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Kullu News: उफनते नालों को पार कर नीलकंठ महादेव पहुंचे श्रद्धालु
Thu, 01 Aug 2024 05:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 01 Aug 2024 05:59 AM IST
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नीलकंठ महादेव झील की ओर जाने वाली रास्ते में पांडव अज्ञातवास के दिनों पांडवों के बनाए पानी का
- फोटो : अलीगंज में सड़क पर भर बारिश का पानी निकलते बाइक सवार।
केलांग (लाहौल-स्पीति)। सावन महीने में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए शिवालयों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। ऐसा ही नजारा जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में 13,124 फीट की ऊंचाई पर स्थित धार्मिक स्थल नीलकंठ महादेव झील में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में देखने को मिल रहा है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालु लाहौल के उफनती नालों को बैखौफ पार कर रहे हैं।
भोले के भक्त हर-हर महादेव के जयकारे लगाकर नाले के आर-पार कर नीलकंठ महादेव में दर्शन और स्नान को पहुंच रहे हैं। हालांकि घाटी में भी आजकल तेज धूप से पहाड़ों में ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे नदी-नाले उफान पर हैं। नीलकंठ महादेव झील की ओर जाने वाला रास्ते में पड़ने वाले नाले का जलस्तर दोपहर के बाद उफान पर रहता है। मगर श्रद्धालु नीलकंठ महादेव का नाम लेकर बेखौफ होकर नाले को पार कर रहे है।
मन्नत को पूरा करने के लिए भक्तजन लाहौल से ही नहीं बल्कि कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और चंबा सहित उत्तराखंड से भी पहुंचने लगे हैं। साल में करीब सात से आठ माह तक महादेव की नीलकंठ झील बर्फ से ढकी रहती है। जून के बाद से सितंबर और अक्तूबर तक भक्त यहां का रुख करते हैं। सावन माह होने के कारण कई भक्त नीलकंठ महादेव झील पहुंचकर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।
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दो से तीन दिन पहले नीलकंठ महादेव झील का दर्शन कर लौटे शिवभक्त मोती लाल ने बताया कि अभी भी झील के पानी में आस्था की डुबकी लगाना हाड़ कंपा रहा है। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद नीलकंठ महादेव झील की ओर जाने वाले रास्ते में पड़ने वाले नाले में पानी का बहाव उफान पर रहता है। ऐसे में यात्री दोपहर से पहले ध्यानपूर्वक नाले को आर पार कर सकते हैं।
कैसे पहुंचा जा सकता है नीलकंठ महादेव झील
जिला मुख्यालय केलांग से करीब 60 किमी दूर नीलकंठ महादेव झील समुद्रतल से 13124 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। श्रद्धालु केलांग से नैनगार गांव तक बस से सफर कर सकते हैं। वहां से करीब तीन किमी आगे तक छोटी गाड़ी से जा सकते हैं। वहां से आगे झील तक पहुंचने में सात किमी का पैदल रास्ता है। यात्रियों के ठहराव के लिए नैनगार गांव में होम स्टे की सुविधा भी है। वहां से आगे रास्ते में अल्यास ठहराव करना हो तो यात्री को अपने साथ टेंट सुविधा ले जाना होगा। इस बार एक भेड़पालक ने श्रद्धालुओं के सुविधा को अल्यास में तिरपाल का टेंट लगाने के साथ ही जरूरतमंद लोगों के लिए खाने की व्यवस्था भी अपने स्तर पर निशुल्क रखी है।
नीलकंठ महादेव नहीं जाती महिलाएं
नीलकंठ महादेव के पुजारी अमर ने बताया कि पवित्र नीलकंठ महादेव झील पर धार्मिक नियमों की वजह से महिलाएं झील का रुख नहीं करती हैं। लिहाजा, पुरुष श्रद्धालु ही इस झील का दर्शन कर सकते हैं। पुजारी ने बताया कि यह झील भगवान शिव की तपोस्थली मानी जाती है। बुजुर्गों की बात मानें तो वर्षों पूर्व धार्मिक नियमों का उल्लंघन कर एक विदेशी महिला नीलकंठ झील की ओर गई थी। मगर झील पर पहुंचने से पहले ही महिला की पहाड़ी से गिर कर मौत हो गई थी।
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भोले के भक्त हर-हर महादेव के जयकारे लगाकर नाले के आर-पार कर नीलकंठ महादेव में दर्शन और स्नान को पहुंच रहे हैं। हालांकि घाटी में भी आजकल तेज धूप से पहाड़ों में ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे नदी-नाले उफान पर हैं। नीलकंठ महादेव झील की ओर जाने वाला रास्ते में पड़ने वाले नाले का जलस्तर दोपहर के बाद उफान पर रहता है। मगर श्रद्धालु नीलकंठ महादेव का नाम लेकर बेखौफ होकर नाले को पार कर रहे है।
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मन्नत को पूरा करने के लिए भक्तजन लाहौल से ही नहीं बल्कि कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और चंबा सहित उत्तराखंड से भी पहुंचने लगे हैं। साल में करीब सात से आठ माह तक महादेव की नीलकंठ झील बर्फ से ढकी रहती है। जून के बाद से सितंबर और अक्तूबर तक भक्त यहां का रुख करते हैं। सावन माह होने के कारण कई भक्त नीलकंठ महादेव झील पहुंचकर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।
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दो से तीन दिन पहले नीलकंठ महादेव झील का दर्शन कर लौटे शिवभक्त मोती लाल ने बताया कि अभी भी झील के पानी में आस्था की डुबकी लगाना हाड़ कंपा रहा है। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद नीलकंठ महादेव झील की ओर जाने वाले रास्ते में पड़ने वाले नाले में पानी का बहाव उफान पर रहता है। ऐसे में यात्री दोपहर से पहले ध्यानपूर्वक नाले को आर पार कर सकते हैं।
कैसे पहुंचा जा सकता है नीलकंठ महादेव झील
जिला मुख्यालय केलांग से करीब 60 किमी दूर नीलकंठ महादेव झील समुद्रतल से 13124 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। श्रद्धालु केलांग से नैनगार गांव तक बस से सफर कर सकते हैं। वहां से करीब तीन किमी आगे तक छोटी गाड़ी से जा सकते हैं। वहां से आगे झील तक पहुंचने में सात किमी का पैदल रास्ता है। यात्रियों के ठहराव के लिए नैनगार गांव में होम स्टे की सुविधा भी है। वहां से आगे रास्ते में अल्यास ठहराव करना हो तो यात्री को अपने साथ टेंट सुविधा ले जाना होगा। इस बार एक भेड़पालक ने श्रद्धालुओं के सुविधा को अल्यास में तिरपाल का टेंट लगाने के साथ ही जरूरतमंद लोगों के लिए खाने की व्यवस्था भी अपने स्तर पर निशुल्क रखी है।
नीलकंठ महादेव नहीं जाती महिलाएं
नीलकंठ महादेव के पुजारी अमर ने बताया कि पवित्र नीलकंठ महादेव झील पर धार्मिक नियमों की वजह से महिलाएं झील का रुख नहीं करती हैं। लिहाजा, पुरुष श्रद्धालु ही इस झील का दर्शन कर सकते हैं। पुजारी ने बताया कि यह झील भगवान शिव की तपोस्थली मानी जाती है। बुजुर्गों की बात मानें तो वर्षों पूर्व धार्मिक नियमों का उल्लंघन कर एक विदेशी महिला नीलकंठ झील की ओर गई थी। मगर झील पर पहुंचने से पहले ही महिला की पहाड़ी से गिर कर मौत हो गई थी।

नीलकंठ महादेव झील की ओर जाने वाली रास्ते में पांडव अज्ञातवास के दिनों पांडवों के बनाए पानी का - फोटो : अलीगंज में सड़क पर भर बारिश का पानी निकलते बाइक सवार।