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अमर उजाला अभियान शिक्षा: स्कूल पहुंचकर कोरोना के तनाव से उबर रहे विद्यार्थी
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कुल्लू। कोरोना काल में शिक्षण संस्थान बंद रहे। ऐसे में शिक्षा ऑनलाइन प्रदान की गई। घरों में कैद रहने के कारण विद्यार्थी मानसिक तनाव की चपेट में आए हैं। दो साल बाद कोरोना से स्थिति सामान्य हुई तो कक्षाएं ऑफलाइन शुरू हुईं। अध्यापकों ने अभिभावकों के साथ मिलकर विद्यार्थियों को तनाव से उबारने का प्लान तैयार किया है। रोजाना स्वास्थ्य काउंसलिंग और योगाभ्यास को विद्यार्थियों की दिनचर्या में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने को लेकर अतिरिक्त कक्षाएं भी लग रही हैं। स्कूल प्रबंधन की इस तरह की पहल से काफी हद तक विद्यार्थी तनाव से बाहर आ रहे हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय सुल्तानपुर (कुल्लू) के प्रधानाचार्य प्रेम ठाकुर ने कहा कि शिक्षण गतिविधियों में बदलाव लाने पड़े हैं। स्कूल खुलने के बाद वार्षिक परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के मन में कई संशय रहे हैं, जो उनके मानसिक तनाव को ओर बढ़ा रहेे थे। विद्यार्थियों को इससे मुक्त करने के लिए शिक्षकों ने पाठ्यक्रम के अलावा काउंसलिंग का सहारा लिया, जो विद्यार्थियों को तनाव से उबारने में कारगर सिद्ध हुआ।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक छात्र विद्यालय कुल्लू के प्रधानाचार्य भीम कटोच ने कहा कि विद्यार्थी तनाव मेें न रहें। इसके लिए समय-समय पर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए कक्षाएं लगाई गईं, जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के वक्ताओं को बुलाया गया। जनवरी माह में स्कूल खुलने के बाद विद्यार्थियों के पास परीक्षा की तैयारी का समय कम रहा है, कोरोना के कारण पहले से मानसिक तनाव तथा परीक्षा की तैयारी ने विद्यार्थियों को चिड़चिड़ा बना दिया था, जिससे उन्हें उबारने के हर संभव प्रयास किए गए।
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विद्यार्थियों से संवाद करें अध्यापक, अभिभावक
जिला कोविड निगरानी अधिकारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि कोरोना में ऑनलाइन गतिविधियां अधिक करवाई गई है। विद्यार्थियों की कक्षाएं भी ऑनलाइन ही लगी हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों को मोबाइल की आदत पड़ चुकी है, लेकिन उन्हें इस आदत से उबारने के लिए अभिभावक और अध्यापक उनके साथ आमने-सामने बैठ कर सीधा संवाद करें। इससे विद्यार्थी खुलकर बातचीत कर पाएंगे और उनका मानसिक तनाव भी कम होगा।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय सुल्तानपुर (कुल्लू) के प्रधानाचार्य प्रेम ठाकुर ने कहा कि शिक्षण गतिविधियों में बदलाव लाने पड़े हैं। स्कूल खुलने के बाद वार्षिक परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के मन में कई संशय रहे हैं, जो उनके मानसिक तनाव को ओर बढ़ा रहेे थे। विद्यार्थियों को इससे मुक्त करने के लिए शिक्षकों ने पाठ्यक्रम के अलावा काउंसलिंग का सहारा लिया, जो विद्यार्थियों को तनाव से उबारने में कारगर सिद्ध हुआ।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक छात्र विद्यालय कुल्लू के प्रधानाचार्य भीम कटोच ने कहा कि विद्यार्थी तनाव मेें न रहें। इसके लिए समय-समय पर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए कक्षाएं लगाई गईं, जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के वक्ताओं को बुलाया गया। जनवरी माह में स्कूल खुलने के बाद विद्यार्थियों के पास परीक्षा की तैयारी का समय कम रहा है, कोरोना के कारण पहले से मानसिक तनाव तथा परीक्षा की तैयारी ने विद्यार्थियों को चिड़चिड़ा बना दिया था, जिससे उन्हें उबारने के हर संभव प्रयास किए गए।
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विद्यार्थियों से संवाद करें अध्यापक, अभिभावक
जिला कोविड निगरानी अधिकारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि कोरोना में ऑनलाइन गतिविधियां अधिक करवाई गई है। विद्यार्थियों की कक्षाएं भी ऑनलाइन ही लगी हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों को मोबाइल की आदत पड़ चुकी है, लेकिन उन्हें इस आदत से उबारने के लिए अभिभावक और अध्यापक उनके साथ आमने-सामने बैठ कर सीधा संवाद करें। इससे विद्यार्थी खुलकर बातचीत कर पाएंगे और उनका मानसिक तनाव भी कम होगा।