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Kullu News: कंधे पर 70 फीट ऊंची मशाल उठाकर की गांव की परिक्रमा
Sat, 12 Jul 2025 10:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 12 Jul 2025 10:29 PM IST
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देव परंपरा .... कनौन में मनाया हूम पर्व, आस्था के आगे फीकी पड़ गई मूसलाधार बारिश
मान्यता... क्षेत्र की रक्षा के लिए मशाल जलाकर की जाती है गांव की परिक्रमा
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। जिले के कनौन में एक अद्भुत देव परंपरा का निर्वाहन किया गया। इसमें सैकड़ों लोग भाग लेने पहुंचे। देवता ब्रह्मा और देवी भगवती के सम्मान में मनाए जाने वाले इस हूम मेले में हारियानों ने 70 फीट लंबी लकड़ी की मशाल जलाई और इसे कंधे पर उठाकर गांव की परिक्रमा की।
शुक्रवार रात को निभाई गई इस परंपरा के दौरान मूसलाधार बारिश होती रही। आस्था के आगे बारिश भी फीकी पड़ती नजर आई।
मान्यता है कि इस दिन देवी भगवती प्राकृतिक आपदा को टालने के लिए ज्वाला का रूप धारण करती हैं। यह देव कारज हर वर्ष आषाढ़ महीने में आयोजित किया जाता है। लिहाजा, इस बार शुक्रवार को इसका आयोजन किया गया।
शुक्रवार रात को निभाई गई परंपरानुसार देवी भगवती और ब्रह्मा ऋषि के रथ को पूरे लाव लश्कर के साथ माता के मंदिर देहरी पहुंचाया गया। वहां पूजा-अर्चना कर रात्रि करीब 12 बजे यह देव कार्य शुरू हुआ। मंदिर के पास लगभग 70 फीट लंबी मशाल को देव आज्ञा अनुसार जलाया और देवता के कारिंदों ने इस मशाल को कंधे पर उठाकर मंदिर के चारों ओर परिक्रमा कर लगभग एक किलोमीटर दूर कनौन गांव पहुंचाया।
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मान्यता... बुरी आत्माओं से बचने के लिए जलाते हैं मशाल
गांव के बीच मशाल को खड़ा कर देव खेल हुई। जलती मशाल के साथ देवी भगवती के गूर और उनके आसपास चलने वाले शूरवीर देवता तूदला, बनशीरा खोडू, पंचवीर और देवता जहल के गूर ने जलती मशाल के आगे देव खेल कर देव परंपरा का निर्वाह किया। देवी के गूर रोशन लाल, झाबे राम ने बताया कि मान्यता है कि क्षेत्र में घटने वाली प्राकृतिक आपदा या बुरी आत्मा और भूत-पिशाच की नजरों से बचने के लिए हूम पर्व मनाया जाता है। इस दौरान जलाई जाने वाले मशाल को देवी का रूप माना जाता है। यह ज्वाला का रूप धारण करती है।
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मान्यता... क्षेत्र की रक्षा के लिए मशाल जलाकर की जाती है गांव की परिक्रमा
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। जिले के कनौन में एक अद्भुत देव परंपरा का निर्वाहन किया गया। इसमें सैकड़ों लोग भाग लेने पहुंचे। देवता ब्रह्मा और देवी भगवती के सम्मान में मनाए जाने वाले इस हूम मेले में हारियानों ने 70 फीट लंबी लकड़ी की मशाल जलाई और इसे कंधे पर उठाकर गांव की परिक्रमा की।
शुक्रवार रात को निभाई गई इस परंपरा के दौरान मूसलाधार बारिश होती रही। आस्था के आगे बारिश भी फीकी पड़ती नजर आई।
मान्यता है कि इस दिन देवी भगवती प्राकृतिक आपदा को टालने के लिए ज्वाला का रूप धारण करती हैं। यह देव कारज हर वर्ष आषाढ़ महीने में आयोजित किया जाता है। लिहाजा, इस बार शुक्रवार को इसका आयोजन किया गया।
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शुक्रवार रात को निभाई गई परंपरानुसार देवी भगवती और ब्रह्मा ऋषि के रथ को पूरे लाव लश्कर के साथ माता के मंदिर देहरी पहुंचाया गया। वहां पूजा-अर्चना कर रात्रि करीब 12 बजे यह देव कार्य शुरू हुआ। मंदिर के पास लगभग 70 फीट लंबी मशाल को देव आज्ञा अनुसार जलाया और देवता के कारिंदों ने इस मशाल को कंधे पर उठाकर मंदिर के चारों ओर परिक्रमा कर लगभग एक किलोमीटर दूर कनौन गांव पहुंचाया।
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मान्यता... बुरी आत्माओं से बचने के लिए जलाते हैं मशाल
गांव के बीच मशाल को खड़ा कर देव खेल हुई। जलती मशाल के साथ देवी भगवती के गूर और उनके आसपास चलने वाले शूरवीर देवता तूदला, बनशीरा खोडू, पंचवीर और देवता जहल के गूर ने जलती मशाल के आगे देव खेल कर देव परंपरा का निर्वाह किया। देवी के गूर रोशन लाल, झाबे राम ने बताया कि मान्यता है कि क्षेत्र में घटने वाली प्राकृतिक आपदा या बुरी आत्मा और भूत-पिशाच की नजरों से बचने के लिए हूम पर्व मनाया जाता है। इस दौरान जलाई जाने वाले मशाल को देवी का रूप माना जाता है। यह ज्वाला का रूप धारण करती है।