सहकारी बैंकों में फंसी 97 हजार खाताधारकों की निकासी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला कुल्लू में सहकारी बैंकों से किसान-बागवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नोटबंदी के चलते जिला के सहकारी बैंकों में करीब 97 हजार खाताधारकों की निकासी फंस गई है। जिससे किसान-बागवानों को बीज के साथ खाद और अन्य दवाइयों की खरीद तथा मजदूरों को पैसा देना मुश्किल हो गया है। जिला कुल्लू में 97 हजार खाताधारकों ने केसीसी बैंक से 50 करोड़ से अधिक का कृषि ऋण भी ले रखा है, लेकिन नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों में 500 और 1000 रुपये के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। ऐसे में कृषक लोन लिए गए पैसे की किस्तों को जमा नहीं कर पा रहे हैं और इसका बोझ किसान-किसानों को अतिरिक्त बोझ के रूप में उठाना पड़ रहा है। सेब और साग सब्जी बेचने के बाद घाटी के किसान-बागवान रोज अपने ऋण की किस्तों को चुकाने के लिए बैंकों में पहुंच रहे हैं, लेकिन पुराने नोटों के न लेने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसान राहुल सूद, रमेश चंद, अमर ठाकुर, संगत राम, अनूप राम, शीला देवी, मीना, कुब्जा देवी, केशव राम तथा दिले राम ने कहा कि वह रोज बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। उनका खाता कांगड़ा सहकारी बैंक में है। जिसके कारण वह बैंक से न तो पैसे निकाल पा रहे हैं और न ही ऋण की किस्तों को भर पा रहे हैं। सरकार द्वारा खाद व बीज की खरीद-फरोख्त को दी गई राहत का भी फायदा नहीं मिल रहा है। दूसरी तरफ कृषि विभाग द्वारा उनके प्रसार केंद्रों में किसान-बागवानों से दवाई खरीद के लिए 500 और 1000 रूपये के पुराने नोटों को नहीं लिया जा रहा है। वहीं इस संबंध में किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष देवराज नेगी ने कहा कि नोटबंदी से घाटी के किसान-बागवानों को पैसा नहीं मिल रहा है। कांगड़ा सहकारी बैंक की प्रबंध निदेशक राहिल काहलो के अनुसार मसले को आरबीआई के समक्ष रखा गया है और बुधवार को उनके अधिकारियों की टीम मुंबई से लौटी है। उम्मीद है कि दो-तीन दिन में सहकारी बैंकों के खाताधारकों को कुछ राहत मिल पाएगी।