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Kullu News: जज्बे को सलाम... टीबी को हराने के लिए आशा कार्यकर्ता ने चढ़ा बर्फ का पहाड़
Wed, 12 Feb 2025 05:22 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 12 Feb 2025 05:22 AM IST
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24 किलोमीटर पैदल सफर कर पहुंचीं शाक्टी, मरौड़ और शुगाड़ गांव, 26 बच्चों और 35 व्यस्कों-बुजुर्गों की जांच की
टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने का जुनून, नदी-नालों, जंगल-झाड़ियों और पहाड़ियों की विकट पगडंडियों से होकर पहुंचीं गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। सड़क न पक्का रास्ता। नदी-नाले, जंगल-झाड़ियां और पहाड़ पर विकट पगडंडियां। कहीं जंगली जानवरों का डर तो कहीं भूस्खलन में फंसने का। बावजूद इसके आशा कार्यकर्ता टीबी को हराने के लिए जान जोखिम में डालकर इन्हीं पगडंडियाें पर पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुंच रही हैं। इनके उत्साह में कोई कमी नहीं।
टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ता चिंता के जुनून के सामने बर्फ का पहाड़ भी छोटा पड़ गया। चिंता ने 24 किलोमीटर लंबे पैदल सफर को कड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए पार किया। छह किलोमीटर रास्ता पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ था। लेकिन फर्ज को निभाने के जुनून में चिंता ने जान जोखिम में डालकर बर्फ की चुनौती को खुशी-खुशी पार कर दिया। तमाम दिक्कतें झेलने के बाद चिंता अति दुर्गम गांव शाक्टी, मरौड़ और शुगाड़ पहुंचीं।
यहां उन्होंने गांवों के 61 लोगों का स्वास्थ्य जांचा। उनका हालचाल भी जाना। चिंता ने शून्य से पांच साल के 26 और 35 व्यस्कों और बुजुर्गों की जांच की। उन्होंने ग्रामीणों को कुष्ठ और क्षय रोग के लक्षण दिखने पर उपचार के लिए तत्परता दिखाने के लिए भी जागरूक किया। उल्लेखनीय है कि जिला कुल्लू में स्वास्थ्य विभाग 100 दिन तक टीबी उन्मूलन अभियान चला रहा है। इसके चलते गांव-गांव और घर-घर में क्षय रोगियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सपना शर्मा ने बताया कि बंजार के सभी गांवों में क्षय रोग उन्मूलन अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता चिंता ने बर्फ की परवाह न करते हुए अपने फर्ज को निभाया है। उनके जज्बे को सलाम है।
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गाडापारली पंचायत में नहीं है सड़क
ग्राम पंचायत गाडापारली का एक भी गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। देश की आजादी के बाद भी पंचायत के 15 गांव सड़क की राह देख रहे हैं। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज निपटाने के लिए सड़क सुविधा के अभाव में 20 से 25 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता है।
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टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने का जुनून, नदी-नालों, जंगल-झाड़ियों और पहाड़ियों की विकट पगडंडियों से होकर पहुंचीं गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। सड़क न पक्का रास्ता। नदी-नाले, जंगल-झाड़ियां और पहाड़ पर विकट पगडंडियां। कहीं जंगली जानवरों का डर तो कहीं भूस्खलन में फंसने का। बावजूद इसके आशा कार्यकर्ता टीबी को हराने के लिए जान जोखिम में डालकर इन्हीं पगडंडियाें पर पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुंच रही हैं। इनके उत्साह में कोई कमी नहीं।
टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ता चिंता के जुनून के सामने बर्फ का पहाड़ भी छोटा पड़ गया। चिंता ने 24 किलोमीटर लंबे पैदल सफर को कड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए पार किया। छह किलोमीटर रास्ता पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ था। लेकिन फर्ज को निभाने के जुनून में चिंता ने जान जोखिम में डालकर बर्फ की चुनौती को खुशी-खुशी पार कर दिया। तमाम दिक्कतें झेलने के बाद चिंता अति दुर्गम गांव शाक्टी, मरौड़ और शुगाड़ पहुंचीं।
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यहां उन्होंने गांवों के 61 लोगों का स्वास्थ्य जांचा। उनका हालचाल भी जाना। चिंता ने शून्य से पांच साल के 26 और 35 व्यस्कों और बुजुर्गों की जांच की। उन्होंने ग्रामीणों को कुष्ठ और क्षय रोग के लक्षण दिखने पर उपचार के लिए तत्परता दिखाने के लिए भी जागरूक किया। उल्लेखनीय है कि जिला कुल्लू में स्वास्थ्य विभाग 100 दिन तक टीबी उन्मूलन अभियान चला रहा है। इसके चलते गांव-गांव और घर-घर में क्षय रोगियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सपना शर्मा ने बताया कि बंजार के सभी गांवों में क्षय रोग उन्मूलन अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता चिंता ने बर्फ की परवाह न करते हुए अपने फर्ज को निभाया है। उनके जज्बे को सलाम है।
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गाडापारली पंचायत में नहीं है सड़क
ग्राम पंचायत गाडापारली का एक भी गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। देश की आजादी के बाद भी पंचायत के 15 गांव सड़क की राह देख रहे हैं। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज निपटाने के लिए सड़क सुविधा के अभाव में 20 से 25 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता है।
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