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पर्याप्त बारिश न होने से फलों के आकार पर संकट
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अमीचंद भंडारी
कुल्लू/खराहल। जिले में करीब दो माह से पर्याप्त बारिश न होने से बागवानी पर भी असर पड़ने लगा है। विकसित हो रहे फलों के आकार के साथ इनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
प्लम, आड़ू, खुमानी और बादाम जून के पहले पखवाड़े में तैयार हो जाते हैं, लेकिन इस पर मौसम के कारण असर पड़ सकता है। मार्च और अप्रैल में बारिश नहीं होने से गुठलीदार फलों के आकार पर भी असर पड़ रहा है। बागवान फसल के प्रति काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। बागवानों का कहना है एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो इन फलों को और नुकसान पहुंचेगा। इस बार जिले में प्लम की फसल पिछले साल की तुलना में कम है। जिला कुल्लू में बारह हजार हेक्टेयर में प्लम की विभिन्न वैरायटी का उत्पादन हो रहा है।
बता दें कि कई क्षेत्रों में हाल ही हुई ओलावृष्टि से भी फसल को नुकसान हुआ है। इससे लाखों का नुकसान बागवानों को झेलना पड़ा है। बागवान अमित, कर्मचंद, ज्ञान ठाकुर, रविंद्र शर्मा, जयचंद, रोशन लाल, देवराज नेगी, प्रताप पठानिया, विजय पठानिया, कैलाश ठाकुर और चंदे राम ने कहा कि बारिश नहीं होने से बगीचों में नमी खत्म हो गई है। इसका सीधा प्रभाव फलों पर पड़ रहा है। कहा कि पौधों से कई फल पीले होकर गिर रहे हैं। समय पर बारिश नहीं हुई तो नुकसान और अधिक हो सकता है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू अध्यक्ष प्रेम शर्मा का कहना है कि सूखे के कारण गुठलीदार फलों समेत सेब, नाशपाती को भी नुकसान पहुंच रहा है। बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान कहते हैं कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है, उन बगीचों में बागवान को सिंचाई करनी चाहिए। असिंचित क्षेत्र में सूखे से तमाम फलों और एक से दो साल के पौधों को नुकसान हो रहा है।
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कुल्लू/खराहल। जिले में करीब दो माह से पर्याप्त बारिश न होने से बागवानी पर भी असर पड़ने लगा है। विकसित हो रहे फलों के आकार के साथ इनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
प्लम, आड़ू, खुमानी और बादाम जून के पहले पखवाड़े में तैयार हो जाते हैं, लेकिन इस पर मौसम के कारण असर पड़ सकता है। मार्च और अप्रैल में बारिश नहीं होने से गुठलीदार फलों के आकार पर भी असर पड़ रहा है। बागवान फसल के प्रति काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। बागवानों का कहना है एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो इन फलों को और नुकसान पहुंचेगा। इस बार जिले में प्लम की फसल पिछले साल की तुलना में कम है। जिला कुल्लू में बारह हजार हेक्टेयर में प्लम की विभिन्न वैरायटी का उत्पादन हो रहा है।
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बता दें कि कई क्षेत्रों में हाल ही हुई ओलावृष्टि से भी फसल को नुकसान हुआ है। इससे लाखों का नुकसान बागवानों को झेलना पड़ा है। बागवान अमित, कर्मचंद, ज्ञान ठाकुर, रविंद्र शर्मा, जयचंद, रोशन लाल, देवराज नेगी, प्रताप पठानिया, विजय पठानिया, कैलाश ठाकुर और चंदे राम ने कहा कि बारिश नहीं होने से बगीचों में नमी खत्म हो गई है। इसका सीधा प्रभाव फलों पर पड़ रहा है। कहा कि पौधों से कई फल पीले होकर गिर रहे हैं। समय पर बारिश नहीं हुई तो नुकसान और अधिक हो सकता है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू अध्यक्ष प्रेम शर्मा का कहना है कि सूखे के कारण गुठलीदार फलों समेत सेब, नाशपाती को भी नुकसान पहुंच रहा है। बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान कहते हैं कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है, उन बगीचों में बागवान को सिंचाई करनी चाहिए। असिंचित क्षेत्र में सूखे से तमाम फलों और एक से दो साल के पौधों को नुकसान हो रहा है।
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