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रफ्तार नहीं पकड़ पाया मनाली का पर्यटन कारोबार
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पतलीकूहल/मनाली (कुल्लू)। कोरोना काल में ठप पड़ा मनाली का पर्यटन कारोबार अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। मनाली में वीकेंड पर ही होटलों में महज पांच फीसदी ऑक्यूपेंसी रह रही है। मनाली की ऊंची चोटियों पर बर्फ गिरने का क्रम भी शुरू हो गया है। देश-विदेश के सैलानियों को बर्फबारी भी आकर्षित नहीं कर पा रही है।
हालांकि पर्यटन की दृष्टि से सितंबर माह काफी अहम माना जाता है। सितंबर शुरू होते ही सैलानी मनाली का रुख करते थे। इस बार सितंबर माह के दूसरे सप्ताह में सैलानी मनाली का रुख नहीं कर रहे हैं। सैलानियों की इस बेरूखी को कोरोना के खौफ से जोड़कर देखा जा रहा है। बरसात के लंबा खींचने की वजह से भी सैलानी मनाली नहीं आ रहे हैं। पिछले महीने जहां मनाली में दो फीसदी ही सैलानी आ पा रहे थे। अब इस आंकड़े में नाममात्र का ही सुधार आया है। अब वीकेंड में मनाली के होटलों में ऑक्यूपेंसी पांच फीसदी तक पहुंच रही है। जानकारों का मानना है कि अटल टनल रोहतांग खुलने से भी मनाली का पर्यटन प्रभावित हुआ है। पहले लद्दाख जाने वाले सैलानी रोहतांग दर्रा पार करने से पहले मनाली में एक दिन जरूर रुकते थे। लेकिन अब सैलानी मनाली में रात गुजारने के बजाय सीधे लेह और लद्दाख का रुख कर रहे हैं। सैलानियों का टोटा होने से होटल, टैक्सी ऑपरेटर, कोट-बूटवाले, राफ्टिंग, पैराग्लाडिंग, ट्रैकिंग कराने वाले, घोड़े वाले, गाइड आदि का कारोबार चौपट हो गया है। मनाली होटलियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप राम, पिकाडली होटल के मैनेजर सतीश, स्पेन रिजॉर्ट के मैनेजर राकेश नेगी और बड़ागढ़ रिजॉर्ट के संचालक नकुल खुल्लर ने कहा कि सितंबर माह में सैलानी अपेक्षा के अनुरूप नहीं आ रहे हैं। आने वाले दशहरा उत्सव के दौरान सैलानियों के मनाली का रुख करने की उम्मीद है।
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हालांकि पर्यटन की दृष्टि से सितंबर माह काफी अहम माना जाता है। सितंबर शुरू होते ही सैलानी मनाली का रुख करते थे। इस बार सितंबर माह के दूसरे सप्ताह में सैलानी मनाली का रुख नहीं कर रहे हैं। सैलानियों की इस बेरूखी को कोरोना के खौफ से जोड़कर देखा जा रहा है। बरसात के लंबा खींचने की वजह से भी सैलानी मनाली नहीं आ रहे हैं। पिछले महीने जहां मनाली में दो फीसदी ही सैलानी आ पा रहे थे। अब इस आंकड़े में नाममात्र का ही सुधार आया है। अब वीकेंड में मनाली के होटलों में ऑक्यूपेंसी पांच फीसदी तक पहुंच रही है। जानकारों का मानना है कि अटल टनल रोहतांग खुलने से भी मनाली का पर्यटन प्रभावित हुआ है। पहले लद्दाख जाने वाले सैलानी रोहतांग दर्रा पार करने से पहले मनाली में एक दिन जरूर रुकते थे। लेकिन अब सैलानी मनाली में रात गुजारने के बजाय सीधे लेह और लद्दाख का रुख कर रहे हैं। सैलानियों का टोटा होने से होटल, टैक्सी ऑपरेटर, कोट-बूटवाले, राफ्टिंग, पैराग्लाडिंग, ट्रैकिंग कराने वाले, घोड़े वाले, गाइड आदि का कारोबार चौपट हो गया है। मनाली होटलियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप राम, पिकाडली होटल के मैनेजर सतीश, स्पेन रिजॉर्ट के मैनेजर राकेश नेगी और बड़ागढ़ रिजॉर्ट के संचालक नकुल खुल्लर ने कहा कि सितंबर माह में सैलानी अपेक्षा के अनुरूप नहीं आ रहे हैं। आने वाले दशहरा उत्सव के दौरान सैलानियों के मनाली का रुख करने की उम्मीद है।
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