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Kullu News: सायर के रंग में रंगे कुल्लू के बाजार, अखरोट की बढ़ी मांग
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कुल्लू। सायर उत्सव को लेकर कुल्लू शहर के बाजार सज गए हैं। जगह-जगह अखरोट की दुकानें और अस्थायी स्टॉल लगने से बाजारों में रौनक बढ़ गई है। उत्पादक 400 से 500 रुपये प्रति किलो की दर से अखरोट बेच रहे हैं और लोग भी खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं।
सायर उत्सव को वर्षा ऋतु के समापन और सर्दी के आगाज का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान बरसात में तैयार होने वाली फसलों और फलों की पूजा की जाती है। धान, मक्की, खीरा, खट्टा और अखरोट इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनमें अखरोट का विशेष महत्व माना जाता है।
उत्पादक हेम सिंह और पन्ना लाल ने बताया कि वे करीब 10 वर्षों से सायर संक्रांति के अवसर पर ढालपुर में अखरोट बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। उत्सव के दौरान अखरोट की अच्छी बिक्री होती है और लाखों रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बरसात के समापन के बाद सायर उत्सव मनाया जाता है। इस पर्व में नई फसल और मौसमी उत्पादों की पूजा कर समृद्धि की कामना की जाती है।
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सायर उत्सव को वर्षा ऋतु के समापन और सर्दी के आगाज का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान बरसात में तैयार होने वाली फसलों और फलों की पूजा की जाती है। धान, मक्की, खीरा, खट्टा और अखरोट इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनमें अखरोट का विशेष महत्व माना जाता है।
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उत्पादक हेम सिंह और पन्ना लाल ने बताया कि वे करीब 10 वर्षों से सायर संक्रांति के अवसर पर ढालपुर में अखरोट बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। उत्सव के दौरान अखरोट की अच्छी बिक्री होती है और लाखों रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बरसात के समापन के बाद सायर उत्सव मनाया जाता है। इस पर्व में नई फसल और मौसमी उत्पादों की पूजा कर समृद्धि की कामना की जाती है।
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