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Kullu News: 14 किमी कठिन चढ़ाई कर घेपन झील पहुंचीं डीसी
Thu, 24 Sep 2026 05:18 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 24 Sep 2026 05:18 AM IST
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। घेपन झील के बढ़े जलस्तर से संभावित जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन ने निगरानी और एहतियाती तैयारियां तेज कर दी हैं।
उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण भड़ाना मंगलवार को करीब 14 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई कर 4070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपन झील पहुंचीं। उन्होंने झील के जलस्तर, आसपास के भू-भाग और संभावित पानी के बहाव मार्ग का मौके पर जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान 10 विभागों के 15 अधिकारी-कर्मचारियों की टीम भी मौजूद रही। टीम ने झील के बढ़े जलस्तर से जुड़े संभावित जोखिमों का मौके पर आकलन किया। झील के जलस्तर को कम करने की संभावनाओं पर भी मंथन किया गया। साथ ही संभावित आपदा की स्थिति में अपनाई जाने वाली कार्ययोजना को लेकर चर्चा हुई।
दुर्गम क्षेत्र में बनाया बेस कैंप
दुर्गम क्षेत्र होने के कारण टीम के अन्य सदस्यों के लिए झील के नीचे बेस कैंप में रात्रि ठहरने की व्यवस्था की गई थी। उपायुक्त निरीक्षण के बाद मंगलवार को ही वापस लौट आईं, जबकि टीम के अन्य सदस्य बुधवार दोपहर बाद केलांग लौटे।
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डीसी किरण भड़ाना ने कहा कि घेपन झील के आसपास बड़ी संख्या में ग्लेशियर और पर्वत मौजूद हैं। ऐसे में इनकी स्थिरता की नियमित वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले माह नेपाल में हुई त्रासदी ने भी ग्लेशियरों की अस्थिरता से उत्पन्न संभावित खतरों की गंभीरता को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों और पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता का वैज्ञानिक आकलन सुनिश्चित करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ समन्वय किया जाएगा। संभावित जोखिमों को देखते हुए प्रशासन की ओर से निगरानी और आवश्यक तैयारियों पर लगातार काम किया जा रहा है।
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उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण भड़ाना मंगलवार को करीब 14 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई कर 4070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपन झील पहुंचीं। उन्होंने झील के जलस्तर, आसपास के भू-भाग और संभावित पानी के बहाव मार्ग का मौके पर जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान 10 विभागों के 15 अधिकारी-कर्मचारियों की टीम भी मौजूद रही। टीम ने झील के बढ़े जलस्तर से जुड़े संभावित जोखिमों का मौके पर आकलन किया। झील के जलस्तर को कम करने की संभावनाओं पर भी मंथन किया गया। साथ ही संभावित आपदा की स्थिति में अपनाई जाने वाली कार्ययोजना को लेकर चर्चा हुई।
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दुर्गम क्षेत्र में बनाया बेस कैंप
दुर्गम क्षेत्र होने के कारण टीम के अन्य सदस्यों के लिए झील के नीचे बेस कैंप में रात्रि ठहरने की व्यवस्था की गई थी। उपायुक्त निरीक्षण के बाद मंगलवार को ही वापस लौट आईं, जबकि टीम के अन्य सदस्य बुधवार दोपहर बाद केलांग लौटे।
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डीसी किरण भड़ाना ने कहा कि घेपन झील के आसपास बड़ी संख्या में ग्लेशियर और पर्वत मौजूद हैं। ऐसे में इनकी स्थिरता की नियमित वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले माह नेपाल में हुई त्रासदी ने भी ग्लेशियरों की अस्थिरता से उत्पन्न संभावित खतरों की गंभीरता को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों और पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता का वैज्ञानिक आकलन सुनिश्चित करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ समन्वय किया जाएगा। संभावित जोखिमों को देखते हुए प्रशासन की ओर से निगरानी और आवश्यक तैयारियों पर लगातार काम किया जा रहा है।