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Kullu News: समय से पहले सिमटने लगा सेब सीजन
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ऊंचाई वाले इलाकों में लेट वैरायटी बाकी
दूसरे सप्ताह तक पूरी तरह सिमटने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में इस साल सेब का सीजन समय से पहले ही सिमटने लगा है। बंदरोल सब्जी मंडी में कई आढ़तियों की दुकानों पर सेब आना भी बंद हो गया है। अधिकतर क्षेत्रों में सेब का सीजन खत्म हो चुका है। हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बड़े बागवानों के बगीचों में अभी लेट वैरायटी का सेब बाकी है। बताया जा रहा है कि इस साल सेब का सीजन पिछले वर्षों के मुकाबले समय से पहले समाप्त हो जाएगा। कुछ बागवान मजदूरों का हिसाब करने में जुट गए हैं, जबकि कई मजदूर घर लौटने की तैयारी में हैं। घाटी के बागवान अमित, वीर सिंह, चमन ठाकुर, सतीश, ज्ञान ठाकुर, देवराज नेगी और प्रताप ठाकुर का कहना है कि इस साल सेब की पैदावार पिछले पांच वर्षों के मुकाबले कम है। इस वर्ष करीब 38 लाख पेटियों के उत्पादन की संभावना है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि घाटी में सेब सीजन अंतिम चरण में पहुंच गया है। हालांकि, बड़े बागवानों के पास अभी लेट वैरायटी का सेब बाकी है। अक्तूबर के दूसरे सप्ताह तक सेब सीजन पूरी तरह सिमट जाने की उम्मीद है। बंदरोल सब्जी मंडी के आढ़ती मोहन ठाकुर ने कहा कि अब उनकी दुकान में सेब आना बंद हो गया है। मंडी में करीब 70 आढ़तियों की दुकानों में अब सेब की सैकड़ों क्रेट ही पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में सेब का सीजन पूरी तरह सिमट जाएगा। बागवानी विभाग के उपनिदेशक राज कुमार ने कहा कि जिले में सेब का कुल उत्पादन कितना है, इसकी रिपोर्ट सीजन खत्म होने पर तैयार की जाएगी।
मौसम की मार से उत्पादन में गिरावट
इस बार मई तक बेमौसमी बर्फबारी से सेब के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। खासकर 20 मार्च और अप्रैल के पहले हफ्ते में जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी से एकाएक बढ़ी ठंड से सेब की फ्लावरिंग और सेटिंग पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा ओला और अधंड़ से भी सेब की फसल को बहुत नुकसान पहुंचा है। जिले में करीब 1,000 करोड़ का सेब कारोबार होता है। 75 से 80 लाख पेटियों का एक अच्छा उत्पादन माना जाता है जबकि इस बार यह आंकड़ा 40 लाख से भी कम है।
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दूसरे सप्ताह तक पूरी तरह सिमटने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में इस साल सेब का सीजन समय से पहले ही सिमटने लगा है। बंदरोल सब्जी मंडी में कई आढ़तियों की दुकानों पर सेब आना भी बंद हो गया है। अधिकतर क्षेत्रों में सेब का सीजन खत्म हो चुका है। हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बड़े बागवानों के बगीचों में अभी लेट वैरायटी का सेब बाकी है। बताया जा रहा है कि इस साल सेब का सीजन पिछले वर्षों के मुकाबले समय से पहले समाप्त हो जाएगा। कुछ बागवान मजदूरों का हिसाब करने में जुट गए हैं, जबकि कई मजदूर घर लौटने की तैयारी में हैं। घाटी के बागवान अमित, वीर सिंह, चमन ठाकुर, सतीश, ज्ञान ठाकुर, देवराज नेगी और प्रताप ठाकुर का कहना है कि इस साल सेब की पैदावार पिछले पांच वर्षों के मुकाबले कम है। इस वर्ष करीब 38 लाख पेटियों के उत्पादन की संभावना है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि घाटी में सेब सीजन अंतिम चरण में पहुंच गया है। हालांकि, बड़े बागवानों के पास अभी लेट वैरायटी का सेब बाकी है। अक्तूबर के दूसरे सप्ताह तक सेब सीजन पूरी तरह सिमट जाने की उम्मीद है। बंदरोल सब्जी मंडी के आढ़ती मोहन ठाकुर ने कहा कि अब उनकी दुकान में सेब आना बंद हो गया है। मंडी में करीब 70 आढ़तियों की दुकानों में अब सेब की सैकड़ों क्रेट ही पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में सेब का सीजन पूरी तरह सिमट जाएगा। बागवानी विभाग के उपनिदेशक राज कुमार ने कहा कि जिले में सेब का कुल उत्पादन कितना है, इसकी रिपोर्ट सीजन खत्म होने पर तैयार की जाएगी।
मौसम की मार से उत्पादन में गिरावट
इस बार मई तक बेमौसमी बर्फबारी से सेब के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। खासकर 20 मार्च और अप्रैल के पहले हफ्ते में जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी से एकाएक बढ़ी ठंड से सेब की फ्लावरिंग और सेटिंग पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा ओला और अधंड़ से भी सेब की फसल को बहुत नुकसान पहुंचा है। जिले में करीब 1,000 करोड़ का सेब कारोबार होता है। 75 से 80 लाख पेटियों का एक अच्छा उत्पादन माना जाता है जबकि इस बार यह आंकड़ा 40 लाख से भी कम है।
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