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भूस्खलन का पता लगाने बुधवार को धारा गांव आएगी भू-वैज्ञानिकों की टीम
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सैंज के धारा गांव में मकान पर दरारें आने से नए घर बनाने में जुटे आपदा प्रभावित ग्रामीण। संवाद।
- फोटो : Kullu
सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी के सुचैहण पंचायत के धारा गांव धंसने के कारण की जांच के लिए बुधवार को भू-वैज्ञानिकों की टीम पहुंचेगी।
भू-वैज्ञानिकों की टीम भूस्खलन से धंस रहे धारा गांव को बचाने की संभावनाएं और कारणों की जांच करने के लिए गांव का दौरा करेगी। इस दौरान प्रशासन के आला अधिकारी और पंचायत के प्रतिनिधि भी गांव में मौजूद रहेंगे। जिला खनन अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि प्रशासन ने भू वैज्ञानिकों को गांव धंसने के कारणों का बारीकी से निरीक्षण करने को कहा है। घटना की वैज्ञानिक तौर जांच कर जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
भूस्खलन से गांव के 13 परिवार प्रभावित हुए हैं। संभावित खतरे को देखते हुए सभी ग्रामीण घर खाली कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर चुके हैं। कुछ लोगों ने पुश्तैनी घर उखाड़कर नए बसेरों को बसाने के लिए लोग जद्दोजहद शुरू कर दी हैं। घर उजड़ने से लोग सदमे में हैं। साथ ही सिर छिपाने के लिए छत का इंतजाम करने की चिंता सता रही है। बरसात की मार से उभर रहे ग्रामीण गांव के नजदीक ही नए बसरे बनाने में जुट गए हैं।
तारा देवी का पुराना घर उखाड़ दिया गया है। खेत में पुश्तैनी घर के पत्थर और लकड़ी से नया मकान तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। सोभा राम को भी सिर छिपाने के लिए रिश्तेदारों की मदद से एक कमरे का कच्चा मकान बनाया जा रहा है। गिरने के कगार पर पहुंचे अजवीर सिंह, किशोरी लाल, संगत राम और निरत राम का पुश्तैनी घर उखाड़ा जा रहा है।
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बेली राम, वीर सिंह, लक्ष्मी कांत और नंद राम का मकान पूरी तरह से दरक गए हैं। ग्रामीण कभी उजड़े घरों में बिताए दिनों को याद कर रहे हैं तो कभी भविष्य को लेकर अपनी चिंता जता रहे हैं।
धंसने की रफ्तार थमी लेकिन खतरा बरकरार
धारा गांव में तीन दिन से भूस्खलन की रफ्तार थम हो गई है। बीते 17 दिनों से लगातार धंस रही गांव की लगभग 50 बीघा जमीन में कोई नई हरकत न होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बारिश होने की स्थिती में खेतों में उभरी दरारें में पानी भरने से खतरा अभी भी बरकरार है।
हर परिवार को एक लाख मिलेगी राहत राशि
प्रशासन ने गांव के पांच परिवारों को चिह्नित कर प्रति परिवार एक लाख रुपये की राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। तहसीलदार सैंज हीरा चंद नलवा ने बताया कि गांव की सइना देवी, तारा देवी, सोभा राम, बेलीराम और हरिराम मूल रूप से रिहायशी करते थे। सभी प्रभावितों के दस्तावेज तैयार कर जिला प्रशासन को भेजे जा रहे हैं।
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भू-वैज्ञानिकों की टीम भूस्खलन से धंस रहे धारा गांव को बचाने की संभावनाएं और कारणों की जांच करने के लिए गांव का दौरा करेगी। इस दौरान प्रशासन के आला अधिकारी और पंचायत के प्रतिनिधि भी गांव में मौजूद रहेंगे। जिला खनन अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि प्रशासन ने भू वैज्ञानिकों को गांव धंसने के कारणों का बारीकी से निरीक्षण करने को कहा है। घटना की वैज्ञानिक तौर जांच कर जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
भूस्खलन से गांव के 13 परिवार प्रभावित हुए हैं। संभावित खतरे को देखते हुए सभी ग्रामीण घर खाली कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर चुके हैं। कुछ लोगों ने पुश्तैनी घर उखाड़कर नए बसेरों को बसाने के लिए लोग जद्दोजहद शुरू कर दी हैं। घर उजड़ने से लोग सदमे में हैं। साथ ही सिर छिपाने के लिए छत का इंतजाम करने की चिंता सता रही है। बरसात की मार से उभर रहे ग्रामीण गांव के नजदीक ही नए बसरे बनाने में जुट गए हैं।
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तारा देवी का पुराना घर उखाड़ दिया गया है। खेत में पुश्तैनी घर के पत्थर और लकड़ी से नया मकान तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। सोभा राम को भी सिर छिपाने के लिए रिश्तेदारों की मदद से एक कमरे का कच्चा मकान बनाया जा रहा है। गिरने के कगार पर पहुंचे अजवीर सिंह, किशोरी लाल, संगत राम और निरत राम का पुश्तैनी घर उखाड़ा जा रहा है।
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बेली राम, वीर सिंह, लक्ष्मी कांत और नंद राम का मकान पूरी तरह से दरक गए हैं। ग्रामीण कभी उजड़े घरों में बिताए दिनों को याद कर रहे हैं तो कभी भविष्य को लेकर अपनी चिंता जता रहे हैं।
धंसने की रफ्तार थमी लेकिन खतरा बरकरार
धारा गांव में तीन दिन से भूस्खलन की रफ्तार थम हो गई है। बीते 17 दिनों से लगातार धंस रही गांव की लगभग 50 बीघा जमीन में कोई नई हरकत न होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बारिश होने की स्थिती में खेतों में उभरी दरारें में पानी भरने से खतरा अभी भी बरकरार है।
हर परिवार को एक लाख मिलेगी राहत राशि
प्रशासन ने गांव के पांच परिवारों को चिह्नित कर प्रति परिवार एक लाख रुपये की राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। तहसीलदार सैंज हीरा चंद नलवा ने बताया कि गांव की सइना देवी, तारा देवी, सोभा राम, बेलीराम और हरिराम मूल रूप से रिहायशी करते थे। सभी प्रभावितों के दस्तावेज तैयार कर जिला प्रशासन को भेजे जा रहे हैं।