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सिग्नल की समस्या वाले क्षेत्रों में कैसे होगी ऑनलाइन पढ़ाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में वार्षिक परीक्षाओं के लिए महज डेढ़ माह का समय बचा है, लेकिन शिक्षा विभाग के पास बिना सिग्नल वाले क्षेत्रों में विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए कोई योजना नहीं है।
बंजार की सैंज, तीर्थन और लगघाटी सहित कई इलाके ऐसे हैं, जहां ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कत रहती है। यहां मोबाइल का सिग्नल न होने से बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगती हैं। विद्यार्थियों के अभिभावक भी परेशान हैं। सरकार ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई तैयारी नहीं की है। अभिभावक सुरेश कुमार, रमेश और दुनी चंद ने बताया कि सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई वायदे तो कर रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। जिन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की अच्छी सुविधा है, वहां तो कक्षाएं लग जाती हैं। लेकिन जिन क्षेत्रों में मोबाइल फोन पर नेटवर्क की सुविधा नहीं है, वहां पर छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लग पाती हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। कई बार विद्यार्थियों को नेटवर्क ढूंढने के लिए खतरनाक पहाड़ी या जगह पर जाना पड़ता है। इससे उनके साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में नेटवर्क नहीं होने वाले क्षेत्रों के लिए अभी तक कोई उचित योजना नहीं बन सकी है। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक कुल्लू डॉ. शांति लाल शर्मा ने कहा कि बिना सिग्नल वाले दुर्गम क्षेत्रों में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग ऑनलाइन प्रारूप तैयार करने में जुटा है।
घर में पढ़ाई का स्कूल जैसा माहौल नहीं
अभिभावकों का मानना है कि स्कूल में जो पढ़ाई का माहौल होता है, वह घर पर नहीं बन पाता है। सरकार को कोविड नियमों के साथ स्कूल खोल देने चाहिए। बच्चे भी मोबाइल की लत का शिकार होते जा रहे हैं। जिले के सरकारी और निजों स्कूलों में 93527 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
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कुल्लू। जिले में वार्षिक परीक्षाओं के लिए महज डेढ़ माह का समय बचा है, लेकिन शिक्षा विभाग के पास बिना सिग्नल वाले क्षेत्रों में विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए कोई योजना नहीं है।
बंजार की सैंज, तीर्थन और लगघाटी सहित कई इलाके ऐसे हैं, जहां ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कत रहती है। यहां मोबाइल का सिग्नल न होने से बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगती हैं। विद्यार्थियों के अभिभावक भी परेशान हैं। सरकार ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई तैयारी नहीं की है। अभिभावक सुरेश कुमार, रमेश और दुनी चंद ने बताया कि सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई वायदे तो कर रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। जिन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की अच्छी सुविधा है, वहां तो कक्षाएं लग जाती हैं। लेकिन जिन क्षेत्रों में मोबाइल फोन पर नेटवर्क की सुविधा नहीं है, वहां पर छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लग पाती हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। कई बार विद्यार्थियों को नेटवर्क ढूंढने के लिए खतरनाक पहाड़ी या जगह पर जाना पड़ता है। इससे उनके साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में नेटवर्क नहीं होने वाले क्षेत्रों के लिए अभी तक कोई उचित योजना नहीं बन सकी है। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक कुल्लू डॉ. शांति लाल शर्मा ने कहा कि बिना सिग्नल वाले दुर्गम क्षेत्रों में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग ऑनलाइन प्रारूप तैयार करने में जुटा है।
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घर में पढ़ाई का स्कूल जैसा माहौल नहीं
अभिभावकों का मानना है कि स्कूल में जो पढ़ाई का माहौल होता है, वह घर पर नहीं बन पाता है। सरकार को कोविड नियमों के साथ स्कूल खोल देने चाहिए। बच्चे भी मोबाइल की लत का शिकार होते जा रहे हैं। जिले के सरकारी और निजों स्कूलों में 93527 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
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