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Kullu News: ईटीएस मशीनें खराब हाेने से लटका बंदोबस्त का लटका
Sun, 16 Feb 2025 10:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 16 Feb 2025 10:04 PM IST
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आठ महीने से नहीं हो पाई भूमि की पैमाइश, दुरुस्त नहीं हो पाईं चारों मशीनें
सेटेलाइट, ईटीएस और जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीक से चल रहा बंदोबस्त का काम
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले में बंदोबस्त का कार्य आठ महीने से प्रभावित चल रहा है। सेटेलाइट, ईटीएस और जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीक से पहली बार चल रहे बंदोबस्त के लिए इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक टोटल सिस्टम (ईटीएस) की चार मशीनें खराब हैं।
इतने लंबे समय से न तो ईटीएस मशीनों को ठीक किया गया है। न ही नई मशीनें उपलब्ध हो पाई हैं। इससे बंदोबस्त का कार्य प्रभावित हो गया है। जिले की मनाली तहसील में बंदोबस्त का कार्य पूरा हो चुका है। कुल्लू में बंदोबस्त कार्य की प्रक्रिया में ईटीएस मशीनों से पैमाइश की जानी थी तो मशीनें ही खराब हो गईं। इस कारण खसरा नंबर आदि मापने का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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यह है ईटीएस मशीन
इलेक्ट्रॉनिक टोटल सिस्टम एक आधुनिक जमीन मापने में इस्तेमाल होने वाली मशीन है। यह जमीन का स्टीक और सही माप करती है। इससे एक सेंटीमीटर का भी फर्क नहीं आता है। मशीन को जिले में पहली बार बंदोबस्त में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक से गड़बड़ी न के बराबर होने का दावा किया जा रहा है। बंदोबस्त कार्य में भी तेजी आएगी। सेटेलाइट, जीपीएस, ईटीएस तकनीक से बंदोबस्त की प्रक्रिया को अंजाम देने वाली एक मशीन की कीमत 15 से बीस लाख बताई जा रही है। इसके चलते चार मशीनों की कीमत करीब 20 लाख बनती है। इतनी महंगी मशीनों को अभी तक ठीक नहीं किया गया है। न ही नई मशीनों को लाया गया है।
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2018 से शुरू हुआ बंदोबस्त का कार्य
कुल्लू जिले में 1948 से 1952 के बीच बंदोबस्त हुआ था। इसके बाद वर्ष 2018 में बंदोबस्त का कार्य शुरू हुआ है। हालांकि, इस क्षेत्र में बंदोबस्त 40 साल बाद होता है, लेकिन कुल्लू में यह कार्य 66 साल बाद शुरू हुआ है। कार्य शुरू हुए छह साल का समय हो गया है, लेकिन अब ईटीएस मशीनें खराब होने से कार्य प्रभावित हो रहा है।
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बंदोबस्त के कार्य में इस्तेमाल होने वाली ईटीएस मशीनें खराब हैं। इस कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। इसका विकल्प मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. चरंजी लाल चौहान, सहायक भू व्यवस्था अधिकारी
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सेटेलाइट, ईटीएस और जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीक से चल रहा बंदोबस्त का काम
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले में बंदोबस्त का कार्य आठ महीने से प्रभावित चल रहा है। सेटेलाइट, ईटीएस और जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीक से पहली बार चल रहे बंदोबस्त के लिए इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक टोटल सिस्टम (ईटीएस) की चार मशीनें खराब हैं।
इतने लंबे समय से न तो ईटीएस मशीनों को ठीक किया गया है। न ही नई मशीनें उपलब्ध हो पाई हैं। इससे बंदोबस्त का कार्य प्रभावित हो गया है। जिले की मनाली तहसील में बंदोबस्त का कार्य पूरा हो चुका है। कुल्लू में बंदोबस्त कार्य की प्रक्रिया में ईटीएस मशीनों से पैमाइश की जानी थी तो मशीनें ही खराब हो गईं। इस कारण खसरा नंबर आदि मापने का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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यह है ईटीएस मशीन
इलेक्ट्रॉनिक टोटल सिस्टम एक आधुनिक जमीन मापने में इस्तेमाल होने वाली मशीन है। यह जमीन का स्टीक और सही माप करती है। इससे एक सेंटीमीटर का भी फर्क नहीं आता है। मशीन को जिले में पहली बार बंदोबस्त में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक से गड़बड़ी न के बराबर होने का दावा किया जा रहा है। बंदोबस्त कार्य में भी तेजी आएगी। सेटेलाइट, जीपीएस, ईटीएस तकनीक से बंदोबस्त की प्रक्रिया को अंजाम देने वाली एक मशीन की कीमत 15 से बीस लाख बताई जा रही है। इसके चलते चार मशीनों की कीमत करीब 20 लाख बनती है। इतनी महंगी मशीनों को अभी तक ठीक नहीं किया गया है। न ही नई मशीनों को लाया गया है।
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2018 से शुरू हुआ बंदोबस्त का कार्य
कुल्लू जिले में 1948 से 1952 के बीच बंदोबस्त हुआ था। इसके बाद वर्ष 2018 में बंदोबस्त का कार्य शुरू हुआ है। हालांकि, इस क्षेत्र में बंदोबस्त 40 साल बाद होता है, लेकिन कुल्लू में यह कार्य 66 साल बाद शुरू हुआ है। कार्य शुरू हुए छह साल का समय हो गया है, लेकिन अब ईटीएस मशीनें खराब होने से कार्य प्रभावित हो रहा है।
बंदोबस्त के कार्य में इस्तेमाल होने वाली ईटीएस मशीनें खराब हैं। इस कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। इसका विकल्प मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. चरंजी लाल चौहान, सहायक भू व्यवस्था अधिकारी