फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kullu News ›   Dhalpur resonated with the sound of the conch, the meeting of gods and minds became an attraction.

Kullu News: शंख की ध्वनि से गूंजा ढालपुर, देव-मानस मिलन बना आकर्षण

Fri, 03 Oct 2025 10:58 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Fri, 03 Oct 2025 10:58 PM IST
विज्ञापन
Dhalpur resonated with the sound of the conch, the meeting of gods and minds became an attraction.
कुल्लू में दशहरा उत्सव के दुसरे दिन निकली भगवान नर सिंह की जलेब में भाग लेते देवता और देवलू।-सं
देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में सुबह और शाम को हो रही विशेष पूजा-अर्चना
विज्ञापन

ढोल-नगाड़ों और शहनाई की ध्वनियों से गुंजायमान हो रहा दशहरा का माहौल

गौरीशंकर
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना से हुई। सुबह पांच बजे ढालपुर मैदान में विराजमान देवी-देवताओं के कारकूनों ने पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू की।
अलग-अलग टेंटों में अलग-अलग समय में पूजा का दौर चला। यह दोपहर तक जारी रहा। सुबह से ढोल-नगाड़ों, शहनाई और शंख ध्वनियों से माहौल गुंजायमान रहा। देव ध्वनियों के साथ मंत्रोच्चारण कर पूजा शुरू हुई। दोपहर होते ही देवी-देवता अपने अस्थायी शिविर से हारियानों के कंधों पर सवार होकर भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में बारी-बारी पहुंचे। देवी-देवताओं के साथ ढालपुर पहुंचे कारकूनों का कहना है कि मंदिर की तर्ज पर अस्थायी शिविरों में भी नियमित पूजा-अर्चना हो रही है। देव वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर देव और मानव मिलन भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
विज्ञापन

--
हार शृंगार के बाद लगाया भगवान रघुनाथ को भोग
भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में भी सुबह पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पाठ शुरू हुआ। इस दौरान महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया। भगवान रघुनाथ का स्नान करवाया गया और हार शृंगार के बाद भोग लगाया गया। इस देव कारज के सैकड़ों श्रद्धालु गवाह बने। गौरतलब है कि भगवान रघुनाथ की पूजा दिन में चार बार होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
शिविरों में चलता रहा मिलन का सिलसिला
देवी-देवताओं के शिविरों में सुबह 11 बजे के बाद दिनभर देव मिलन का सिलसिला चलता रहा। लोग अपने देवी-देवताओं को एक-दूसरे देवताओं के शिविरों में ले जाकर देव मिलन करवाते रहे और इसी बहाने मानव मिलन भी हुआ। देव वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर देव और मानव मिलन का दृश्य देखने लायक था।

--
क्या कहते हैं देव समाज के लोग
बासुकी नाग रैला के गूर कर्ण सिंह ने कहा कि जिस तरह मंदिर में सुबह-शाम दो समय पूजा होती है, उसी तर्ज पर ढालपुर के दौरान भी नियमित पूजा होती है। सात दिनों में यह क्रम चलता है। पुंडरीक ऋषि के पुजारी नूरम ने कहा कि उत्सव के दौरान उनके देवता की सुबह आठ बजे और शाम को भी पूजा होती है। उत्सव के दौरान भी यह क्रम दोहराया जाता है।
--
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed