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अकेले संघर्ष न करें, शिक्षकों, परिवार और मित्रों से खुलकर करें संवाद : डॉ. राकेश
Sat, 08 Aug 2026 10:37 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 08 Aug 2026 10:37 AM IST
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कुल्लू। किसी भी मानसिक, भावनात्मक या व्यक्तिगत समस्या की स्थिति में विद्यार्थी अकेले संघर्ष न करें बल्कि अपने शिक्षकों, परिवार और मित्रों से खुलकर संवाद करें।
यह बात राजकीय महाविद्यालय कुल्लू के प्राचार्य डॉ. राकेश राणा ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
कार्यक्रम का आयोजन आईक्यूएसी समन्वयक एवं प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. सोम पराकर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में एटीएफ कुल्लू के नोडल अधिकारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने मुख्य वक्ता के रूप में तनाव, चिंता, अवसाद, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी), नशे की लत और आत्महत्या की रोकथाम जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान कर विशेषज्ञ से परामर्श लेना और सकारात्मक जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।
डॉ. राकेश राणा ने विद्यार्थियों को तनाव और चिंता का सकारात्मक तरीके से सामना करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर है। कार्यक्रम में करीब 400 विद्यार्थियों ने भाग लिया और विशेषज्ञ के साथ संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रकोष्ठ की सदस्य प्रो. सीमा कुमारी, डॉ. चारू आहलूवालिया, डॉ. हरि सिंह, डॉ. निर्मल, डॉ. अनुपमा और प्रो. निश्चल भी उपस्थित रहे।
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यह बात राजकीय महाविद्यालय कुल्लू के प्राचार्य डॉ. राकेश राणा ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
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कार्यक्रम का आयोजन आईक्यूएसी समन्वयक एवं प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. सोम पराकर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में एटीएफ कुल्लू के नोडल अधिकारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने मुख्य वक्ता के रूप में तनाव, चिंता, अवसाद, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी), नशे की लत और आत्महत्या की रोकथाम जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान कर विशेषज्ञ से परामर्श लेना और सकारात्मक जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।
डॉ. राकेश राणा ने विद्यार्थियों को तनाव और चिंता का सकारात्मक तरीके से सामना करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर है। कार्यक्रम में करीब 400 विद्यार्थियों ने भाग लिया और विशेषज्ञ के साथ संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रकोष्ठ की सदस्य प्रो. सीमा कुमारी, डॉ. चारू आहलूवालिया, डॉ. हरि सिंह, डॉ. निर्मल, डॉ. अनुपमा और प्रो. निश्चल भी उपस्थित रहे।