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मंडियों में लहसुन के दाम गिरे

Fri, 03 Jun 2022 11:30 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 11:30 PM IST
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Garlic prices fall
अमीचंद भंडारी
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कुल्लू/खराहल। सूबे के विभिन्न जिलों में लहसुन की फसल तैयार होकर मंडियों में पहुंचनी शुरू हो गई है, लेकिन कम दाम मिलने से किसान मायूस हैं। कुल्लू जिले में पिछले वर्ष की तुलना में किसानों को 50 फीसदी कम दाम मिल रहे हैं। इस बार लहसुन मंडियों में 50 से 55 रुपये, जबकि पिछले साल 90 से 110 रुपये प्रति किलो बिक था।
अब ऐसे में किसानों ने कम रेट को देखते हुए फसल को स्टोर करना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि कम रेट से खेती का खर्चा भी पूरा नही हो रहा है। लहसुन आठ माह में तैयार होता है। लहसुन उत्पादक का कहना है कि दाम अगर अच्छे नही मिलते तो इसकी खेती घाटे का सौदा साबित होती है। सूबे के लहसुन की मांग दक्षिण भारत और विदेश में अधिक रहती है। विटामिन सी से भरपूर लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर माना जाता है।
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कुल्लू के अलावा सिरमौर, सोलन, मंडी में भी लहसुन का उत्पादन होता है। सबसे अधिक लहसुन सिमौर में पैदा होता है, जबकि कुल्लू दूसरे पायदान है। लहसुन उत्पादक रितेश, ज्ञान, अनूप भंडारी, जयचंद का कहना है कि पिछले साल की अपेक्षा आधा कीमत पर ही लहसुन बिक रहा है। सूखे के चलते पहले ही पैदावार उत्पादन कम है। रेट बढ़िया न मिलने से किसान को दोहरी मार पड़ रही है। उधर, कृषि विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. पंजवीर ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के लहसुन की गुणवत्ता सबसे अधिक पाई है। यहां पर कीटनाशक और रासायनिक खाद का कम प्रयोग किया जाता है। यह बाहरी राज्यों के लहसुन से अधिक टिकाऊ है। नियमित सेवन से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि इस बार सूखे के कारण लहसुन की फसल कम है, जबकि आकार भी छोटा रहा गया है। इसलिए दाम कम मिल रहे हैं। संवाद
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58,000 मीट्रिक टन हो रहा उत्पादन
प्रदेश में लहसुन का करोड़ों का कारोबार होता है। 3,900 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती हो होती है। औसतन 58,000 मीट्रिक टन लहसुन होता है। जिला कुल्लू में 1500 हेक्टेयर जमीन पर लहसुन को उगाया जा रहा है। जिले में करीब 300 मीट्रिक टन लहसुन दक्षिण भारत और विदेश को भी भेजा जाता है।
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