमुखता के साथ संस्कृत महाविद्यालयों तथा संस्कृत भाषा को विशेष संरक्षण दिया था। वर्तमान सरकार से भी यही अपेक्षा है कि संस्कृत भर्ती के नए नियमों को निरस्त करके पुराने नियमों से ही भर्ती हो और साथ में तीसरी से पांचवीं कक्षा तक संस्कृत को बंद करने वाली अधिसूचना को भी निरस्त कर तीसरी कक्षा से ही संस्कृत विषय को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने सकारात्मकता के साथ शास्त्रियों को आश्वासन दिया है कि इस बात को आचार संहिता खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री से उठाएंगे।