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एक साथ आठ चिकित्सकों का तबादला
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू से एक साथ आठ चिकित्सकों का तबादला कर दिया गया है। इनमें दो जिला कार्यक्रम अधिकारी और छह विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं। छह चिकित्सकों के अस्पताल से चले जाने से ओपीडी में ताले लग जाएंगे। इस कारण खासकर बच्चों, नेत्र रोग और सर्जरी के मरीजों की परेशानी बढ़ेगी।
बता दें कि क्षेत्रीय अस्पताल में जिला कुल्लू समेत चार जिलों के मरीज उपचार करवाने आते हैं। रोजाना अस्पताल में 800 से 900 मरीजों की चिकित्सक विभिन्न ओपीडी में स्वास्थ्य जांच करते हैं। गौरतलब है कि क्षेत्रीय अस्पताल में कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी और चंबा के कुछ क्षेत्रों के मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में नेत्र रोग, बच्चों के चिकित्सक न होने से यह दोनों ओपीडी बंद हो जाएंगी। सर्जन और एनेस्थीसिया के तबादले से मरीजों के ऑपरेशन भी रुक जाएंगे। इसके अलावा पल्मोनोलॉजिस्ट की कमी से भी क्षय रोग तथा श्वास रोग से ग्रस्त मरीजों की दिक्कतों में इजाफा होगा। अस्पताल से एक साथ चिकित्सकों और कार्यक्रम अधिकारियों के तबादले से एक बार दोबारा अस्पताल में मरीजों को समस्याओं से जूझना पड़ेगा। मरीजों निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ेंगे तथा मजबूरन महंगा उपचार करवाना पड़ेगा। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश ने कहा कि अस्पताल से दो जिला कार्यक्रम अधिकारी और छह चिकित्सकों का तबादला हुआ है।
अस्पताल से इनका हुआ तबादला
चिकित्सक संख्या
जिला कार्यक्रम अधिकारी दो
नेत्र रोग विशेषज्ञ दो
शिशु रोग विशेषज्ञ एक
सर्जन एक
एनेस्थीसिया एक
पल्मोनोलॉजिस्ट एक
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू से एक साथ आठ चिकित्सकों का तबादला कर दिया गया है। इनमें दो जिला कार्यक्रम अधिकारी और छह विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं। छह चिकित्सकों के अस्पताल से चले जाने से ओपीडी में ताले लग जाएंगे। इस कारण खासकर बच्चों, नेत्र रोग और सर्जरी के मरीजों की परेशानी बढ़ेगी।
बता दें कि क्षेत्रीय अस्पताल में जिला कुल्लू समेत चार जिलों के मरीज उपचार करवाने आते हैं। रोजाना अस्पताल में 800 से 900 मरीजों की चिकित्सक विभिन्न ओपीडी में स्वास्थ्य जांच करते हैं। गौरतलब है कि क्षेत्रीय अस्पताल में कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी और चंबा के कुछ क्षेत्रों के मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में नेत्र रोग, बच्चों के चिकित्सक न होने से यह दोनों ओपीडी बंद हो जाएंगी। सर्जन और एनेस्थीसिया के तबादले से मरीजों के ऑपरेशन भी रुक जाएंगे। इसके अलावा पल्मोनोलॉजिस्ट की कमी से भी क्षय रोग तथा श्वास रोग से ग्रस्त मरीजों की दिक्कतों में इजाफा होगा। अस्पताल से एक साथ चिकित्सकों और कार्यक्रम अधिकारियों के तबादले से एक बार दोबारा अस्पताल में मरीजों को समस्याओं से जूझना पड़ेगा। मरीजों निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ेंगे तथा मजबूरन महंगा उपचार करवाना पड़ेगा। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश ने कहा कि अस्पताल से दो जिला कार्यक्रम अधिकारी और छह चिकित्सकों का तबादला हुआ है।
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अस्पताल से इनका हुआ तबादला
चिकित्सक संख्या
जिला कार्यक्रम अधिकारी दो
नेत्र रोग विशेषज्ञ दो
शिशु रोग विशेषज्ञ एक
सर्जन एक
एनेस्थीसिया एक
पल्मोनोलॉजिस्ट एक