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जीरो बजट खेती अपनाएं किसान : राजेश
Fri, 01 Mar 2024 11:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 01 Mar 2024 11:26 PM IST
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लाहौल के किसानों को बजौरा में दिया मौनपालन का प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जिले के बजौरा कृषि अनुसंधान केंद्र में लाहौल-स्पीति के किसानों के लिए मौनपालन का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर के समापन पर शुक्रवार को लाहौल-स्पीति के जिला परिषद उपाध्यक्ष राजेश शर्मा बतौर मुख्यातिथि पहुंचे। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया। जीरो बजट खेती से भी किसान अच्छी खासी कमाई कर सकते है।
बजौरा अनुसंधान केंद्र के प्रभारी एवं कार्यक्रम के को-ऑर्डिनेटर डॉ. चंद्रकांत ने किसानों को खेती करने की तकनीक, फलों के उत्पादन की गुणवत्ता और क्षमता को बढ़ाने के लिए कई तरह के तरीके बताए। कहा कि मौनपालन भी कृषि और बागवानी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ व्यवसाय है। मधुमक्खी सिर्फ शहद उत्पादन के लिए ही नहीं पाली जाती हैं बल्कि मधुमक्खियां फलों और कृषि उत्पादन की क्षमता और गुणवत्ता को बढ़ाने का भी काम करती हैं। पांच दिवसीय यह शिविर 26 फरवरी से लेकर एक मार्च तक हुआ।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रमेश लाल ने मधुमक्खी पालन पर किसानों को जानकारी दी। डॉ. सुरेंद्र बंसल ने पशुपालन, डॉ. राधिका नेगी ने सब्जी उत्पादन को लेकर किसानों को प्रशिक्षण दिया। इस मौके पर प्रगतिशील मधुमक्खी पालक वीर सिंह और पुरुषोत्तम लाल ने मधुमक्खी पालन को लेकर अपने अनुभव किसानों के साथ साझा किया। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जिले के बजौरा कृषि अनुसंधान केंद्र में लाहौल-स्पीति के किसानों के लिए मौनपालन का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर के समापन पर शुक्रवार को लाहौल-स्पीति के जिला परिषद उपाध्यक्ष राजेश शर्मा बतौर मुख्यातिथि पहुंचे। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया। जीरो बजट खेती से भी किसान अच्छी खासी कमाई कर सकते है।
बजौरा अनुसंधान केंद्र के प्रभारी एवं कार्यक्रम के को-ऑर्डिनेटर डॉ. चंद्रकांत ने किसानों को खेती करने की तकनीक, फलों के उत्पादन की गुणवत्ता और क्षमता को बढ़ाने के लिए कई तरह के तरीके बताए। कहा कि मौनपालन भी कृषि और बागवानी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ व्यवसाय है। मधुमक्खी सिर्फ शहद उत्पादन के लिए ही नहीं पाली जाती हैं बल्कि मधुमक्खियां फलों और कृषि उत्पादन की क्षमता और गुणवत्ता को बढ़ाने का भी काम करती हैं। पांच दिवसीय यह शिविर 26 फरवरी से लेकर एक मार्च तक हुआ।
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कार्यक्रम के दौरान डॉ. रमेश लाल ने मधुमक्खी पालन पर किसानों को जानकारी दी। डॉ. सुरेंद्र बंसल ने पशुपालन, डॉ. राधिका नेगी ने सब्जी उत्पादन को लेकर किसानों को प्रशिक्षण दिया। इस मौके पर प्रगतिशील मधुमक्खी पालक वीर सिंह और पुरुषोत्तम लाल ने मधुमक्खी पालन को लेकर अपने अनुभव किसानों के साथ साझा किया। संवाद
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