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Kullu News: लगघाटी के भल्याणी गांव में उमड़ा आस्था का सैलाब
Sun, 29 Jun 2025 10:34 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 29 Jun 2025 10:34 PM IST
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कुल्लू के लगघाटी में चल रहे माता फुंगनी के देव कारज के दौरान देव प्रक्रिया का निर्वहन करते कारक
मनाउणी के बाद देवालय लौटीं माता फूंगणी
वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों से गूंजी उठी घाटी
संवाद न्यूज एजेंसी
भल्याणी (कुल्लू)। लगघाटी के गांव भल्याणी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों श्रद्धालु देव परंपरा के साक्षी बने। मनाउणी पर्व की परंपरा का निर्वहन करने के बाद माता फूंगणी देवालय की ओर से रवाना हुईं।
बीते शनिवार को आराध्य माता फूंगणी मनाउणी पर्व के लिए हारियानों व लाव-लश्कर सहित भल्याणी गांव में पहुंची थीं। माता फूंगणी के भल्याणी पहुंचने के बाद वाद्ययंत्रों की थाप पर देवखेल हुई। इसे देखने के लिए श्रद्धालु उमड़े। इसके बाद अन्य देव परंपराओं को निभाया गया। गौर रहे कि लगघाटी के समस्त देवी-देवताओं के देवलुओं ने भी मनाउणी पर्व में शिरकत की। पर्व में भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मनाउणी एक प्राचीन और पवित्र परंपरा है, जिसे पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। देव कतरूसी नारायण माता फूंगणी के बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कभी-कभी माता अपने क्षेत्रवासियों से नाराज होकर भल्याणी आ जाती हैं। ऐसे में माता को मनाने के लिए लगघाटी के सभी देवी-देवताओं के हारियान (पुजारी) और क्षेत्रवासी भल्याणी पहुंचते हैं और अपनी भक्ति व अनुरोध से मां को वापस तियून ले जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। और निरंतर हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखती है। कहा कि हमारे प्रदेश में ऐसे अनेक देव आयोजन होते हैं, जो अपने आप में अनूठे और विशिष्ट हैं। इन परंपराओं से जुड़ा रहना न केवल हमारी पहचान, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए भी गर्व और जागरूकता का कारण है।
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वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों से गूंजी उठी घाटी
संवाद न्यूज एजेंसी
भल्याणी (कुल्लू)। लगघाटी के गांव भल्याणी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों श्रद्धालु देव परंपरा के साक्षी बने। मनाउणी पर्व की परंपरा का निर्वहन करने के बाद माता फूंगणी देवालय की ओर से रवाना हुईं।
बीते शनिवार को आराध्य माता फूंगणी मनाउणी पर्व के लिए हारियानों व लाव-लश्कर सहित भल्याणी गांव में पहुंची थीं। माता फूंगणी के भल्याणी पहुंचने के बाद वाद्ययंत्रों की थाप पर देवखेल हुई। इसे देखने के लिए श्रद्धालु उमड़े। इसके बाद अन्य देव परंपराओं को निभाया गया। गौर रहे कि लगघाटी के समस्त देवी-देवताओं के देवलुओं ने भी मनाउणी पर्व में शिरकत की। पर्व में भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मनाउणी एक प्राचीन और पवित्र परंपरा है, जिसे पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। देव कतरूसी नारायण माता फूंगणी के बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कभी-कभी माता अपने क्षेत्रवासियों से नाराज होकर भल्याणी आ जाती हैं। ऐसे में माता को मनाने के लिए लगघाटी के सभी देवी-देवताओं के हारियान (पुजारी) और क्षेत्रवासी भल्याणी पहुंचते हैं और अपनी भक्ति व अनुरोध से मां को वापस तियून ले जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। और निरंतर हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखती है। कहा कि हमारे प्रदेश में ऐसे अनेक देव आयोजन होते हैं, जो अपने आप में अनूठे और विशिष्ट हैं। इन परंपराओं से जुड़ा रहना न केवल हमारी पहचान, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए भी गर्व और जागरूकता का कारण है।
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