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कुल्लू के 44 स्कूलों में नहीं 23 प्रधानाचार्य और 21 मुख्याध्यापक
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कुल्लू। जिला कुल्लू के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च पाठशालाओं में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यार्थी वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। जिले के 50 फीसदी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है।
वहीं जिले के 44 सरकारी स्कूलों में 23 प्रधानाचार्य और 21 मुख्याध्यापक के पद कई सालों से खाली पड़े हैं। हालांकि सूबे में विद्यार्थियों को बेहतर और गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए शिक्षा निदेशालय कई कदम उठा रहा हैं।
इससे सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक स्तर को सुधारा जा सके। मगर जिला कुल्लू में विद्यार्थियों की शिक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। गौरतलब है कि जिला कुल्लू में शिक्षा के स्तर में सुधार के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में शैक्षणिक स्तर का बुरा हाल है।
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अध्यापकों के कई सालों से रिक्त चल रहे पदों को नहीं भरा जा रहा है। स्कूलों में प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक न होने से विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक वित्तीय और पठन-पाठन से संबंधित समस्या पैदा हो रही हैं। इस संबंध में उच्च शिक्षा उपनिदेशक शांति लाल शर्मा ने कहा कि प्रधानाचार्य और मुख्याध्यापकों के पद भरें जा रहे हैं।
इन स्कूलों में नहीं प्रधानाचार्य
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अरसू, बागीपुल, बुच्छैर, देउगी, घाटू, खरगा, कुटवा, कोठी, सगौटी, रंदल, सराहन, सराहर, श्वाड़, तुनन, बठाहड, देहूरी, गुशैणी, मंगलौर, मोहनी, शैंशर, जाणा और चलचान में प्रधानाचार्य के पद खाली चल रहे हैं। इस स्कूलों में पद खाली होने के कारण प्रधानाचार्य के कार्य को वरिष्ठ प्रवक्ता पूरा कर रहे हैं।
21 स्कूलों में खाली हैं मुख्याध्यापक के पद
राजकीय उच्च विद्यालय बनाला, बाखन, भलाण, डोगरी, दुराह, जटेहड़, नजां, कुश्वा, लारल, मझांण, ओल्वा, रोवा, रूआड़, सरगा, सारी, शिल्हा, शुश, शिल्ही, श्रीकोट, शाट और सचाणी में मुख्याध्यापकों के पद रिक्त हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों को ही मुख्याध्यापक का कामकाज देखना पड़ रहा है।
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वहीं जिले के 44 सरकारी स्कूलों में 23 प्रधानाचार्य और 21 मुख्याध्यापक के पद कई सालों से खाली पड़े हैं। हालांकि सूबे में विद्यार्थियों को बेहतर और गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए शिक्षा निदेशालय कई कदम उठा रहा हैं।
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इससे सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक स्तर को सुधारा जा सके। मगर जिला कुल्लू में विद्यार्थियों की शिक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। गौरतलब है कि जिला कुल्लू में शिक्षा के स्तर में सुधार के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में शैक्षणिक स्तर का बुरा हाल है।
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अध्यापकों के कई सालों से रिक्त चल रहे पदों को नहीं भरा जा रहा है। स्कूलों में प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक न होने से विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक वित्तीय और पठन-पाठन से संबंधित समस्या पैदा हो रही हैं। इस संबंध में उच्च शिक्षा उपनिदेशक शांति लाल शर्मा ने कहा कि प्रधानाचार्य और मुख्याध्यापकों के पद भरें जा रहे हैं।
इन स्कूलों में नहीं प्रधानाचार्य
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अरसू, बागीपुल, बुच्छैर, देउगी, घाटू, खरगा, कुटवा, कोठी, सगौटी, रंदल, सराहन, सराहर, श्वाड़, तुनन, बठाहड, देहूरी, गुशैणी, मंगलौर, मोहनी, शैंशर, जाणा और चलचान में प्रधानाचार्य के पद खाली चल रहे हैं। इस स्कूलों में पद खाली होने के कारण प्रधानाचार्य के कार्य को वरिष्ठ प्रवक्ता पूरा कर रहे हैं।
21 स्कूलों में खाली हैं मुख्याध्यापक के पद
राजकीय उच्च विद्यालय बनाला, बाखन, भलाण, डोगरी, दुराह, जटेहड़, नजां, कुश्वा, लारल, मझांण, ओल्वा, रोवा, रूआड़, सरगा, सारी, शिल्हा, शुश, शिल्ही, श्रीकोट, शाट और सचाणी में मुख्याध्यापकों के पद रिक्त हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों को ही मुख्याध्यापक का कामकाज देखना पड़ रहा है।