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Kullu News: कार्निवल में लोक संस्कृति दिखे के रंग, नशामुक्ति का दिया संदेश
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कुल्लू दशहरा के समापन पर निकली झांकी में भाग लेती महिला मंडल की महिलाएं।-संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को कुल्लू कार्निवाल में लोक संस्कृति के रंग बिखरे। महिला मंडलों, सांस्कृतिक दलों और पुलिस वालंटियर ने कार्निवाल में भाग लेकर नशामुक्ति, महिला सशक्तीकरण और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। रथ मैदान से शुरू हुए कार्निवाल में महिलाओं ने हाथों में रंग-बिरंगे रूमाल लहराते हुए कदम से कदम मिलाकर प्रस्तुति दी।
कुल्लवी और लाहौली पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने अपनी सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छटा बिखेरी। कुल्लू कार्निवाल में झांकियों में शामिल महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों में नाटी डालकर लोक संस्कृति की शानदार झलक पेश की। महिलाएं नाटी डालते हुए कलाकेंद्र तक पहुंचीं।
इस दौरान पारंपरिक लोकनृत्य देखने के लिए सैकड़ों की तादाद में लोग जुटे। कार्निवाल में महिलाओं ने कुल्लवी संस्कृति और परंपराओं को अपने नृत्य और वेशभूषा के माध्यम से प्रदर्शित किया। नाटी के दौरान लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य की लय ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।
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कार्निवाल में महादेव महिला मंडल जिया ने नशे से दूर रहने, जबकि शक्ति महिला मंडल ने पारंपरिक परिधानों को बढ़ावा देने का संदेश दिया। भुवनेश्वरी महिला मंडल खलाड़ा ने पुराने अनाज पर आधारित झांकी प्रस्तुत की। इसके अलावा गड़सा महिला मंडल, महिला मंडल न्यूली, शिवा महिला मंडल शोगी और जागृति महिला मंडल सुजैहणी ने भी भाग लिया। झांकियों के माध्यम से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया गया।
महिलाएं पट्टू और धाटू पहनकर हाथों में लाल, हरे और सफेद रंग के रूमाल लहराती नजर आईं। मालरोड पर महिला मंडलों, स्कूली बच्चों और विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को संगीतमय बना दिया। झांकियों में कुछ महिलाएं ऊन कातती दिखीं, जबकि कुछ ने बुनाई की पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। पारंपरिक पहनावे और लोक संस्कृति की झलक ने कार्निवाल को खास बना दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर भी इस दौरान मौजूद रहे। संवाद
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कुल्लवी और लाहौली पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने अपनी सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छटा बिखेरी। कुल्लू कार्निवाल में झांकियों में शामिल महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों में नाटी डालकर लोक संस्कृति की शानदार झलक पेश की। महिलाएं नाटी डालते हुए कलाकेंद्र तक पहुंचीं।
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इस दौरान पारंपरिक लोकनृत्य देखने के लिए सैकड़ों की तादाद में लोग जुटे। कार्निवाल में महिलाओं ने कुल्लवी संस्कृति और परंपराओं को अपने नृत्य और वेशभूषा के माध्यम से प्रदर्शित किया। नाटी के दौरान लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य की लय ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।
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कार्निवाल में महादेव महिला मंडल जिया ने नशे से दूर रहने, जबकि शक्ति महिला मंडल ने पारंपरिक परिधानों को बढ़ावा देने का संदेश दिया। भुवनेश्वरी महिला मंडल खलाड़ा ने पुराने अनाज पर आधारित झांकी प्रस्तुत की। इसके अलावा गड़सा महिला मंडल, महिला मंडल न्यूली, शिवा महिला मंडल शोगी और जागृति महिला मंडल सुजैहणी ने भी भाग लिया। झांकियों के माध्यम से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया गया।
महिलाएं पट्टू और धाटू पहनकर हाथों में लाल, हरे और सफेद रंग के रूमाल लहराती नजर आईं। मालरोड पर महिला मंडलों, स्कूली बच्चों और विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को संगीतमय बना दिया। झांकियों में कुछ महिलाएं ऊन कातती दिखीं, जबकि कुछ ने बुनाई की पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। पारंपरिक पहनावे और लोक संस्कृति की झलक ने कार्निवाल को खास बना दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर भी इस दौरान मौजूद रहे। संवाद