सीवरेज से दूषित हो रही है ब्यास नदी
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विश्व प्रसिद्घ पर्यटन स्थल मनाली में सीवरेज से ब्यास नदी दूषित हो रही है। हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद ब्यास नदी को स्वच्छ रखने के दावे हवा साबित हो रहे हैं। सीवरेज को अंधेरे में ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा है। वहीं प्रदूषण बोर्ड और आईपीएच महकमा इससे बेखबर है। हालांकि एनजीटी ने भी ब्यास में गंदगी को लेकर आदेश दिए हैं, लेकिन चोरी छिपे ब्यास में गंदगी फेंकने का सिलसिला जारी है। मनाली में आने वाले सैलानियों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। जिसके कारण मनाली और आसपास के क्षेत्रों प्रदूषण बढ़ रहा है। मनाली शहर में सीवरेज प्रणाली है, लेकिन साथ लगते कई क्षेत्रों में सीवरेज प्रणाली के अभाव में ब्यास नदी दूषित हो रही है।
पर्यटन सीजन जोरों पर होने के कारण सभी होटल पैक हैं। सीवरेज प्रणाली से जुड़ेे हुए न होने के कारण गंदगी को नालियों में छोड़ा जा रहा है। जो सीधे ब्यास नदी और सहायक नदियों में मिल रही है। गंदे पानी को स्थानीय लोग अपने खेतों में सिंचाई के लिए प्रयोग में ला रहे हैं। गंदे पानी को सिंचाई में प्रयोग करने की वजह से सब्जियां भी खराब हो रही हैं। वहीं, स्थानीय लोगों के मवेशियों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पर्यावरणविद् किशन लाल ने कहा कि ब्यास नदी में गंदगी फैलने से पर्यावरण खराब हो रहा है। गंदगी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं इस संबंध में आईपीएच विभाग मनाली के एसडीओ योगेश कपूर ने बताया कि मनाली के शहर सभी होटल सीवरेज प्रणाली से जुड़े हैं। मनाली शहर के साथ लगते गांव वशिष्ट से लेकर जगतसुख गांव तक लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत वाली सीवरेज प्रणाली की डीपीआर बनाकर भेज दी गई है। शिमला से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू किया जाएगा। इधर, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशाषी अभियंता डॉ आरके नड्डा ने कहा कि गंदगी फैलाने के बारे में अभी तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। शिकायत दर्ज होने पर चेकिंग की जाएगी।